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on: Apr 13, 2018
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tags: Poem
language: hi

इक टक ,पलकें ठहर सी गई
जहाँ आसमाँ धरती मिल गई

वोह अहेसास , सुकुन भर गई
मंजिल आप में ही मिल गई

रात का सन्नाटा,झिलमिल चाँद
टिमटिमाटी , रोशनी मिल गई

महकती हवाँए , चहकते परिन्दे
गुल ए दिल ,नजाकत मिल गई

बाहरी सतह पर मौज़ ए दरिया
गौहर दिल , रुुहानियत मिल गई

पाना क्या ,खोना क्या यहाँ पर
मंजिल ए हुश्न, हकीकी मिल गई
 
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on: Apr 10, 2018
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tags: friends
language: hi

जाने कैसे कैसे ख्वाब देखता हूँ,
जब भी तेरे चेहरे की किताब देखता हूँ.

तेरा हरेक हर्फ रौशन करता है मुझे,
मैं तुझे देखता हूँ के महताब देखता हूँ.

कुछ ऐसा नशा है तेरी निगाहों में,
लगता है जैसे मैं शराब देखता हूँ.

तू कहता है मुझसे इश्क नहीं करता,
पर मिलने को हमेशा बेताब देखता हूँ.

जब तन्हा होता हूँ सोचता हूँ तुझे,
फिर आँखों से उठता सैलाब देखता हूँ.
 
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on: Apr 9, 2018
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tags: Poem
language: hi

बेदाग है दिल , नजरों की पहेचान चाहिए
हसीन हुश्न है, फूलों की नजाकत चाहिए

मिले हर सुबह , सुनहरी किरणें खुरशीद भी
मिटने की फितरत , वाली शबनमी चाहिए

गुंजते हैं भँवर, खुशमिजाज़ फूलों,पर सदा
मौसम ए ईश्क, फीर बसंत बहार ही चाहिए

है ईबादत का जुनून , तस्बीह में नाम ए वफा
हक़ से पाना हकीकी, दिल में,महोबत चाहिए


 
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on: Apr 8, 2018
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tags: Chandnni
language: hi

बरसात होगी अश्‍क की मेरे लि‍ए कभी।
रोया करेंगेआप भी मेरे लि‍ए कभी।

ढक जायेगी गुलों से मेरी क़ब्र देखना,
ऐसी बहार आएगी मेरे लि‍ए कभी।

ऐ ज़ख्‍़म दे के भूलने वाले ज़रा बता,
मरहम की तूने फ़ि‍क्र की मेरे लि‍ए कभी।

दोज़ख़ बनी है आज वो मेरे फ़ि‍राक़ में,
दुनि‍या जो एक स्‍वर्ग थी मेरे लि‍ए कभी।

'चाँदनी ' न था खयाल कि महँगी पड़ेगी यूँ,
इक बेवफ़ा की दोस्‍ती मेरे लि‍ए कभी।
......................................
'चाँदनी '
 
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on: Apr 6, 2018
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tags: friends
language: hi

इतना आसां नहीं होता "अलविदा" कहना,
उसे ज़रूर मुश्किलों से याराना रहा होगा.

बेहद करीब आकर मुझे तन्हा कर गया वो,
यकीनन वो दुश्मन कोई पुराना रहा होगा.

ये आँखें जो अब तुम्हें बेज़ार नज़र आती हैं,
इनमें कभी किसी का ठिकाना रहा होगा.

सांस थमने के बाद भी अश्क रुकते ही नहीं,
ये भी कोई बदकिस्मत दीवाना रहा होगा.
 
