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on: Mar 1, 2019
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language: hi

#_स्त्री_क्या_है_और_वह_क्या_चाहती_है ?

#अगर_किसी_को_बुरा_लगे_तो_माफी_चाहता_हूँ

स्त्री समस्त ब्रम्हाण्ड है
स्त्री से ही ये संसार है। स्त्री सृजन है
स्त्री जननी है। स्त्री सुख है
स्त्री आनंद है। स्त्री सहयोग है
स्त्री साथी है। स्त्री ज्ञान है
स्त्री अध्यात्म है। स्त्री उजाला है, रोशनी है
स्त्री उम्मीद है। स्त्री पवित्र है
स्त्री संगम है। स्त्री साथ है
स्त्री अहसास है। स्त्री आशा है
स्त्री जीवन है। स्त्री धूप में छाँव है
स्त्री थकान में राहत है। स्त्री प्रेम है
स्त्री पूजा है। स्त्री माँ है
स्त्री बहन है। स्त्री प्रेमिका है
स्त्री पत्नी है। स्त्री त्याग है
स्त्री इज्जत है। स्त्री सम्मान है
स्त्री शान है। स्त्री बलिदान है
फिर क्यों जल रही है स्त्री,
फिर क्यों मारी जा रही है स्त्री,
फिर क्यों घुट रही है स्त्री,
फिर क्यों शर्मसार हो रही है स्त्री,
फिर क्यों सरे बाजार लुट रही है स्त्री,
फिर क्यों नोचि जा रही है स्त्री,
फिर क्यों दहेज़ की सूली चढाई जा रही है स्त्री,
फिर क्यों ????????????😢😢😢😢😢
(इसके मुख्य कुछ कारण है अशिक्षा असामान्यता धर्म दिखावा खोखले रिती रीवाज
संस्कार, नजरिया, सोच, मानसिकता, झूठी शान)
अगर हमारे समाज में इनमे सुधार हो जाये, तो स्त्री खुदबखुद सुरक्षित हो जायेगी !!!!! आखिर वो भी जीना चाहती है।
 
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on: Feb 15, 2019
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language: hi

.कायराना दुस्साहस ? ?

पुलवामा में देश के दुश्मनों ने दिया बर्बरता को अंजाम ।
चालीस सेनिकों का खून बहाकर किया नीचता भरा काम ॥

इनके सात पुश्तै याद करें ऐसी दो इन दहशतगर्दों को सजा ।
फिर कभी भारत की तरफ ना देखें चखा दो ऐसा मजा ॥

जो बहा है खून शहीदों का वो पवित्र खून जाने ना पाए जाया ।
जो पाल रहा है इन दहशतगर्दों को उस मुल्क का ही करदो सफाया॥

इस नामुराद ओछी हरकत से इस देश को डरा ना पाओगे ।
कट जाए जो देश की आन के लिए उस सर को झुका ना पाओगे

जिसने अपना बेटा, भाई, पति खोया है होगी नहीं उनकी भरपाई।
फिर भी देश की आन के लिए जान देने में पिछे नहीं हटेगा फौजी भाई ॥

पुलवामा में दहशतगर्दों ने की है जो नीच हरकत करते हैं उसकी निंदा ।
पर खाते हैं आज कसम उन गुनाहगारों में एक भी ना बच पाए जिंदा ॥

अमर शहीदों की कुर्बानी में जहाँ पूरे देश की आँखे हुई है नम ।
वहीं शहीदों के अपनों की छाती हुई चौड़ी, भले हो अपनों को खोने का गम ॥
.................................................................................द्वारा............राजेश सिंह ॥
 
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on: Feb 14, 2019
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language: hi

अपना दिल पेश करूं,
अपनी वफा पेश करूं !!

कुछ समझ में नहीं आता ,
तुझे क्या पेश करुं !!

जो तेरे दिल को लुभाए ,
वो अदा मुझ में है कि नहीं !!
जानती नहीं ये अदाओं की बातें ,
इसलिए क्यों न तुझे अपनी हर अदा ही पेश करुं !!   

