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on: Sep 20, 2018
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language: hi

बेगाने होते लोग देखे, 
अजनबी होता शहर देखा 
हर इंसान को यहाँ, 
मैंने खुद से ही बेखबर देखा। 

रोते हुए नयन देखे, 
मुस्कुराता हुआ अधर देखा 
गैरों के हाथों में मरहम, 
अपनों के हाथों में खंजर देखा। 

मत पूछ इस जिंदगी में, 
इन आँखों ने क्या मंजर देखा 
मैंने हर इंसान को यहाँ, 
बस खुद से ही बेखबर देखा।
 
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on: Sep 16, 2018
ratings: 4

tags: Friend
language: hi

दिल की ख्वाहिश को नाम क्या दूँ,
प्यार का उसे पैगाम क्या दूँ,
दिल में दर्द नहीं, उसकी यादें हैं,
अब यादें ही दर्द दे,
तो उसे इल्ज़ाम क्या दूँ।
 
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on: Sep 9, 2018
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tags: FRIENDS
language: hi

मेरे चिराग़ हैं नादाँ , ऐ हवा धीरे चल
तेरे पास है आसमाँ, ऐ हवा धीरे चल।

ये दीवारें हैं कच्ची , छत कमज़ोर है
नए घर के हैं निशाँ , ऐ हवा धीरे चल।

फूल बिखर न जाए,तितली डर न जाए
खौफ में है बागवां , ऐ हवा धीरे चल।

दुपट्टा गर उड़ जाए,वो तो डर जाएँगी
इश्क अभी है जवाँ , ऐ हवा धीरे चल।
 
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by: Saloni
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on: Sep 8, 2018
ratings: 2

tags: मैं
language: hi

कोई तुम से पूछे ,
कौन हूं मैं,
कह देना ,
बीता हुआ कल हो तुम,
सुंदर पल हो तुम।
कोई तुम से पूछे कौन हु मैं,
कह देना ,
आंखो के काजल हो तुम।
सलोनी
 
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on: Sep 8, 2018
ratings: 1

tags: friends
language: hi

वो तो दिवानी थी मुझे तन्हां छोड़ गई
खुद न रुकी तो अपना साया छोड़ गई

दुख न सही गम इस बात का है
आंखो से करके वादा होंठो से तोड़ गई।

मैं चाहता हूँ मैं तेरी... हर साँस में मिलूँ,
परछाईयों में, धूप में, बरसात में मिलूँ।

कोई खुदा के दर पे मुझे ढूंढ़ता फिरे,
मैं भी किसी को प्यार की सौगात में मिलूँ।

तड़पे हजारों दिल मगर हासिल न मैं हुआ,
तू चाहता है मैं तुझे यूँ ही खैरात में मिलूँ।
 
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on: Sep 8, 2018
ratings: 2

tags: friends
language: hi

चमन में जो भी थे नाफ़िज़ उसूल उसके थे,
तमाम काँटे हमारे थे और फूल उसके थे,
मैं इल्तेज़ा भी करता तो किस तरह करता,
शहर में फैसले सबको कबूल उसके थे।
शिकायत क्या करूँ दोनों तरफ ग़म का फसाना है,
मेरे आगे मोहब्बत है तेरे आगे ज़माना है,
पुकारा है तुझे मंजिल ने लेकिन मैं कहाँ जाऊं,
बिछड़ कर तेरी दुनिया से कहाँ मेरा ठिकाना है।
हर एक हसीन चेहरे में गुमान उसका था,
बसा न कोई दिल में ये मकान उसका था,
तमाम दर्द मिट गए मेरे दिल से लेकिन,
जो न मिट सका वो एक नाम उसका था।
 
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by: Saloni
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on: Sep 1, 2018
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tags: कभी
language: hi

