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on: May 31, 2020
ratings: 5

language: hi

Kabhi tere liye kuch likha nahi
Kyon ki tum har pal mere sath rahi
Aaj phir tumhari yaad aur asoon ayi
Kyon ki aaj tum mere sath nahi

Kash mein tumhe pehle keh deta 😢😢😢😢😢

Haan ek pal mere jindagi me aya tha
Jab maine apne apko tanha mehsoos paya
Wajah meri jindagi – mayusi
Maan pe na koi kaboo aur dil kitna bechain
Jene ka koi asra nahi
Aur na apni koi pehchan

Haan ek pal mere jindagi meri phir aya
Jab maine apne apko khush mehsoos paya
Wajah meri Zindagi – Tum
Aaj phir maan pe na koi kaboo
Aur Dil aaj phir kitna bechain
Par aaj jene ka asra hai aur ek pehchan bhi–Tum
 
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on: May 31, 2020
ratings: 6

tags: INSAAN...
language: hi

Inssan akir hai kya
Chahat ke pyasa
Jaise koi bacha
Ki chahat hai koi khilona
Jid pe utar ata hai
Pa leta hai
Kuch pal khel leta hai
Kush reh leta hai woh pal
Jab toot jata hai
Tho phir naye khilone ki chahat
Bana leta hai

Phir bacha bada ho jata hai
Ab khilona nahi
Dil ko chahat bana leta hai
Jid pe utar ata hai
Pa leta hai
Kuch pal Khel leta hai
Kush reh leta hai woh pal
Par jab oob jata hai
Jabardasti dil tod deta hai
Ab phir akela mehsoos pata hai
Tho phir naya dil ko chahat bana leta hai

Par woh yeh nahi jante khilona tootne pe phir naya khilona mil sakta hai
Par jab dil toota hai tho sase ruk jati, jindagi tham jati hai 😢😢😢😢😢
 
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on: May 24, 2020
ratings: 6

tags: Friends
language: hi

स्त्री ,
एक क़िताब की तरह होती है
जिसे देखते हैं सब ,
अपनी-अपनी ज़रुरतों के
हिसाब से

कोई सोचता है ,उसे
एक घटिया और सस्ते
उपन्यास की तरह!
तो कोई घूरता है ,
उत्सुक-सा ,
एक हसीन रंगीन ,
चित्रकथा समझकर

कुछ पलटते हैं ,इसके रंगीन पन्ने ,
अपना खाली वक़्त ,
गुज़ारने के लिए!
तो कुछ रख देते हैं ,
घर की लाइब्रेरी में
सजाकर ,
किसी बड़े लेखक की कृति की तरह ,
स्टेटस सिम्बल बनाकर

कुछ ऐसे भी है ,
जो इसे रद्दी समझकर ,
पटक देते हैं!
घर के किसी कोने में

तो कुछ बहुत उदार होकर
पूजते हैं मन्दिर में ,
किसी आले में रखकर
गीता क़ुरआन बाइबिल जैसे ,
किसी पवित्र ग्रन्थ की तरह

स्त्री एक क़िताब की
तरह होती है ,जिसे ,
पृष्ठ दर पृष्ठ कभी
कोई पढ़ता नही ,
समझता नही ,
आवरण से लेकर
अंतिम पृष्ठ तक
सिर्फ़ देखता है ,
टटोलता है

और वो रह जाती है
अनबांची
अनअभिव्यक्त
अभिशप्त सी
ब्याहता होकर भी
कुआंरी सी...

विस्तृत होकर भी
सिमटी सी...
छुए तन मे
एक
अनछुआ मन लिए!
सदा ही
स्त्री
 
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on: May 3, 2020
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tags: My Diary✍
language: hi



हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते


जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन
ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते


लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो
ऐसे दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते


जागने पर भी नहीं आंख से गिरतीं किर्चें
इस तरह ख़्वाबों से आंखें नहीं फोड़ा करते


शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ा
जाने वालों के लिए दिल नहीं थोड़ा करते


जा के कोहसार से सर मारो कि आवाज़ तो हो
ख़स्ता दीवारों से माथा नहीं फोड़ा करते
 
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on: Apr 27, 2020
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tags: Friends
language: hi

सन्नाटे की
सनसनाहट
सनसनी लिए है आज की रात
सूनी है गलियां
सूनी है आवाज़
कयामत का एहसास देती है
आज की रात

