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on: Feb 16, 2010
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tags: nirbhay
language: hi

जिस्म से रूह को ले कर निकला....
याद का जब भी कबूतर निकला.....

मुझको तोड़ा गया सच कहने पर,
आईने जैसा मुक़द्दर निकला....

झील के जैसा लगा, था मुझको,
छू के देखा तो समंदर निकला.....

उन निगाहों मे नशा कितना है,
हर दफ़ा पहले से बढ़कर निकला.....

इश्क़ का शहर अजब है मौला,
जो मिला हमको वो बेघर निकला,....

हमला करता था अंधेरे में,
धूप मे आँख चुरा कर निकला....

ताजपोशी में, कुंवर से कहना,
बीरबल से ही था, अकबर निकला....

हाथ फिर वो ना आ पाया, मेरे,
ख्वाब चादर से जो बाहर निकला....
 
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on: Aug 6, 2013
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language: hi

उस दिन ट्रेन लेट होकर रात्रि 12 बजे पहुँची।
बाहर एक वृद्ध रिक्शावाला ही दिखा जिसे कई यात्री जान बूझकर छोड़ गए थे। एक बार मेरे मन में भी आया, इससे चलनापाप होगा, फिर मजबूरी में उसी को बुलाया, वह भी बिना कुछ पूछे चल दिया।

कुछ दूर चलने के बाद ओवरब्रिज की चढ़ाई थी, तब जाकर पता चला, उसका एक ही हाथ था। मैंने सहानुभूतिवश पूछा, ‘‘एक हाथ से रिक्शा चलाने में बहुत ही परेशानी होती होगी?’’

‘‘बिल्कुल नहीं बाबूजी, शुरू में कुछ दिन हुई थी।’’

रात के सन्नाटे में वह एक ही हाथ से रिक्शा खींचते हुए पसीने-पसीने हो रहा था । मैंने पूछा, ‘एक हाथ की क्या कहानी है?’’

थोड़ी देर की चुप्पी के बाद वह बोला, ‘‘गाँव में खेत के बँटवारे में रंजिश हो गई, वे लोग दबंग और अपराधी स्वभाव के थे, मुकदमा उठाने के लिए दबाव डालने लगे।’’ वह कुछ गम्भीर हो गया और आगे की बात बताने से कतराने लगा, किन्तु मेरी उत्सुकता के आगे वह विवश हो गया और बताया, ‘‘एक रात जब मैं खलिहान में सो रहा था,
जान मारने की नीयत से मुझ पर वार किया गया।
संयोग से वह गड़ासा गर्दन पर गिरने के बजाए हाथ पर गिरा और वह कट गया।’’

‘‘क्या दिन की मजदूरी से काम नहीं चलता जो इस उम्र में रात में रिक्शा चला रहे हो?’’ मुझे उस पर दया आई।

‘‘रात्रि में भीड़ कम होती है जिससे रिक्शा चलाने में आसानी होती है।’’ उसने धीरे से कहा।

उसकी विवशता समझकर घर पर मैंने पाँच रूपए के बजाए दस रुपए दिए।
सीढियां चढ़कर दरवाजा खुलवा ही रहा था कि वह भी हाँफते हुए पहुँचा और पाँच रुपए का नोट वापस करते हुए बोला, ‘‘आपने ज्यादा दे दिया था।’’

‘‘आपकी अवस्था देखकर और रात की मेहनत सोचकर कोई अधिक नहीं है, मैं खुशी से दे रहा हूँ।’’

उसने जवाब दिया, ‘‘मेरी प्रतिज्ञा है एक हाथ के रहते हुए भी दया की भीख नहीं लूँगा, तन ही बूढ़ा हुआ है मन नहीं।’
 
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on: Feb 3, 2012
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tags: friends
language: hi

मंज़िलें भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था;
एक हम ही अकेले तेई, काफिला भी उसका था;

साथ चलने की सोच भी उसकी थी,
फिर रास्ता बदलने का फ़ैसला भी उसका था:

आज अकेले हैं दिल सवाल करता है
लोग तो उसके थे, क्या खुदा भी उसका था ?
 