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on: Mar 30, 2018
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tags: friends
language: hi

खोई-खोई अँखियों में सपने सजाएंगे हम
मुझे याद आने वाले,तुम्हें याद आएंगे हम

काटे न कटेंगी ये रातें हमारे बिन
जागा करोगे तुम तारों को गिन-गिन
दिल में समाने वाले,तुम्हें न भुलाएंगे हम
मुझे याद आने वाले,तुम्हें याद आएंगे हम

बातें हज़ारों हैं जो तुमको सुनानी हैं
यादें हज़ारों हैं जो तुमको बतानी हैं
नग़में सुहाने सारे,तुमको सुनाएंगे हम
मुझे याद आने वाले, तुम्हें याद आएंगे हम

बहकी हवाएं होंगी महकी फ़ज़ाओं में
आना ही होगा तुम्हें मेरी इन बाँहों में
हमको रिझाने वाले तुमको लुभाएंगे हम
मुझे याद आने वाले, तुम्हें याद आएंगे हम

खोई-खोई अँखियों में सपने सजाएंगे हम
मुझे याद आने वाले, तुम्हें याद आएंगे हम
 
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on: Mar 29, 2018
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tags: friends
language: hi

तेरे बिन तन्हा मन है, तेरे बिन खालीपन है.
जैसे हो आसमां सूना तारों बिना वो हाल है.
लम्हा कटे नहीं पलके झपके नहीं ये प्यार है.

मेरी साँसें ये मुझसे कहती हैं तुझमे ही मेरी जान है.
जिसे देना अपना नाम है बस ये ही मेरा काम है.

तेरे बिन साँस आए न, तेरे बिन कुछ भाए न.
सूनी हो डालियाँ जैसे फूलों बिना वो हाल है.
इक है परछाइयाँ अपनी मिले बिना ये प्यार है.

मेरी आंहें कभी जो उठती हैं तेरी खातिर दुआएँ करती हैं.
किस्मत का ये अहसान है इस दिल में तेरा नाम है.
 
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on: Mar 28, 2018
ratings: 4

tags: Poem
language: hi

चलो सफर ए जिंदगी , लफ्ज से परे
आशियाँ ए नूर, लहद अंजाम से परे

जख्म का कहर, ओर दर्द भी है
दुआ बेहिसाब मरहमी अंदाज भी है

हमदर्द का सिलसिला , दर्द से है
मैं बेदर्द बेजख्म भी, कहरा क्यु रहा

उलजने अब सुलजने लगी है क्या करु?
यह ईल्म कैसा, मेरी हयाति !,,क्या करुं ?

वजह ओर वजूद ,दोनो मीट ही गए
बेहयात हुं ,बेमिसाल जिंदगी यहा

टुटकर बीखरना ,खास जानता हु मैं ,सितारा
ओ, चाँद रहेमत के कुछ पल, मुस्कराने दे मुजे
 
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on: Mar 28, 2018
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language: hi

कुछ कदम चल रूककर,
क्यों फिर लौट अाता हूं..
क्यों कोई हम साया,
जैसे छोड़ पिछे आता हूं...
देखूं पलट कर उसे,
कुछ देख नहीं पाता हूं...
कोई साया सा मुझे पुकारे,
क्यों जाने मैं बहक जाता हूं...
छोड़ अाया उन मंजिलों को,
बस कदम दर कदम मेरे,
रेत पर निशा बाकी हैं...
कोई पुकारे न पुकारे,
बस सोच कुछ ठान लेता हूं...
चल ए-दिल कौन है यहां,
क्यों रूके है तू यहां,,,
शायद पिछे न सही,
अागे कोई नई मंजिल होगी,,,
कोई साया मिल जाए,
चल ए दिल कौन है यहां.....
------------
kuchh kadam chal rookakar,
kyon phir laut aaata hoon..
kyon koee ham saaya,
jaise chhod pichhe aata hoon...
dekhoon palat kar use,
kuchh dekh nahin paata hoon...
koee saaya sa mujhe pukaare,
kyon jaane main bahak jaata hoon...
chhod aaaya un manjilon ko,
bas kadam dar kadam mere,
ret par nisha baakee hain...
koee pukaare na pukaare,
bas soch kuchh thaan leta hoon...
chal e-dil kaun hai yahaan,
kyon rooke hai too yahaan,,,
shaayad pichhe na sahee,
aaage koee naee manjil hogee,,,
koee saaya mil jae,
chal e dil kaun hai yahaan.....
 