पहले भी थीं रातें
जेट की घनघनाहट लिए
पहले भी थी रातें
बारूद के धमाकों से
थर्राती वे रातें
घुप्प अंधेरों में
गोलों की रोशनी से
नहाई वे रातें
डराती तो थीं
वे रातें

लेकिन इतनी भयावह तो
न थी कभी वे रातें
सन्नाटे में
कयामत का अहसास
तो न देती थीं
वे रातें
 
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on: Apr 24, 2020
ratings: 1

tags: Friends
language: hi

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..
सुबह की सैर में कभी चक्कर खा जाते है ..
सारे मौहल्ले को पता है...पर हमसे छुपाते है
दिन प्रतिदिन अपनी खुराक घटाते हैं और
तबियत ठीक होने की बात फ़ोन पे बताते है.
ढीली हो गए कपड़ों को टाइट करवाते है,
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

किसी के देहांत की खबर सुन कर घबराते है,
और अपने परहेजों की संख्या बढ़ाते है,
हमारे मोटापे पे हिदायतों के ढेर लगाते है,
"रोज की वर्जिश"के फायदे गिनाते है.
‘तंदुरुस्ती हज़ार नियामत "हर दफे बताते है,
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

हर साल बड़े शौक से अपने बैंक जाते है,
अपने जिन्दा होने का सबूत देकर हर्षाते है,
जरा सी बढी पेंशन पर फूले नहीं समाते है,
और FIXED DEPOSIT रिन्ऊ करते जाते है,
खुद के लिए नहीं हमारे लिए ही बचाते है.
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

चीज़ें रख के अब अक्सर भूल जाते है,
फिर उन्हें ढूँढने में सारा घर सर पे उठाते है,
और एक दूसरे को बात बात में हड़काते है,
पर एक दूजे से अलग भी नहीं रह पाते है.
एक ही किस्से को बार बार दोहराते है,
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

चश्में से भी अब ठीक से नहीं देख पाते है,
बीमारी में दवा लेने में नखरे दिखाते है,
एलोपैथी के बहुत सारे साइड इफ़ेक्ट बताते है,
और होमियोपैथी/आयुर्वेदिक की ही रट लगाते है,
ज़रूरी ऑपरेशन को भी और आगे टलवाते है.
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

उड़द की दाल अब नहीं पचा पाते है,
लौकी तुरई और धुली मूंगदाल ही अधिकतर खाते है,
दांतों में अटके खाने को तिली से खुजलाते हैं,
पर डेंटिस्ट के पास जाने से कतराते हैं,
"काम चल तो रहा है" की ही धुन लगाते है.
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं..

हर त्यौहार पर हमारे आने की बाट देखते है,
अपने पुराने घर को नई दुल्हन सा चमकाते है,
हमारी पसंदीदा चीजों के ढेर लगाते है,
हर छोटी बड़ी फरमाईश पूरी करने के लिए माँ रसोई और पापा बाजार दौडे चले जाते है,
पोते-पोतियों से मिलने को कितने आंसू टपकाते है,
देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते है..

देखते ही देखते जवान माँ-बाप बूढ़े हो जाते है..
 
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on: Apr 24, 2020
ratings: 2

tags: Friends
language: hi

respect to all girls

प्लीज एक बार जरूर पढे 👇👇👇👇👇👇

क्या हुआ??

इतनी रात तक online हो? 1 बज रहे है। नींद नही आ रही है क्या?
पति घर पर नही है या बनती नही है उनसे?
ध्यान नही देते क्या तुमपे?
जवाब नही दो तो-क्या हुआ? Busy हो कहीं??? किसी और से बात कर रही हो???
या फिर कहेंगे हमसे भी बात कर लिया करो। इतने बुरे हैं क्या हम। सबसे तो करती हो।
तो इस सवाल का एक ही जवाब हैं ।
मैं एक औरत हूँ ...
लेकिन एक इंसान भी हूँ ..।
मुझे अपनी मर्जी से जीने का पूरा हक हैं ।
मुझे जो - जो पसंद आता हैं मैं वो करती हूँ
या फ़िर मुझे जिससे खुशी मिलती हैं वह करती हूँ..