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on: Sep 10, 2009
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language: hi

HUM kuch is tarah se dosti nibhayenge...
naukri naaa mili to bikul nahi ghabrayenge.....
dono station milkar chaai ki dukaan lagayenge..
tum chaai banana,,,hum chaai chaai chillayenge..
:P ;) :P
 
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on: Aug 19, 2011
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tags: Manu
language: hi

Jeevan me kamyab hone ke liye 3 factory lagao!!!!
1) Dimag me Ice factory.
2) Zuban par Sugar factory.
3) Dil me Love factory.
Phir life hogi satisfactory. .

Ek din Sagar ne Nadi se pucha:
Kab tak milati rahogi mujh khare pani se ???
Nadi ne haskar kaha :
Jab tak tujh me mithas na aa jaye tab tak !!!
Thats "RELATIONSHIP" .

1 tree makes 1 Lakh matchsticks.
But 1 matchstick can burn 1 Lakh trees.
Similarly 1 negative thought or doubt can burn thousands of
dreams....
Be Positive Always !!!

Chehre ki hasi se har gam chupao,
Bahut kuch bolo par kuch na batao...
Khud na rutho kabhi, par sabko manao
Ye Raz hai Zindagi ka, Bas Jite chale jao
 
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on: Jan 22, 2010
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tags: satyendra
language: hi

ye mat dekho ki tumhare peechhe ktani bheed hai


ye

dekho ki


us bheed me tumhara apna kaun hai
 
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on: Feb 18, 2012
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tags: ...
language: hi

Tune jo na kaha voh me sunta raha,
khamkha vevajah khwab bunta raha,
jane kis ki hame lag gai he nazar,
is shahar(*) me na apna thikana raha...
Dard pahle se he jyada,
khud se kiya phir ye wada..
Khamosh nazare rahe bejuba..
Hum safar me to he,hamsafar nahi
vo jaha jisse dur gaye the nikal..fir se yado ne kar di he pahal...
Dur chahat se apni chalta raha..
Bhujh gayi aag,daag jalta raha
 
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on: Jul 18, 2012
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tags: Arun
language: hi

Ek 8 saal ki bacchi Ice-Cream Parlor mein gayi....

Bacchi : Ye cone ice-cream kitne ki hai bhaiya?

Veter : 15/- Rupaey ki.

Bacchi ne apna purse check kiya, Phir chhote cone ki kimat puchi....

Veter ne gusse se kaha : 12/- Rupaey ki....

Bacchi ne kaha chota wala hi de dijiye, Bacchi paise de diye aur Ice-cream khane ke baad chali gayi.

Jab Veter khali plate lene gaya to usski aankhon se aanshu nikal aaye....

Kyunki bacchi ne usske liye tip ke roop mein 3/- Rupaey chod diye thea....

Moral : Aapke pass jo kuch bhi hai ussi se logon ko khush rakhne ka prayaas karein.....
 
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on: Jun 12, 2011
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tags: kavi
language: hi

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है

मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है,

मैं तुझसे दूर कैसा हुँ तू मुझसे दूर कैसी है

ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है !!!



समुँदर पीर का अंदर है लेकिन रो नहीं सकता

ये आसुँ प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता ,

मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले

जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता !!!



मुहब्बत एक एहसानों की पावन सी कहानी है

कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है,

यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों में आसूँ हैं

जो तू समझे तो मोती है जो न समझे तो पानी है
 
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on: Sep 10, 2009
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language: hi

Kya hua yeh jo hua yeh
dil ne jo chaaha toh hua yeh

tab hua yeh jab hua yeh
dil hi na jaane kyun hua yeh

dhadkane bhi bin pooche tham gayee
saari hadonke paar hua yeh

do dilon ki yeh kahani
meetthi si yeh kheenchathaani

honth bhi toh bin bole has gayee
saari hadonke paar hua ye

dil se main kahoo ya dil ki sunoo
kya karu tu bata...

sapne ab dekhoo khuli aankhon se
hai yeh kaisa nasha....

lamhe saare bin soche tham gayee
saari hadonke paar hua ye

kya hua yeh jo hua yeh
dil ne jo chaaha toh hua yeh

dhadkane bhi bin pooche tham gayee
saari hadonke paar hua ye
 
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on: Sep 28, 2011
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tags: pathak
language: hi