 
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on: Feb 14, 2019
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language: hi

४।

हाँ यह तो है सच ,छोड़ नहीं सकते ,
न ,न ,करते हम कर लेते हैं राजी
कदम से कदम मिला लेते है मजबूरन
यह भी सच है मार्केटिंग के भी हाथ है
वैलेंटाइन डे को धूम धाम करने में ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,शरू ,,,५।५५
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

बिगड़ गईं ही नई पीढ़ी इंटेरनेट और बाजारवाद के सोहबत से
चलो कमसेकम एक दिन तो लोगों में गुजरे प्यार मोहब्बत से ।
मैं तो कहता हूँ कि एक दिन प्यार के लिए बहुत कम है यार ।
साल के पूरे 365दिन मुक़र्रर होने चाहिए करने के लिए प्यार ॥
।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,राज ॥ ।६।०३
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
५।
ठीक कहते हो आप कवि वर
प्यार होनी चाहिए साल भर ,हर दिन
मगर मन के अंदर ह्रदय में भर कर
सडकों में लड़की लड़का चूमना बंद करे
कोई विदेशी नाचते हैं तो हम क्यों नाचे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।शरू ,,,६।09
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
हम भी तो यही चाहते हैं आए ना संस्कृति पर कोई आंच
बंद होना चाहिए अश्लीलता का खुल्लमखुल्ला नंगा नाच ।
पर अब इंटेरनेट से प्रभावित नई पीढ़ी को समझाए कौन ?
हमें क्या लेना देना सोचकर रह जाते हैं सभी मौन ॥
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,राज ॥ ,,,,,,,,,,,६।१९
xxxxx।xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
६।
ऐसी होना चाहिए हमारी शिक्षण
की हमारी नयी पीढ़ी खुद समझे
हमारी परंपरा ,हमारी संस्कृति
उन्हें हो हमारी देश की रीत रिवाज़ पर नाज़ ।,,,,,,,,,,,,,,,,,,शरू ६,२४
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
हमारी शिक्षण पद्दति या संस्कृति पर नहीं है कोई खोट
दरअसल ये बाजारवाद का और नेट का है जमाने पर चोट
कुछ नए जमाने ने युवा पीढ़ी को लिया है मजबूत पकड़
कुछ विदेशी कुरीतियों ने भी आम भारतीयो को लिया है जकड़ ॥
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,राज ॥
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
 
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on: Feb 14, 2019
ratings: 9

language: hi

,,,,,,,,,,,,,वैलेंटाइन डे ,,,,,,,,

यह क्या है हम कहाँ जा रहे हैं
यह क्या है वैलेंटाइन डे ,,,,।?
प्यार करनेका खुल्लम खुल्ला
क्यों करते हैं प्रदर्शन यहां वहां ,,?,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,शरू ।५।१४
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
ये दिन है जब करने का प्यार का इजहार ।
तो लोगों को क्यों है इस बात पर ऐतराज ।
साल में एक ही दिन तो मुकर्रर है प्यार के लिए
तो हम दो दिलों के बीच क्यों आएं यार ॥ 😀😀😁😁
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,राज ५,१९
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
२।
प्यार के खिलाफ हम नहीं हरगिज
भरे पड़े हैं प्यार की कथा से हमारी इतिहास
हम है खिलाफ इनकी नंगे नाच पर
प्यार को क्यों बनाते हैं लोग फ्री शो ,,,,,,,,,,,,,,,,,,शरू ५।२५
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
नौजवानों में नई उमंग होती है
प्यार की नई ।तरंग होती है
हो सकता है हो कोई इनमे भी लैला मजनू या शीरी फरहाद
जो आगे चलकर रचेंगे प्यार का इतिहास ॥
।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,राज ,,,,,,५।३२
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
३।
रह ने दो प्यार की उमंग और तरंग
मगर करते हैं इसका प्रदर्शन सड़को पर
छोटे बच्चे ,बड़े बूढ़ों पर होती है असर
चलना पड़ता हैं हम कुछ देख रहे हैं
जो हमें देखना नहीं चाहिए हर गिज,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,शरू ५।३९
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
अब क्या करें जब प्यार करे दो दीवाने को
अपनाना पड़ेगा हमको ऐसे ही जमाने को ।
बाकी इंटरनेट ने कर दी ही पूरी कसर ।
और कुछ तो है ये बाजारवाद का असर ॥
।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,राज ॥,,,,,,,५।५०
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
 
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on: Feb 10, 2019
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language: hi