और मुझे ये सब आता भी हैं...
ये सब करने के पीछे ऐसा कोई कारण होता हैं...
ऐसा कुछ नही होता...
बस मुझे इन छोटी - छोटी चीजो से खुशी मिलती हैं ।
जरूरी नही सिर्फ चैटिंग ही की जाए। बहुत लोग सिर्फ चैटिंग चैट करने नहीं बल्कि पोस्ट पढ़ने आते है,,,कोई लेख, कोई अच्छी पोस्ट, या कोई सुविचार रात मे पढ़ना कोई गुनाह है क्या? दिन भर की जद्दोज़हद के बाद यदि रात मे कुछ समय हम अपने लिए व्यतीत करे तो क्यो बुरा लगता है आप लोगो को...
वही काम आप करे तो हम तो सवाल नही उठाते।
फिर आप लोग क्यो?
मुझे तो इसमें कोई बुराई नजर नही आती।

आपको भी जमता हैं ,तो आप भी ये सब कीजिए
खूब देर रात online रहिए,
और नही जमता तो....
किसी भी औरत के ऊपर बेमतलब के आरोप मत लगाइये
और किसी भी प्रकार का लेबल
मत लगाइये उसके ऊपर

बस इतना ही....

🙏मै सिर्फ उन पुरुषो की बात कर rahi हूँ जो ऐसी सोच रखते है.
 
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by: Sujal
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on: Apr 17, 2020
ratings: 3

language: hi


शब्दों के दांत नहीं होते है
लेकिन शब्द जब काटते है
तो दर्द बहुत होता है
और
कभी कभी घाव इतने गहरे हो जाते है की
जीवन समाप्त हो जाता है
परन्तु घाव नहीं भरते.............
इसलिए जीवन में जब भी बोलो मीठा बोलो मधुर बोलों
'शब्द' 'शब्द' सब कोई कहे,
'शब्द' के हाथ न पांव;
एक 'शब्द' 'औषधि" करे,
और एक 'शब्द' करे 'सौ' 'घाव"...!
"जो 'भाग्य' में है वह भाग कर आएगा..,
जो नहीं है वह आकर भी भाग 'जाएगा"..!
प्रभू' को भी पसंद नहीं
'सख्ती' 'बयान' में,
इसी लिए 'हड्डी' नहीं दी, 'जबान' में...!
जब भी अपनी शख्शियत पर अहंकार हो,
एक फेरा शमशान का जरुर लगा लेना।
और....
जब भी अपने परमात्मा से प्यार हो,
किसी भूखे को अपने हाथों से खिला देना।
जब भी अपनी ताक़त पर गुरुर हो,
एक फेरा वृद्धा आश्रम का लगा लेना।
और….
जब भी आपका सिर श्रद्धा से झुका हो,
अपने माँ बाप के पैर जरूर दबा देना।
जीभ जन्म से होती है और मृत्यु तक रहती है क्योकि वो कोमल होती है.
दाँत जन्म के बाद में आते है और मृत्यु से पहले चले जाते हैं...
क्योकि वो कठोर होते है।
छोटा बनके रहोगे तो मिलेगी हर
बड़ी रहमत...
बड़ा होने पर तो माँ भी गोद से उतार
देती है..
किस्मत और पत्नी
भले ही परेशान करती है लेकिन
जब साथ देती हैं तो
ज़िन्दगी बदल देती हैं.।।
"प्रेम चाहिये तो समर्पण खर्च करना होगा।
विश्वास चाहिये तो निष्ठा खर्च करनी होगी।
साथ चाहिये तो समय खर्च करना होगा।
किसने कहा रिश्ते मुफ्त मिलते हैं ।
मुफ्त तो हवा भी नहीं मिलती ।
एक साँस भी तब आती है,
जब एक साँस छोड़ी जाती है!!"
 
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by: Sujal
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on: Apr 17, 2020
ratings: 2

language: hi


फोन किया माँ ने बेटे को........तूने नाक कटाई है,
तेरी बहना से सब कहते .........बुजदिल तेरा भाई है!
ऐसी भी क्या मजबुरी थी........ऐसी क्या लाचारी थी,
कुछ कुत्तो की टोली कैसे........तुम शेरो पर भारी थी!
वीर शिवा के वंशज थे तुम......चाट क्यु ऐसे धुल गए,
हाथो मे हथियार तो थे.......क्यु उन्हें चलाना भूल गये!
गीदड़ बेटा पैदा कर के............मैने कोख लजाई है,
तेरी बहना से सब कहते .........बुजदिल तेरा भाई है!!
(लाचार फौजी अपनी माँ से)
इतना भी कमजोर नही था.......माँ मेरी मजबुरी थी,
उपर से फरमान यही था.......चुप्पी बहुत जरूरी थी!
सरकारे ही पिटवाती है..........हमको इन गद्दारो से,
गोली का आदेश नही है.......दिल्ली के दरबारो से!
गिन-गिनकर मैं बदले लूँगा.....कसम ये मैंने खाई है,
तू गुड़िया से कह देना .... ना बुजदिल तेरा भाई है!!
 