जो व्यक्ति गर्भ में बेटियों की हत्या करते हैं उनके लिए यह बात है. हमेशा याद रखना :

अगर बेटा वारस है, तो बेटी पारस है l
अगर बेटा वंश है, तो बेटी अंश है l
अगर बेटा आन है, तो बेटी शान है l
... ... अगर बेटा तन है, तो बेटी मन है l
अगर बेटा मान है, तो बेटी गुमान है l
... अगर बेटा संस्कार, तो बेटी संस्कृति है l
अगर बेटा आग है, तो बेटी बाग़ है l
अगर बेटा दवा है, तो बेटी दुआ है l
अगर बेटा भाग्य है, तो बेटी विधाता है l
अगर बेटा शब्द है, तो बेटी अर्थ है l
अगर बेटा गीत है, तो बेटी संगीत है
 
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on: Jul 3, 2011
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tags: rashi singh
language: hi

मुझे पुकार लो

इसीलिए खड़ा रहा कि तुम मुझे पुकार लो!

ज़मीन है न बोलती न आसमान बोलता,
जहान देखकर मुझे नहीं जबान खोलता,
नहीं जगह कहीं जहाँ न अजनबी गिना गया,
कहाँ-कहाँ न फिर चुका दिमाग-दिल टटोलता,
कहाँ मनुष्य है कि जो उमीद छोड़कर जिया,
इसीलिए खड़ा रहा कि तुम मुझे पुकार लो

इसीलिए खड़ा रहा कि तुम मुझे पुकार लो!

तिमिर-समुद्र कर सकी न पार नेत्र की तरी,
विनष्ट स्वप्न से लदी, विषाद याद से भरी,
न कूल भूमि का मिला, न कोर भोर की मिली,
न कट सकी, न घट सकी विरह-घिरी विभावरी,
कहाँ मनुष्य है जिसे कमी खली न प्यार की,
इसीलिए खड़ा रहा कि तुम मुझे दुलार लो!

इसीलिए खड़ा रहा कि तुम मुझे पुकार लो!

उजाड़ से लगा चुका उमीद मैं बहार की,
निदघ से उमीद की बसंत के बयार की,
मरुस्थली मरीचिका सुधामयी मुझे लगी,
अंगार से लगा चुका उमीद मै तुषार की,
कहाँ मनुष्य है जिसे न भूल शूल-सी गड़ी
इसीलिए खड़ा रहा कि भूल तुम सुधार लो!

इसीलिए खड़ा रहा कि तुम मुझे पुकार लो!
पुकार कर दुलार लो, दुलार कर सुधार लो!



- बच्चन
 
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by: hu cho
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on: Dec 10, 2009
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language: hi

ye aankhain bhi ek dariya bahati hainSab jaanta hoon magar phir bhi Kyun tumko bhula nahi paata. Is dil se teri tasveer hata nahi paata. Muskurane ki koshish karta hoon ye Ankhon ke motiyon ko chupa nahin paata Jab sochta hoon ki Tum ho kisi aur ka muqaddar Jalan si hoti jise mita nahin paata. Jab barasta hai saawan toot ke kahin Yeh aankhain bhi ek dariya bahati hain. Sulagti hai rooh teri ek jhalak ko..Is khwaaish se main dil ko bacha nahin paata!!!- Na Umeedain Kisi Se Rakhtey To Acha Hota Aitbar Na Kisi Pe Kartey To Acha Hota Sabaq Daita Hai Zamana Yeh Auron Ko Giraney Ka Sahara Na Kisi Ko samjhtey To Acha Hota Yaqeen apni Kamyabi ka kisi Ko Kab Hota Hai Taqdeer k Muqabil Na Hotey To Acha Hota Sochtey They Aitbar Andha Ho Ga DeWaNa Tum Per Na Khuwaab Jagtey Main Daikhtey To Acha Hota Na Chahtey Tum Kisi Ko Na Koi Tumheen Poojta Na achey Kisi Ko Lagtey To acha Hota Darya Mohabbat Ka Kab Koi Paar Karta Hai Dost Na Mohabbat Kisi Se Kartey To Acha Hota
 
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on: Jun 7, 2011
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tags: lok,,?
language: hi