हर शाम की लाली में खो कर,
सूरज को ढलते देखा है,
झूठे सपनो की चाह में हमने,
रातों को गुजरते देखा है,
चाँद है कोशों दूर हमसे पर,
नदी के ठहरे जल में अक्सर,
चांदनी को मचलते देखा है,
उम्र का तकाज़ा हमसे न जताओ साहब,
इतनी सी उम्र में हीं हमने,
जीने का हर रूप देखा है,
हमने फ्यूचर की बस के इंतज़ार में,
बचपन की आइस्क्रीम को पिघलते देखा है,
जीने की खुशियों के बीच,
किसी की याद को खलते देखा है,
लबों पे हँसी रख के अक्सर,
हर दिल को जलते देखा है,
टूटती निगाहों में भी हमने,
नए ख्वाब मचलते देखा है,
हमसे न पूछो ज़िंदगी की,
सफर के रास्तों के बारे में साहब,
जरुरत पड़ने पर हमने,
अपनों को बदलते देखा है,
अपने हीं यादों में अपना,
खोया हुआ बचपन देखा है,
माँ की ममता में हमने,
भगवन के रूप को देखा है,
खुद के सीने में हमने,
मंज़िल की भूख को देखा है,
हमसे न सुनाओ,
मुसीबतें इन राहों की,
हमने बिन पंखों के भी,
लहरों को उड़ते देख! है.....
 
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on: Feb 9, 2019
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tags: My Diary
language: hi

बड़ी लम्बी गुफ्तगू करनी है,
तुम आना एक पूरी ज़िंदगी ले कर,
सिकवे भी हैं तुमसे और,
किस्से भी हैं कुछ वही पुराने,
धड़कन भी कुछ शांत पड़ी है,
आ जाओ कभी तुम इसे चुराने,
आओ तो कुछ नयी बात बताएं,
कुछ किस्से तुमसे जुदाई के,
बाँटें थोड़ा सुकून भी,
तुमसे अपनी तन्हाई के,
तुम आना तो फुर्सत में आना,
जाने की हर ज़िद्द भुला कर,
शुरूआती दिनों में थी जो भी,
चेहरे पे वही ताज़गी ले कर,
बड़ी लम्बी गुफ्तगू करनी है,
तुम आना एक पूरी ज़िंदगी ले कर....
 
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on: Jan 23, 2019
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language: hi

माना बरसो से तुम साथ हो मेरे
न मेरी राहों पे तुम्हारे क़दमों के निशाँ हैं
न मेरी मँजिलों का पता है तुम्हें
कैसे कह दूँ जान! मैं हमसफर तुम्हें
माना बरसों से रखते हो तुम ख़याल मेरा
न मेरे जज़्बातों की है ख़बर तुम्हें
न मेरे लफजों की है क़दर तुम्हें
कैसे कह दूँ जान !मैं हमनवां तुम्हें
माना बरसो से रिश्ता है तुम्हारा मेरा
न मेरी मुस्कराहट में खिलखिलाते हो
न मेरे अश्क़ अपने काँधे पे सजाते हो
कैसे कह दूँ जान! मैं हमनशीन तुम्हें
माना बरसों से मुझमें बसा घर है तुम्हारा
न मेरी दिवारों पे यादें सजाते हो
न मेरे आँगन में रजनीगंधा महकाते हो
कैसे कह दूँ जान! मैं हमनफस तुम्हें!
 
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on: Jan 19, 2019
ratings: 4

language: hi

................रिहाई तेरी काली झुल्फों से ..............

1.
कल भी था ,आज भी है तेरा इन्तेजार ,
कैसे कहू की मुझे तुमसे है प्यार .
दफ़नाने नहीं तुमको मनाने आया हूँ .
साथ में दिल मेरा दिल का तोहफा लाया हूँ ........... .by राज

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चलो हठो वह कमज़ोर दिल का क्या करना ?...
बहुत देखि है यह तेरा रोज़ का बहाना ..
इतना आसान भी नहीं इस बार हमें मनाना ...
हम जानते है तुम्हे इंतज़ार है अब रिहाई का ............. by .. शरू

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2.
माना की आसान नहीं तुम्हे मनाना आज .
पर ये नामुमकिन भी तो नहीं हरगिज .
रिहा हो जॉन कभी तेरी काली झुल्फों से .
यह तो कभी मुमकिन नहीं इस जीवन में ............ .......by.. ..राज

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आइना में दिखती ऐश्वर्य कभी आती नहीं हाथ ,
रेगिस्थान में नज़र आती पानी , मिलती नहीं
आँख मिचोली खेलते सितारे हाथ नहीं लगते ,.
कभी कभी हाथ का निवाला मुह तक नहीं आते ............by शरू .