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on: Mar 27, 2018
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tags: friends
language: hi

क्या न जाने जहाँ का भी दस्तूर था
जिसको चाहा था दिल ने वही दूर था
दिल मजबूर था.....!!

रस्म-ए-उल्फ़त अधूरी रही थी मेरी
वो सदाएं अधूरी रही थीं मेरी
दिल से दिल ना मिले,ग़म से दिल चूर था
जिसको चाहा था दिल ने वही दूर था
दिल मजबूर था.......!!

मशवरा दिल से करते भला कब तलक
तस्करा दिल से करते भला कब तलक
ख़ुद को ख़ुद पर भरोसा न भरपूर था
जिसको चाहा था दिल ने वही दूर था
दिलमजबूर था.......!!

ये समुन्दर सी आँखे जो बहने लगीं
अपने ग़म की कहानी लो कहने लगीं
हर कोई इस ज़माने में मगरूर था
जिसको चाहा था दिल में वही दूर था
दिल मजबूर था......!!

क्या न जाने जहाँ का भी दस्तूर था
जिसको चाहा था,दिल ने वही दूर था
दिल मजबूर था.......!!
 
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on: Mar 26, 2018
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tags: Poem
language: hi

दिल ए यार, खुशबू मैं , पाना चाहता हुं
फूलों जैसी नजा़क़त , पाना चाहता हुं

पत्थर दिल हुं , आप मान लीजिए मुझे
मोम सी हो ईनायत, पिघलना चाहता हुं

तुटे हुए आईने की तरह, बिखर गया हुं
दिदारे यार ज़लक , एक पाना चाहता हुं

बहुत खर्च किया है, तिलिस्मी नूर अपना
याराना थोडी रियायत, पाना चाहता हुं

बहुत जे़ला है गम़ ए जिंदगी कोअंधेरों में
रोशन दिल से किफ़ायत ,पाना चाहता हुं
 
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on: Mar 24, 2018
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tags: fRIENDS
language: hi

*"जिन्दगी की दौड़ में,*
*तजुर्बा कच्चा ही रह गया...।"*
*" हम सीख न पाये 'फरेब'*
*और दिल बच्चा ही रह गया...।"*
*"बचपन में जहां चाहा हँस लेते थे,*
*जहां चाहा रो लेते थे...।"*
*"पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए,*
*और आंसुओ को तन्हाई..।"*
*"हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह,* *अन्दाज़ से..."*
*देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों में ..।*
*"चलो मुस्कुराने की वजह ढुंढते हैं...*
*तुम हमें ढुंढो...हम तुम्हे ढुंढते हैं .....!!"*
 
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on: Mar 22, 2018
ratings: 28