Lok tantra pe chali lathiya ,,
Ab hinsa ki jai bolo ,,
Til-til chahe jitna nocho ,,
Tum apna muh mat kholo ,,
Unki militari,gola aur gole ,,
Hinsha ke aanchal me maa muh dholo ,,
Abki sawan barsega joro se ,,
Aandhi ke thoda sanmukh to ho lo ,,
Aaj garaj rahe jo dilhi me ,,
Kal dilhi garjegi un par ,,
Gaj giregi unpar kal jab ,,
Janta apni bhasa me bolegi ,,
ASRUgas ke gole mar rula lo ,,
Kal bin gole ye tumko rooudegi ,,
Kale dhan ka nakkara futega ,,
Ye kursi sir chad kar bolegi ,,
Jai hind kahoge so-so bar ,,
BHARAT KI JANTA AB BOLEGI ,, ?
 
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on: Nov 3, 2014
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tags: friends
language: hi

उस दिन मैंने उस गाँव में ,
उस बुढे किसान को देखा
उसके चश्मे का कांच टुटा हुआ था
और पैरो की चप्पले फटी हुई
थी...
उसके चेहरे पर बड़ी वीरानी थी
मुझे बस से उतरते देख ;
वो दौड़ कर मेरे पास आया
मेरा हाथ पकड़ कर बोला ;
मेरा बेटा कैसा है
बड़े दिन हुए है , उसे जंग पर गए हुए ; कह कर
गया था कि ;
जल्दी लौट कर आऊंगा
पर अब तक नही आया
मेरी हालत तो देखो ....
इस उम्र में मुझे कितनी तकलीफे है
उसकी माँ का इलाज़ कराना है
उसकी बीबी उसका रास्ता देखती है ;
उसका बेटा उसके लिए तरसता है ...
मुझे अपने गले में मेरे आंसू फंसते हुए लगे ;
मैंने कुछ कहना चाहा ,पर मेरा गला रुंध
गया था !
उसके पीछे खड़े लोगो ने कहा
कि; वो पागल हो चुका है अपने बेटे
की शहादत पर
जो की एक
फौजी था !!!
मेरी आँखें भीग उठी
वो बुढा अचानक
मेरा हाथ पकड़ कर बोला बेटा घर चलो
हमने उसके बारे में बताओ....
तुम उसके पास से आ रहे हो न ..
मैंने खामोशी से वो उजाड़ रास्ता
तय किया , उस बुढे पिता के साथ ;
और उसके टूटे -फूटे घर पर पहुँचा ! उसने ,मुझे
एक बूढी औरत से मिलाया
उसे मोतियाबिंद था !
उसने उससे कहा ,बेटे के पास से आया है
उसकी ख़बर लाया है ;
बूढी औरत रोने लगी
मैं स्तब्ध था , मुझे कुछ सूझ नही रहा था !
फिर उस फौजी की बेवा ;
ने मुझे पानी दिया पीने को .
मैंने उसकी तरफ़ देखा
कुल जहान का दुख उसके चेहरे पर था
इतनी उदासी और
वीरानी मैंने कहीं और नही देखी थी
मैंने रुकते हुए पुछा घर का खर्चा कैसे
चलता है
उसने कहा , औरो के घर के काम करती है
मुझसे रहा नही गया
मैंने कहा ,फौजी के कुछ रूपये देने थे ;
उससे बहुत पहले लिए थे... ये ले लो !!!
और घर से बाहर आ गया
पीछे से एक बच्चा दौडता हुआ आया
मेरे कमीज पकड़ कर बोला
नमस्ते !
मैंने भीगी आंखों से उसे देखा और पुछा ,
बड़े होकर क्या बनोंगे ?
उसने मुझे सलाम किया और कहा
मैं फौजी बनूँगा !!!
आँखों में आंसू लिए
मैंने बस में बैठते हुए अपने आप से कहा मेरे देश
में शहादत
की ऐसी कीमत
होती है !!!
वो फौजी हमें बचाने के लिए अपनी जान दे
गया
और ये देश , उसके परिवार की जान ले
लेंगा मेरे देश में शहादत
की ऐसी कीमत
होती है !!!
फिर मैंने बस की खिड़की से उस बच्चे
को देखा ,
वो दूर से हाथ हिला रहा था ...... उसने
कहा था की वो फौजी बनेगा ..
एक और शहादत के लिये...
हमारे लिये ...
इस देश के लिये ........
भारतीय सेना और सैनिको के होसले
को सलाम........... ............... ..........
 