कभी आते है वो,

कभी जाते है वो।

कभी दिल लगाते है वो,

कभी दिल तोड़ते है वो।

कभी बाते करते है वो,

कभी चुप रहते है वो।

न जाने क्यों ऐसे सताते है वो।

कभी मुस्कुराते हैं वो,

कभी खिल खिला के हसते है वो।

न जाने क्यों नटखट है वो।

सलोनी
,🌸🌸🌸🌸
🌹🌹🌹🌹
🌻🌻🌻🌻
 
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on: Aug 28, 2018
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tags: friends
language: hi

तनहा बैठे है दोनो.....
“मै और मेरा दिल”
.
तेरी याद मे रहते है दोनो...
“मै और मेरा दिल”
.
शीशे का वजूद और हर हाथ में पत्थर...
सहमे बैठे है दोनो...
“मै और मेरा दिल”
.
ख़ामोशी का सबब जो कोई पूछ ले तो....
तेरा नाम ही लेते है दोनो....
“मै और मेरा दिल”.....!!!!!
 
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on: Aug 28, 2018
ratings: 4

language: hi


वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है,
आहट उसकी, जैसे दिल में हलचल सी कर जाती है,

झुकी नजर उसकी, जैसे मुझको पागल कर जाती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।

आइना है
उसकी नज़रें, जो सबकुछ बतलाती है, वो है पागल,
जो दिल को झुटा बतलाती है,

लगती है प्यारी,
जब खुद ही वो शर्माती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है
 
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on: Aug 21, 2018
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tags: Poem
language: hi

फकत, लकीरें है खींचती चारों तरफ,
कोई मन से ,तन से ,कोई रुह की तरफ

फकत ,अंदाज है कुछ जज्बात का यहाँ
फकीरी है ,कोई चलती ईबादत की तरफ

फकत, पह्चान ही अधुरी है अपनी तरफ
नजरों का धोखा है, दुनियादारी की तरफ

फकत, खयाल खोना हुश्न हकीकी तरफ
मिजाज ए महोबत,जीस्म जाँन की तरफ

फकत, जिंदगी है फना फितरत की तरफ
ओर कदम उठ रहे है,मौत महेबुबा तरफ
 
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on: Aug 17, 2018
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tags: Poem
language: hi

मिलकर युं ही बीछडती है परछांईयाँ फकत,
ना मिला कोई , नूर ए अलम आईना बनकर

आरपार देखलुं नजारा, ओर नजर का हुनर
ईश्क हकीकी ,मिला ना कोई रुहाना बनकर

दर्द ओर जख्म की परवाह ,कहाँ है दिल को
मरहमी अंदाज मैं जीता हुँ दिल ए नूर बनकर

रास्ते अजीब से ,चले आ रहे मेरी तरफ यारों
मैं मिलना चाहता बस, रुहानी मंजिल बनकर
 
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by: Saloni
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on: Aug 16, 2018
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language: hi

जन्म लेकर आओ कान्हा फिर,
सब के दुःख दूर कर दो कान्हा फिर,

जन्म लेकर आओ कान्हा फिर,
हम सब को अपने छत्र छाया में रख लो फिर,
तू है हमारी प्यारी माँ,
हम है तुम्हारे वच्चे,

आओ जाओ फिर कान्हा ,
हम है अधूरे तुम्हारे बिना।

सलोनी
 
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by: Saloni
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on: Aug 16, 2018
ratings: 2

language: hi

जन्म लेकर आओ कान्हा फिर,
सब के दुःख दूर कर दो कान्हा फिर,

जन्म लेकर आओ कान्हा फिर,
हम सब को अपने छत्र छाया में रख लो फिर,
तू है हमारी प्यारी माँ,
हम है तुम्हारे वच्चे,

आओ जाओ फिर कान्हा ,
हम है अधूरे तुम्हारे बिना।

सलोनी
 
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on: Aug 15, 2018
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tags: ..
language: hi