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on: Mar 25, 2020
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tags: My Diary✍
language: hi

मुश्किलों को हराते है, चलो मुस्कुराते हैं.......✍

मुश्किलों को हराते है,
चलो मुस्कुराते हैं,
उदासियों में रखा है क्या,
आओ थोड़ी खुशियाँ बांटते हैं,,
वर्षों पुराने ज़ख्मों को,
खुशियों से मात देते हैं,
बस तारीफें दुनिया से ले के,
हर तानों को ठुकराते हैं,
मुश्किलों को हराते है,
चलो मुस्कुराते हैं,
कल की उम्मीद पलकों में लिए,
इस सोच से आगे बढ़ते हैं,
लेते हैं थोड़ा उनसे हौसला,
जो नित्य पहाड़ चढ़ते हैं,
कुछ हौसला समंदर से भी,
जो पर्वत को भी घिसते हैं,
कुछ हौसलें नदियों से भी,
जो झरनों में से रिसते हैं,
ले कर सब उधर आज सब से,
कदम हम आगे बढ़ाते हैं,
अपनी हँसी के बीच में अपने,
हालात को आज छुपाते हैं,
मुश्किलों को हराते है,
चलो मुस्कुराते हैं,
कोई छीन नहीं सकता मुझसे मेरा,
जो मेरा नहीं वो खो के रहेगा,
गीता में भी साफ़ लिखा है,
जो होना है वो हो के रहेगा,
फिर क्यों कल की चिंता में,
आज को अपने खो देना,
जिन पलकों ने ख्वाब देखे इतने,
क्यों इनको है भिगो देना,
आओ सब कुछ को भुला के फिर से,
खुद को थोड़ा आज़माते हैं,
मुश्किलों को हराते है,
चलो मुस्कुराते हैं...
 
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on: Mar 24, 2020
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tags: friends
language: hi

तूफ़ान के हालात है ना किसी सफ़र में रहो...
पंछियों से है गुज़ारिश अपने शजर में रहो...

ईद के चाँद हो अपने ही घरवालो के लिए...
ये उनकी खुशकिस्मती है उनकी नज़र में रहो...

माना बंजारों की तरह घूमे हो डगर डगर...
वक़्त का तक़ाज़ा है अपने ही शहर में रहो...

तुम ने खाक़ छानी है हर गली चौबारे की...
थोड़े दिन की तो बात है अपने घर में रहो...🙏🙏

हम लोगो नेअपनी जिंदगी मे ये पहली बार ऐसी रेस देखी होगी...

जिसमें घर पर रुकने वाला ही जीतेगा, सुरक्षित रहेगा...
कृप्या घर पर ही रहे ....और अपने देश को बचाए...
 
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by: Saloni
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on: Mar 21, 2020
ratings: 0

language: hi

कविता हमे रच रही है
ज़िन्दगी के रंगों के साथ सज रही हैं
कभी बचपन
कभी जवानी
कभी बुढ़ापा
हर पल सीख दीखलाई जा रही है
और
हर वक़्त सीखाई जा रही है
यह जीवन की कहानी है
तन्हाइयों से भरी हुई है
मेरी कलम की स्याही कुछ अनकही दर्द की वाते कह रही है
कभी खुशी के अक्षू निकल रहे है
जैसे पहले कविता को सजा रहे है
हर शब्द रच रहे है
यूं ही शब्दों के साथ खेलते जा रहे है
कविता हमे रच रही है
यह सच है
मन को जांच रही है
सलोनी
 
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by: Saloni
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on: Mar 7, 2020
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language: hi

अब नहीं बेचारी नारी,
प्रीत से भरी नारी,
ममता की सूरत है नारी।

कौन कहता है की अबला
है नारी,
हर क्षेत्र में अव्वल
पुरुष के साथ पग-पग,
कंधा मिलाए है नारी।
समुद्र से आकाश,
थल से पहाड़ तक,
अपना संघर्ष दिखाया है,
अपने परिश्रम से,
ददेश को हर बार ऊपर उठाया है,
सलोनी के कलम से सारी नारियों को प्रणाम।
🌹🌹🌹
🌺🌺🌺
 