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on: Jan 18, 2012
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language: hi

Naina Laggeyan Baarsihan
Tu sukke sukke sapne vi pijj gaye
Naina Laggeyan Baarsihan
Rove palkan de Kone vich neend meri
Naina Laggeyan Baarsihan
Hanju digde ne chot lage dil te
Naina Laggeyan Baarsihan
Rut birha de badlan di chhaa gayi




Teri yaadon mein likhte jo lafz dete hai sunaai
beete lamhe poochhte hain kyun hue aise juda.. khuda,
Khuda mila jo yeh faisla hain
Khuda tera hi yeh faisla hain
Khuda hona tha woh ho gaya
Jo tune thha likha



Tujhe bhula diya, oh,
Tujhe bhula diya, oh
Tujhe bhula diya, oh
Phir kyun teri yaadon ne
Mujhe rula diya.. oh
Mujhe rula diya .


 
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on: Oct 26, 2010
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language: hi

कब बंद होगी बेटियों की उपेक्षा...
अलका आर्य
Story Update : Wednesday, October 27, 2010 12:53 AM

दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन कर न केवल एक रिकॉर्ड बनाया, बल्कि मीडिया, देश की अवाम व राज्य सरकारों को यह संदेश भी दिया कि महिलाओं की अनदेखी करने की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। बेशक आज पूरे देश को इन महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर गर्व है, पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा देश दुनिया के उन बदनाम देशों की सूची में शामिल है, जहां महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले काफी कम है। यहां जन्म से पहले ही न केवल भ्रूण हत्या के जरिये करोड़ों कन्याओं का सफाया कर दिया जाता है, बल्कि महिलाओं के प्रति भेदभाव, उत्पीड़न और अपराध भी काफी होते हैं। आर्थिक विकास व आधुनिकता भी महिलाओं के प्रति इस सामाजिक अन्याय व असमानता की धारणा में खास बदलाव नहीं ला सकी है।

भारतीय समाज की तुलना में आर्थिक रूप से बहुत पिछड़े हुए लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और कैरेबियाई मुल्क का समाज कन्या भ्रूण हत्या में शमिल नहीं है। पुत्रमोह से मोहभंग के रूझान को जानने के लिए यहां अमेरिका व दक्षिण कोरिया का जिक्र किया जा सकता है। अमेरिका में 1985 में कराए गए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में 50 प्रतिशत महिलाओं ने बेटे की इच्छा जताई थी, मगर 2003 में यह आंकड़ा 50 से गिरकर 15 प्रतिशत तक पहुंच गया। वर्ल्ड बैंक में जनसांख्यिकी विशेषज्ञ मोनिका दासगुप्ता ने एक प्रतिष्ठित पत्रिका में टिप्पणी की है कि सिर्फ पश्चिम ही नहीं, बल्कि पहले कभी पितृसत्तात्मक मूल्यों के लिए बदनाम दक्षिण कोरिया जैसे देश में, जो अब विकसित है, लड़कों के प्रति मोह की मानसिकता खत्म हो चुकी है।

पर जहां तक अपने देश का सवाल है, इस मामले में निराशा ही हाथ लगती है। 2001 की जनगणना के अनुसार, अपने देश में छह वर्ष तक के आयु वर्ग वाले प्रत्येक 1,000 बाल शिशुओं पर मात्र 927 बालिका शिशु हैं। बालिका शिशु से जुड़ी एक निराशाजनक खबर हाल में उस हरियाणा से आई है, जहां की लड़कियों ने राष्ट्रमंडल खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया है। सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस राज्य में छह वर्ष तक के आयु वर्ग वाली बालिका शिशुओं की संख्या 834 हो गई है, जबकि 2006 में प्रत्येक 1,000 बाल शिशुओं पर यह आंकड़ा 857 था। यह स्थिति तब है, जब कन्या भ्रूण हत्या के लिए कुख्यात इस राज्य के एक डॉक्टर को देश में सबसे पहले पीपीएनडीटी ऐक्ट के तहत सजा मिली थी। और अब तक इस मामले में राज्य के 23 लोग दोषी पाए गए हैं।