language: hi

एक गिलास पानी
.
उस सरकारी कार्यालय में लंबी लाइन लगी हुई थी। खिड़की पर जो क्लर्क बैठा हुआ था, वह तल्ख़ मिजाज़ का था और सभी से तेज़ स्वर में बात कर रहा था। उस समय भी एक महिला को डांटते हुए वह कह रहा था, "आपको ज़रा भी पता नहीं चलता, यह फॉर्म भर कर लायीं हैं, कुछ भी सही नहीं। सरकार ने फॉर्म फ्री कर रखा है तो कुछ भी भर दो, जेब का पैसा लगता तो दस लोगों से पूछ कर भरतीं आप।"
एक व्यक्ति पंक्ति में पीछे खड़ा काफी देर से यह देख रहा था, वह पंक्ति से बाहर निकल कर, पीछे के रास्ते से उस क्लर्क के पास जाकर खड़ा हो गया और वहीँ रखे मटके से पानी का एक गिलास भरकर उस क्लर्क की तरफ बढ़ा दिया।
क्लर्क ने उस व्यक्ति की तरफ आँखें तरेर कर देखा और गर्दन उचका कर ‘क्या है?’ का इशारा किया। उस व्यक्ति ने कहा, "सर, काफी देर से आप बोल रहे हैं, गला सूख गया होगा, पानी पी लीजिये।
क्लर्क ने पानी का गिलास हाथ में ले लिया और उसकी तरफ ऐसे देखा जैसे किसी दूसरे ग्रह के प्राणी को देख लिया हो, और कहा, "जानते हो, मैं कडुवा सच बोलता हूँ, इसलिए सब नाराज़ रहते हैं, चपरासी तक मुझे पानी नहीं पिलाता..."
वह व्यक्ति मुस्कुरा दिया और फिर पंक्ति में अपने स्थान पर जाकर खड़ा हो गया।
शाम को उस व्यक्ति के पास एक फ़ोन आया, दूसरी तरफ वही क्लर्क था, उसने कहा, "भाईसाहब, आपका नंबर आपके फॉर्म से लिया था, शुक्रिया अदा करने के लिये फ़ोन किया है। मेरी माँ और पत्नी में बिल्कुल नहीं बनती, आज भी जब मैं घर पहुंचा तो दोनों बहस कर रहीं थी, लेकिन आपका गुरुमन्त्र काम आ गया।"
वह व्यक्ति चौंका, और कहा, "जी? गुरुमंत्र?"
"जी हाँ, मैंने एक गिलास पानी अपनी माँ को दिया और दूसरा अपनी पत्नी को और यह कहा कि गला सूख रहा होगा पानी पी लो... बस तब से हम तीनों हँसते-खेलते बातें कर रहे हैं। अब भाईसाहब, आज खाने पर आप हमारे घर आ जाइये।"
"जी! लेकिन , खाने पर क्यों?"
क्लर्क ने भर्राये हुए स्वर में उत्तर दिया,
"जानना चाहता हूँ, एक गिलास पानी में इतना जादू है तो खाने में कितना होगा?"
 
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on: Mar 22, 2018
ratings: 4

tags: friends
language: hi

हमने कब मायूस लौटाया किसी मेह्मान को
अपनी कश्ती अपने हाथों सौंप दी तूफ़ान को

जिसकी ख़ातिर आदमी कर लेता है ख़ुद को फ़ना
कितना मुश्किल है बचा पाना उसी पहचान को

फिर न रख पाएगा वो महफ़ूज़ क़दमों के निशाँ
साथ जब मिल जाएगा आँधी का रेगिस्तान को

ऐ मेरे अश्को! मुझे इक बार कह दो शुक्रिया
मार दी ठोकर तुम्हारे वास्ते मुस्कान को

ज़िंदगी तो ज़िंदगी है, ज़िंदगी की क्या बिसात
जो नज़रअंदाज़ कर दे मौत के फ़रमान को

जान ले लेगी किसी दिन बंद कमरे की घुटन
खोल दो खिड़की को, दरवाज़े को, रोशनदान को

तन-बदन ही क्या, सुलग उठता है मेरा रोम-रोम
ठेस लगती है किसी अपने से जब सम्मान को

 
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on: Mar 21, 2018
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language: hi

मैनें कई बार
कोशिश की है
तुम से दूर जानें की,
लेकिन ......
मीलों चलनें के बाद
जब मुड़ कर देखता हूँ
तो तुम्हें
उतना ही करीब पाता
हूँ |
...

तुम्हारे इर्द
गिर्द
वृत्त की
परिधि बन कर रह गया
हूँ मैं ।
.......
 
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on: Mar 17, 2018
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tags: friends
language: hi

मिला वो भी नही करते,
मिला हम भी नही करते.
दगा वो भी नही करते,
दगा हम भी नही करते.
उन्हे रुसवाई का दुख,
हमे तन्हाई का डर
गिला वो भी नही करते,
शिकवा हम भी नही करते.
किसी मोड़ पर मुलाकात हो जाती है
अक्सर रुका वो भी नही करते,
ठहरा हम भी नही करते.
जब भी देखते हैं उन्हे,
सोचते है कुछ कहें उनसे .
सुना वो भी नही करते,
कहा हम भी नही करते.
लेकिन ये भी सच है,
की मोहब्बत उन्हे भी हे हमसे
इकरार वो भी नही करते,
इज़हार हम भी नही करते.
 