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on: Mar 6, 2020
ratings: 3

tags: My Diary✍
language: hi

प्यार ताकत है खुदा की ये तू जानले
महोब्बत नूर है रूह का ये तू मानले
चल दिखा तेरी ताकत, ला आसमान जमीन पर
है जिगर में जज्बा, भेज कयामत को भी ऊपर
तो सारी कायनात है तेरी ये तू ठान ले
प्यार ताकत है खुदा की ये तू जानले
चिर-कौओ को खिला दे ऐसी लाश नही है तू
जिंदा होकर मर जाए ये एहसास नही है तू
चल उठ खड़ा हो, अंत नहीं है तू
इश्क़ की दुनिया का कोई संत नहीं है तू
तुझे लड़ना ही होगा ये तू ठान ले
प्यार ताकत है खुदा की ये तू जानले
कमजोर नहीं, बलवान है तू
चंद पलों का मेहमान है तू
खुद की जिंदगी का अरमान है तू
हर कयामत का सौदागर है तू
तू बस अपने आप को पहचनाले
प्यार ताकत है खुदा की ये तू जानले
 
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on: Mar 6, 2020
ratings: 3

language: hi

हो सकती है मोहब्बत ज़िन्दगी में दोबारा भी
बस हौसला हो एक दफा फिर बर्बाद होने का.. !!


यूँ मिले के मुलाकात न हो सकी
होंट खुले मगर कोई बात न हो सकी
मेरी खामोश निगाहें हर बात कह गई
और उनको शिकायत है के बात न हो सकी.. !!

मैं आज भी रखती हूँ अपने दोनों हाथो का ख्याल
न जाने उसने कौन सा हाथ पकड़ कर कहा होगा
मुझे तुम से मुहब्बत है..!!
 
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on: Mar 4, 2020
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tags: friends
language: hi

मैं कहीं लापता हो गया हूँ
शायद आपका हो गया हूँ

खुद को नज़र आता नहीं
मैं कोई हादसा हो गया हूँ

पहुँचोगे कैसे मुझ तक
मैं खोया पता हो गया हूँ

तुझे पाकर तो लगता है
खुद से यूं जुदा हो गया हूँ

वफ़ा ढ़ोते ढ़ोते आखिर दम
शायद बेवफ़ा हो गया हूँ

दिलवर मुझे इतना बता दे
तेरा मैं क्या क्या हो गया हूँ
 
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on: Mar 4, 2020
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tags: friends
language: hi

कुछ लोग भी हमसे इस कदर खफ़ा हैं
या तो वो बेवफ़ा या हम बेवफ़ा हैं !!

नब्ज देख कर बता देता है वो हबीब
मेरी हर मर्ज़ की आप ही तो दवा हैं !!

वो कभी समझते नहीं मेरे जज्बात को
और हम भी आजकल उन्हीं पर फ़िदा हैं !!

कब से जारी है मुझको तलाश अपनी ही
आज तक न जाने हम कहाँ लापता हैं !!

अपने आपको छल रहे हैं लोग आजकल
न जाने अब कहाँ देखते आइना हैं !!
 
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on: Mar 3, 2020
ratings: 2

tags: My Diary✍
language: hi

ना खड़ा तू देख गलत को
अब तो तू बवाल कर

चुप क्यों है तू
ना तो अपनी आवाज दबा
अब तो तू सवाल कर

ना मिले जवाब
तो खुद जवाब तलाश कर

क्यों दफन है सीने में तेरे आग
आज आग को भी
तू जलाकर राख कर

कमियों को ना गिन तू
ना उसका तू मलाल कर

कुछ तो अच्छा ढूंढ ले
ना मन को तू उदास कर
जो भी पास है तेरे
तू उससे ही कमाल कर

तू उठ कुछ करके दिखा
ना खुद को तू बेकार कर

खुद मिसाल बनकर
जग में तू प्रकाश कर
सोचता है क्या तू
तू वक्त ना खराब कर

जिंदगी जो है तो
जी के उसका नाम कर
रास्ते जो ना मिले
तो खुद की राह निर्माण कर



काल के कपाल पर
करके तांडव तू दिखा
दरिया जो दिखे आग का
प्रचंड अग्नि बन कर
तू उसे भी पार कर
 
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on: Mar 1, 2020
ratings: 3

tags: My Diary✍
language: hi


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मैं ? मैं हूँ एक प्यारी सी धरती

कभी परिपूर्णता से तृप्त और कभी प्यासी आकाँक्षाओं में तपती.