 
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on: Jan 17, 2019
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language: hi

पानी और प्यास के बीच ,
जो रिश्ता एक अनोखा है !
वह रिश्ता तेरा मेरा है !!

तू मेरी आँखों का पानी है ,
मैं प्यास तेरे जीवन की हूँ  !!

तू हर पल बहता रहता है ,
मेरी आँखों का मोती बन !
मैं हर पल बढ़ती रहती हूँ ,
तेरे रोम-रोम की इच्छा बन !!

तेरे और मेरे बीच जो रिश्ता एक अनोखा है ,
ना अब तक तुझको मैं समझी हूँ
ना ही तूने मुझको समझा है !!
 
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on: Jan 3, 2019
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tags: My Diary
language: hi

हमसफर ....
तेरी धड़कन बिगड़ी तो मन ने चाहा

सीने को तेरे मैं अपना दिल दे दूँ

जब तक चलें यह सांसे मेरी

घूलती रहें इनमें बातें तेरी

कानों मे मेरे हरदम

सुर तेरी हँसी का हो

शोर तेरे ठहाकों का हो

ज़िंदगी की किताब में

बचे है कितने पन्ने कोरे अभी

मिल कर लिखने है हमें

इसमें अभी अफ़साने कई

उठो!नफज मे भर लो स्याही नयी

यह महज़ पड़ाव है या बस

राह बदलने का कोई इशारा

तेरे मेरे क़दमों ने तय करने हैं

मेरी जान! अभी सफ़र कई

थाम हाथ चलो फिर मेरा

सुनो! पुकार रहीं हैं हमें मँजिल कई

जगह कहाँ आँखों में अश्क़ों की

बिखरे हैं इनमें अधूरे ख़्वाब कई

अधूरे वादे हैं कुछ,जो पूरे अभी करने हैं

कुछ शिकवे भी बाक़ी हैं जो

तुम्हें मुझसे और मुझे तुमसे करने हैं

देखो मुस्कुराकर मेरी आँखों में

बन हिना तेरे नाम की

यह अश्क़ सजा देंगे हथेलियाँ मेरी
 
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on: Jan 3, 2019
ratings: 5

language: hi

कोई मुझ से पूछ बैठा
“बदलना” किसे कहते हैं?

सोच में पड़ गई हूँ
मिसाल किस की दूँ?

“मौसम” की
या
“अपनों” की.

 
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on: Jan 3, 2019
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tags: Poem
language: hi

मौत महेबुबा है, जिंदगी जीस्मी आलम में,
होश ओ फुर्सत में , कब्र की खबर होती है

रूहानीयत में सदाबहार आलम है जिंदगी
नूरानी हाल खुशनुमा , दिलकी खबर होती है

**"*****

तलबदार है दिल, यकीनन, दुनिया
इन्तज़ार ए आलम, बहुत खास है

मौज ए दिल, आब सी ठंड लहरियां
नाम ए वफा, यह बीलकुल खास है

*********
 
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on: Jan 1, 2019
ratings: 3

tags: ..
language: hi

ज़िन्दगी" बदलने के लिए_*
*लड़ना पड़ता है..!_*
*_और आसान करने के लिए_*
*समझना पड़ता है..!*
*_वक़्त आपका है,चाहो तो_*
*सोना बना लो और चाहो तो.*
*_सोने में गुज़ार दो..!_*
*अगर कुछ अलग करना है तो*
*_भीड़ से हटकर चलो..!_*
*भीड़ साहस तो देती है पर*
*_पहचान छीन लेती है...!_*
*मंज़िल ना मिले तब तक हिम्मत*
*_मत हारो और ना ही ठहरो...._*
_क्योंकि_
*_पहाड़ से निकलने वाली नदियों ने_*
*आज तक रास्ते में किसीसे नहीं*
*_पूछा कि... _*
*"समन्दर कितना दूर है.*
 