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on: Mar 15, 2018
ratings: 1

tags: friends
language: hi

मैं लफ़्ज़ों में कुछ भी इज़हार नहीं करता,
इसका मतलब ये नहीं की मैं तुझे प्यार नहीं करता,

चाहता हूँ मैं तुझे आज भी पर,
तेरी सोच में अपना वक़्त बेकार नहीं करता,

तमाशा ना बन जाए कहीं मोहब्बत मेरी,
इसी लिए अपने दर्द को नमूदार नहीं करता,

जो कुछ मिला है उसी में खुश हूँ मैं,
तेरे लिए खुदा से तकरार नहीं करता,

पर कुछ तो बात है तेरी फितरत में ज़ालिम,
वरना में तुझे चाहने की खता बार-बार नहीं करता...

दिल जब भी तन्हाई में तेरा नाम ले
दूर से ही सही, तू दिल का सलाम ले

हम तेरी मुहब्बत में सुबहो-शाम जले
मेरी बुझती नजर देखकर तू जान ले

कभी तुझे भी खलेगी हमारी कमी
कभी तू भी रोएगी, ये तू मान ले

एक दरिया बसाया है मेरी आंखों में
ऐ मेरे दिल, यूं मुझसे न इंतकाम ले
 
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on: Mar 13, 2018
ratings: 11

tags: friends
language: hi

आहिस्ता चल जिंदगी,अभी*
*कई कर्ज चुकाना बाकी है*
*कुछ दर्द मिटाना बाकी है*
*कुछ फर्ज निभाना बाकी है*
*रफ़्तार में तेरे चलने से*
*कुछ रूठ गए कुछ छूट गए*
*रूठों को मनाना बाकी है*
*रोतों को हँसाना बाकी है*
*कुछ रिश्ते बनकर ,टूट गए*
*कुछ जुड़ते -जुड़ते छूट गए*
*उन टूटे -छूटे रिश्तों के*
*जख्मों को मिटाना बाकी है*
*कुछ हसरतें अभी अधूरी हैं*
*कुछ काम भी और जरूरी हैं*
*जीवन की उलझ पहेली को*
*पूरा सुलझाना बाकी है*
*जब साँसों को थम जाना है*
*फिर क्या खोना ,क्या पाना है*
*पर मन के जिद्दी बच्चे को*
*यह बात बताना बाकी है*
*आहिस्ता चल जिंदगी ,अभी*
*कई कर्ज चुकाना बाकी है*
*कुछ दर्द मिटाना बाकी है*
*कुछ फर्ज निभाना बाकी है !*
 
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on: Mar 11, 2018
ratings: 1

tags: Poem
language: hi

दर्द दिल से उतर आया, उँगलीयों मे
बूत ए अलफाज़ , आशियाँ बनाया

रुखसत होती गई, सब बलाएँ भी
घौंसला, बखुबी दिल, तुने ये बनाया

होश में कहाँ है, मेरी निगाह तुझ पर
नूर ए नज़र, अंजाम नूराना बनाया

बेताब है, बहेकता ओर महकता दिल
बेवज़ह सही दिल, वजू़द तुने बनाया

माना ये ईबादत है , निगाहें करम दिल
मेरी हयाती का, हौसला बूलंद. बनाया
 
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on: Mar 7, 2018
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tags: Poem
language: hi

बेदाग हकीकी ,क्या बाँट दुं वफा से, खुदा
यहाँ फितरत ए फन , कौन मिटने वाला

तोहमत है कि तस्वीर नही, तमन्ना भी नही, यारो
आईना हु साफ साफ , क्युं नज़र मैं आता नही

हमदर्दों से पाला पडा है ,मेरा यकीनन
बेरहम तो नही, बस अलफाज़ जिन्दां

शुक्रगुजार हुं ,बस तहोमत ए दिल कभी
गुनेहगार हुं , कसुरवार हकीकी रिंदाना
 
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