आज़ादी 
जुबां आज़ाद है हमारी, पर लफ़्ज़ क़रते बस शोर हैं

सोच कैद है अभी , क्यों हम उसे आज़ाद करते नहीं

तन आज़ाद है हमारा पर क़दम आगे बढ़ते नहीं 

मन क़ैद है अभी ,क्यों कुरिति की बेड़ी हमसे खुलती नहीं

आसमान आजाद है हमारा पर साँसें टुटती है घुटकर 

हवा क़ैद है अभी. क्यों घुले ज़हर साफ़ हम करते नहीं

देश आज़ाद है हमारा पर रास्ते अभी महफ़ूज़ नहीं

इंसानियत कैद है अभी, क्यों वहशत से अपनी लड़ते नहीं 

समाज, धर्म , जाति, भाषा, प्रदेश ,लिंग . व्यवसाय 

रंगो की है भीड़ ,क्यों तिरंगे की पहचान अलग करते नहीं
 
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on: Aug 13, 2018
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language: hi

दोस्तों आजकल हम T V में देखते हैं , अखबरों में पढ़ते हैं कि कश्मीर ममें युवाओं द्वारा सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी की घटना हो रही है । लेकिन फिर भी हमारे सुरक्षाबल पत्थर खाकर भी बिल्कुल अपना आपा नहीँ खोते । अपने हाथों मे हथियार होते हुए संयम बनाए रहते हैं।आज समय आगया है पूरे देश को इस विषय पर सोचना चाहिए व इस घटना की घोर निंदा करनी चाहिए ॥

..........................पत्थरबाजी..........

कश्मीर के युवाओं ने पेश की है ये कैसी भयानक तस्वीर ?
पत्थरबाजी व नफरत की आग में झोंक दी है कश्मीर ॥<

ऐक तो पडोसी मुल्क ने वैसे ही कर रखा है नाक में दम
उपर से पत्थरबाजी की घटना नहीँ हो रही है कम ॥
और पत्थर भी उठाया है तो देखो किसके खिलाफत ?
जो रात दिन करते हैं दुश्मनों से उनकी हिफाजत ॥

दुश्मन ही नहीँ चाहे बर्फबारी हो या बाढ़ करते हैं इनकी सुरक्षा ।
इन नामुराद पत्थरबाजो नें अपने मसीहाओ को भी नहीँ है बक्शा ॥
कश्मीर के हालात दिन ब दिन होते जा रेहें हैं बद से बदतर ।
किसने लगाई यह आग किसने थमा दिए युवाओं के हाथों में पत्थर ?

और सुरक्षाबलों की सहनशीलता को देनी पड़ेगी दाद ।
पत्थर खाकर भी न माथे में शिकन न आँखों में फरियाद ॥
बातचीत व समझदारी से भी जीती जाती है हारी बाजी ।
हर समस्या का हल नहीँ होता यारो सिर्फ पत्थरबाजी ॥

..............................................द्वारा...............राजेश सिंह ॥
 
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on: Aug 12, 2018
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language: hi

माना बरसो से तुम साथ हो मेरे
न मेरी राहों पे तुम्हारे क़दमों के निशाँ हैं
न मेरी मँजिलों का पता है तुम्हें
कैसे कह दूँ जान! मैं हमसफर तुम्हें
माना बरसों से रखते हो तुम ख़याल मेरा
न मेरे जज़्बातों की है ख़बर तुम्हें
न मेरे लफजों की है क़दर तुम्हें
कैसे कह दूँ जान !मैं हमनवां तुम्हें
माना बरसो से रिश्ता है तुम्हारा मेरा
न मेरी मुस्कराहट में खिलखिलाते हो
न मेरे अश्क़ अपने काँधे पे सजाते हो
कैसे कह दूँ जान! मैं हमनशीन तुम्हें
माना बरसों से मुझमें बसा घर है तुम्हारा
न मेरी दिवारों पे यादें सजाते हो
न मेरे आँगन में रजनीगंधा महकाते हो
कैसे कह दूँ जान! मैं हमनफस तुम्हें
 
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on: Aug 11, 2018
ratings: 2

tags: friends
language: hi

सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे
चले चलो की जहाँ तक ये आसमान रहे
ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल
मज़ा तो तब है के पैरों में कुछ थकान रहे...
सब नहीं करते, ना कर सकेंगे नशा शायरी का
ये तो वो जाम है यारों, जो मोहब्बत के नवाब पीते हैं..
 