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on: Jan 1, 2019
ratings: 3

tags: ..
language: hi

सबकी जिंदगी बदल गयी
एक नए सिरे में ढल गयी
कोई gilfriend में busy है
कोई बीवी के पीछे crazy हैं
किसी को नौकरी से फुरसत नही
किसी को दोस्तों की जरुरत नही
कोई पढने में डूबा है
किसी की दो दो महबूबा हैं
सारे यार गुम हो गये हैं
तू से आप और तुम हो गये है
कोई hello बोल कर formality करता हैं
कोई बात न करने के लिए guilty करता हैं
वक़्त वक़्त की बात हैं
किसी ने number save किया
किसी ने अजनबी सा behave किया
माना के अब हम साथ नही है
पर चुप चुप रहने भी तो बात नही हैं
कभी मिलो तो बोल लिया करो
बंद गांठो को खोल लिया करो
शिकायत हो तो दूर करो
पर यारो को खुद से न दूर करो
 
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on: Dec 31, 2018
ratings: 4

language: hi

गृह-विहीन बन वन-प्रयास का
तप्त आँसुओं, तप्त श्वास का,
एक और युग बीत रहा है,
आओ इस पर हर्ष मना लें!

आओ, नूतन वर्ष मना लें!

उठो, मिटा दें आशाओं को,
दबी छिपी अभिलाषाओं को,
आओ, निर्ममता से उर में
यह अंतिम संघर्ष मना लें!

आओ, नूतन वर्ष मना लें!

हुई बहुत दिन खेल मिचौनी,
बात यही थी निश्चित होनी,
आओ, सदा खुश रहने का
जीवन में आदर्श बना लें!

आओ, नूतन वर्ष मना लें!

 
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on: Dec 22, 2018
ratings: 4

tags: Poem
language: hi


यु ही ना गुजरे , दौर ए हंसी ,। शबनम,
दो पल ठहर भी जाए जिंदगी यकीनन;

वक्त के साथ-साथ, बदल जाता है जहां,
अबदल आप में है, रुहानीयत यकीनन ;

बड़े शौक से पाला है, परिंदा ए हुश्न ,
उल्फत की जंजीरों में, कैद है, यकीनन;

रफ्ता रफ्ता बढ़ जाएगा, फा‌सला मिटेगा,
दुश्वार लगेगी ज़रा ज़रा दुरियां, यकीनन;

आनंद, होश में जीना, हकीकत में जिंदगी,
बेहोशी का बाजार है यह दुनिया, यकीनन;
 
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on: Dec 15, 2018
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tags: friends
language: hi

बहुत डर लगता है मुझे उन लोगों से.....
जिनके चेहरे पर मिठास और दिलमें जहर होता है.....
जिंदगी गुजर गयी सबको खुश करने में......
जो खुश हुए वो अपने नही थे......
जो अपने थे वो कभी खुश नही हुए......
अनुभव कहता है खामोशियाँ ही बेहतर है.......
शब्दों से लोग रुठते बहुत है.......
कितना भी समेट लो हाथों से..
फिसलता जरुर है.....
ये वक्त है साहब बदलता जरुर है....
 
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on: Dec 15, 2018
ratings: 8

language: hi

गर कोई कुछ ना बोले तो तुम भी चुप मत रहना ।

ये चुप रहने की आदत बीमारी बन जाएगी
जब तुम बोलना चाहोगे आवाज नहीं आएगी।

उन मौन भरी चीत्कारों में अपना स्वर पहचानो
चुप्पी को कब चुप करना है इतना तो तुम जानो।

लोगों के पास में बातें हैं पर तुमको काम भी करना है
क्या करना है? कब करना है? ये तय भी तुमको करना है।

गर तुम बातों में आओगे जीवन का स्वर लय खो दोगे
अपने दिल की जो सुनी नहीं गैरों की वरीयता जो दोगे।

अपने मरने से दिखे स्वर्ग इस सच्चाई को मानो
चुप्पी को कब चुप करना है इतना तो तुम जानो।

कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना
गर कोई कुछ ना बोले तो तुम भी चुप मत रहना।
 
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on: Dec 12, 2018
ratings: 6

language: hi

सुनो… यूँ “चुप” से न रहा करो !!!!

यूँ “खामोश” से जो हो जाते हो,
तो दिल को “वहम” सा हो जाता है !!

कहीं “खफा” तो नही हो..??
कहीं “उदास” तो नही हो…?? !!

तुम “बोलते” अच्छे लगते हो,
तुम “लड़ते” अच्छे लगते हो, !!

कभी “शरारत” से, कभी “गुस्से” से,
तुम “हँसते” अच्छे लगते हो, !!

सुनो… यूँ “चुप” से ना रहा करो !!!!

 
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