और तुम? तुम हो एक अंतहीन आसमान
संभावनों से भरपूर और ऊंची तुम्हारी उड़ान
कभी बरसाते हो अंतहीन स्नेह और कभी.....
सिर्फ धूप......ना छांह और ना मेंह.

जब जब बरसता है मुझ पर
तुम्हारा प्रेम और तुम्हारी कामनाओं का मेंह
खिल उठता है मेरा मन और
अंकुरित होती है मेरी देह.

युगों युगों से मुझ पर हो छाए
मुझे अपने गर्वित अंकमें समाये
सदियों का अटूट हमारा नाता है ...लेकिन
फिर भी कभी सम्पूर्ण ना हो पाता है.

धरती और आसमान....मिलते हैं तो सिर्फ क्षितिज में
सदियों से यही होता आया है ...और होगा.
जितना करीब आऊं
तुम्हारा सुखद संपर्क उतना ही ओझल हो जाता है.

लेकिन इन सब से मुझे कैसा अनर्थ डर?
अंतहीन युगों के अन्तराल से परे ...जब चाहूँ...

सतरंगी इन्द्रधनुषी रंगों की सीढियां चढ़ती हूँ
रंगीले कोहरे में रोमांचक नृत्य करती हूँ
परमात्मा के रचित मंदिर में तुम पर अर्चित होती हूँ
तुम्हें छू कर, तुम्हें पा कर, तुम पर समर्पित हो कर
फिर खुद ही खुद तक लौट आती हूँ.

अब ना मिलने की ख़ुशी है और ना ही ना मिलने का गम
मैं अब ना मैं हूँ और ना तुम हो तुम.... हैं तो बस अब सिर्फ हैं हम.

सिर्फ कहने भर को हूँ तुमसे मैं दूर.....

तुम्हारे आकर्षण की गुरुता में गुँथी
परस्पर आत्माओं के तृषित बंधन में बँधी
तुम्हारी किरणों के सिंधूरी रंगों से सजी
तुम्हारे मोहक संपर्क में मेरी नस नस रची.

मैं रहूँगी तुम्हारी प्रिया धरती
और रहोगे तुम मेरे प्रिय आसमान
मैं? मैं हूँ आसमान की धरती, और तुम?
तुम हो धरती के आसमान.
 
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on: Feb 20, 2020
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language: hi

वो दिन तो दिन थे यार, बचपन के दिन थे यार !!

माँ का आलिंगन, पापा की डाँट,
भाई बहन के साथ नटखट सा व्यव्हार,
वो दिन तो दिन थे यार........

बहानो से घर से निकल जाना,
दोस्तों के साथ खेलना और खाना,
वो दिन तो दिन थे यार........

बिना किस्से कहानी सुने नींद ना आना,
माँ की गोद में थक हार कर सो जाना,
वो दिन तो दिन थे यार........

छोटी छोटी बातो पर रूठ जाना,
पल में हँसना और सब भूल जाना,
वो दिन तो दिन थे यार........

अधूरा होमवर्क और स्कूल ना जाने का बहाना,
पापा का डांटना, और माँ का हमेशा बचाना,
वो दिन तो दिन थे यार........

मेहमानों के आने पर माँ के आँचल में छिप जाना,
धीरे से मुस्कुराना और नजरे चुराना,
वो दिन तो दिन थे यार........

सुबह का नाश्ता और खाना ना खाने का बहाना,
ना खाने की जिद से माँ को सताना,
वो दिन तो दिन थे यार......

पेपर की टेंशन और ट्यूशन का बहाना,
यारो दोस्तों के साथ गप्पे लड़ाना,
वो दिन तो दिन थे यार......

कागज की नाव और बारिश में नहाना,
गावं की गलियाँ और वो बेफिक्रा जमाना,
वो दिन तो दिन थे यार.......

बाग़ बग़िया और तितलियों का ठिकाना,
घड़े का पानी और पीपल के नीचे सुस्ताना,
वो दिन तो दिन थे यार......

चाँद चांदनी और परियो का फ़साना,
सुहाने सपने और नींद का टूट जाना,
वो दिन तो दिन थे यार......

पर ना जाने कहा चला गया वो जमाना,
बचपन ही है एक सफर सुहाना,
वो दिन तो दिन थे यार, बचपन के दिन थे यार !!
 
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