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on: Aug 11, 2018
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language: hi

कंद-मूल खाने वालों से 
मांसाहारी डरते थे।। 

पोरस जैसे शूर-वीर को
नमन 'सिकंदर' करते थे॥ 

चौदह वर्षों तक खूंखारी
वन में जिसका धाम था।। 

मन-मन्दिर में बसने वाला
शाकाहारी *राम* था।। 

चाहते तो खा सकते थे वो
मांस पशु के ढेरो में।। 

लेकिन उनको प्यार मिला 
'शबरी' के जूठे बेरो में॥ 

चक्र सुदर्शन धारी थे 
गोवर्धन पर भारी थे॥ 

मुरली से वश करने वाले 
गिरधर' शाकाहारी थे॥ 

पर-सेवा, पर-प्रेम का परचम
चोटी पर फहराया था।। 

निर्धन की कुटिया में जाकर 
जिसने मान बढाया था॥ 

सपने जिसने देखे थे 
मानवता के विस्तार के।। 

नानक जैसे महा-संत थे 
वाचक शाकाहार के॥ 

उठो जरा तुम पढ़ कर देखो
गौरवमय इतिहास को।। 

आदम से आदी तक फैले
इस नीले आकाश को॥ 

दया की आँखे खोल देख लो 
पशु के करुण क्रंदन को।। 

इंसानों का जिस्म बना है 
शाकाहारी भोजन को॥ 

अंग लाश के खा जाए 
क्या फ़िर भी वो इंसान है? 

पेट तुम्हारा मुर्दाघर है 
या कोई कब्रिस्तान है? 

आँखे कितना रोती हैं जब 
उंगली अपनी जलती है 

सोचो उस तड़पन की हद
जब जिस्म पे आरी चलती है॥ 

बेबसता तुम पशु की देखो 
बचने के आसार नही।। 

जीते जी तन काटा जाए 
उस पीडा का पार नही॥ 

खाने से पहले बिरयानी 
चीख जीव की सुन लेते।। 

करुणा के वश होकर तुम भी
गिरी गिरनार को चुन लेते॥
 
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on: Aug 11, 2018
ratings: 3

tags: ..
language: hi

मत सोचो क्या लिखना है

और क्या किसने पढ़ना है

लिखो जो तुम्हारा दिल कहे

मत सोचो कि कब लिखना है

लिखो जब दिल थमा के क़लम

हाथों से तुम्हारे जिद कर कहे

लिखो! बस अभी लिखना है!

लिखो मत जो तुमने पढ़ा किताबों में

लिखो वो जो ज़िंदगी ने पढ़ाया तुम्हें

ख़ुद को और अपनों को पढ़कर कर

जो नज़्म बरबस हाथों में मचलती है

तुम लिखो, बस वही नज़्म लिखो!

तुम्हारे दिल से लिखे लफ़्ज़

किसी का दिल ही पढ़ता है

हमदिली का यह लम्बा सफ़र

एहसास पल में तय करता है

जज़्बातों की स्याही डाल

सच की नोंक से कुरेद रफ़ू करो

रूह पर पड़ा पुराना चाक कोई

या फिर नादान ज़ेहन से हटा दो

किसी फरेब का नक़ाब कोई!

जेहनी लोगों की सयानी बातों ने

घोलें हैं हवा में ज़हर कई

तुम अपनी दिवानगी के लफ़्ज़ों से

बख़्श दो ,घुटती साँसों को

साफ़ हवा का झोंका कोई

लिखो तो कुछ ऐसा लिखो

पढकर जिसे कुछ टूटे ख़्वाबों को

साझे आसमान में नयी परवाज़ मिले
 
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on: Aug 11, 2018
ratings: 4

tags: ..
language: hi

भटक रहा है प्यासा क़दमों में छालें लिए

ख़्वाहिशों का सराब है

तेरे ख़यालों का सेहरा है

छोड़ दे यह कांरवा

बे मंज़िल है इसका सफ़र

कभी डूब के देख

तेरे अंदर छुपा दरिया है
 
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