केरल, तमिलनाडु एवं कुछेक अन्य राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्य सरकारों को इस मुद्दे पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी कन्याओं के लैंगिक अनुपात में कमी देखी गई है। पिछले महीने जारी दिल्ली सरकार की जन्म एवं मृत्यृ पंजीकरण रिपोर्ट ने खुलासा किया था कि 2009 में राज्य में प्रत्येक 1,000 बालकों पर 915 कन्याएं पैदा हुईं, जबकि वर्ष 2008 में यह आंकड़ा 1004 का था। दिल्ली सरकार ने इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद यह स्वीकार किया कि पिछले वर्ष सरकार द्वारा जारी कन्या शिशुओं के आंकड़ों में ऐसी लड़कियों की संख्या भी शमिल हो गई थी, जिन्होंने इस राज्य से बाहर जन्म लिया था। दिल्ली सरकार ने अपनी सफाई में कहा कि उसे बाद में पता चला कि प्रवासी परिवारों ने सरकार की लाडली योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक राशि को हासिल करने के मकसद से ऐसा किया था। लोगां के लालच व सरकारी योजना को सख्ती से लागू और निरीक्षण न करने की वजह से भी लड़कियों की संख्या बढ़ाने व उनके सशक्तिकरण के घोषित सरकारी उद्देश्यों को धक्का पहुंचा है।

पिछले दस सालों में राज्य सरकारों ने कई योजनाएं शुरू कर लड़कियों के प्रति रूढ़िग्रस्त समाज के नजरिये में बदलाव लाने की जो कोशिश की, उसके नतीजे बताते हैं कि सरकार व समाज, दोनों को मिलकर इस मोरचे पर पुनर्विचार करके साझा पहल करनी होगी। बेशक हरियाणा की बेटियों ने पारंपरिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर सबको हैरत में डाल दिया, मगर सामाजिक व पारिवारिक ढांचे में बेटियों को जन्म देने एवं उन्हें हर क्षेत्र में बराबरी के हक देने में रुकावट डालने वाली मानसिकता को खत्म करना एक बहुत बड़ी चुनौती है।
 
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on: Nov 30, 2011
ratings: 11

tags: a
language: hi

MUSHKILO SE BHAG JANA ASAN HOTA HAI,
HAR PEHLU ZINDAGI KA IMTIHAN HOTA HAI,
DARNE WALO KO MILTA NAHI KUCH ZINDAGI ME,
LADNE WALO K KADMO ME JAHAN HOTA HAI......
 
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on: Feb 16, 2012
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tags: G
language: hi

♥आखोँ मेँ आँसू आ जाते हैँ ,
फिर भी लबोँ पर हँसी रखनी पङती है !...♥

♥ये मोहब्बत भी क्या चीज़ है यारोँ ,
जिससे करो उसी से छिपानी पङती है !...♥

♥कोई अच्छा लगे तो उनसे प्यार मत करना ;
उनके लिए अपनी नींदे बेकार मत करना !...♥

♥दो दिन तो आएँगे खुशी से मिलने ;
तीसरे दिन कहेंगे इंतज़ार मत करना !...♥

 
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on: Aug 11, 2014
ratings: 11

tags: Haale dil
language: hi

ना रास्ता सुझाई देता है, ना मंजिल दिखाई देती है
ना लफ़्ज जुबान पर आते है, ना धड़कन सुनाई देती है
एक अजीब सी कैफियत ने आन घेरा है मुझे
कि हर सुरत में तेरी सुरत दिखाई देती है..
ये मिलना और बिछड़ जाना कब अपने बस की बात है
किस्मत ही मिलाती है हमको, किस्मत ही जुदाई देती है..
हर बार यही होता है, कोइ हमें बताये तो सही,
जो तुमसे कह नहीं पाते है, धड़कन से सुनाई देती है
तुम जानते हो क्या तुमसे कहें, बेचैन बहुत दिल होता है
जब तुम पास नही हो, दूर सारी खुदाई होती है
 
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