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on: Feb 12, 2018
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language: hi

बे-इरादा नज़र उनसे टकरा गई
ज़िन्दगी में अचानक बहार आ गई

रूख़ से पर्दा उठा चाँद शर्मा गया
ज़ुल्फ़ बिखरी तो काली घटा छा गई

वो जो हँसते हुए बज़्म में आ गए
मैं ये समझा क़यामत क़रीब आ गई

उनकी ज़ुल्फ़ों में पड़ते हुए ख़म देखकर
शेख़ जी की तबीयत भी ललचा गई

मौत क्या चीज़ है मैं तुझको समझाऊँ क्या
इक मुसाफ़िर था रस्ते में नींद आ गई

दिल में पहले सी ऐ 'दिल' वो धड़कन नहीं
मोहब्बत में शायद कमी आ गई
 
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on: Feb 12, 2018
ratings: 1

language: hi

.......हर हर महादेव :...........
करके रख भभूत का शृंगार.
ड़ाल गले में नाग सर्पो का हार.
जटा मे धारण किये गंगा की धारा.
माथे पर शोभित चाँद का डेरा.

बाजू मे बांधे रुद्राक्ष का माला.
हाथ मे उठाये त्रिशूल का भाला.
करते हो तुम देवा कैलाश पर वास.
पल मे ही करते हो दुष्टो का नाश.

हे नाथ तुम हो शंकर भोला.
जब भी तुमने तीसरा आंख खोला.
राजा इंद्रा का भी सिंघासन डोला.
तीनो लोको मे मच गया हल्ला.

वैसे तो है शिवा तुम्हारी शांत है माया.
पर जब जब भी है तुमको क्रोध आया.
तब किया है तुमने तांडव का नाच.
तीनो लोको मे फैली बर्बादी की आंच.

समुंद्रा मंथन मे विष था निकला,
पिया तुमने वो जेहेर का प्याला.
हलाहल पीकर नीलकंठ केहलाए,
पापी कोई तेरा कोप से बच ना पाये ....
...............................कवि ..राजेश सिंग...12.2.18
 
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on: Feb 12, 2018
ratings: 5

tags: friends
language: hi

किसी के हो कर देखिये
प्यार में खो कर देखिये ।
ख्वाब भी आयेंगे जरूर
बेफिक्र सो कर देखिये ।
गम आंसूओं में बह जाये
थोड़ा सा तो रो कर देखिये।
तन्हाई भी तंग न करेगी
यादों को संजो कर देखिये ।
कभी न टूटेगी माला आप
प्रेम की पिरो कर देखिये ।
ज़ख्म सभी भर जाते हैं
आंसूओं से धो कर देखिये ।
जो अभी तक नही किया
उसको भी तो कर देखिये ।
फूल फल भी लग जाते हैं
कोई बीज बो कर देखिये ।
 
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on: Feb 11, 2018
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language: hi

❤❤ मेरी इस गलती की मुझे है शर्म ❤❤❤

💇💇💇💇💇💇💇

एक औरत गर्भ से थी
पति को जब पता लगा
की कोख में बेटी हैं तो
वो उसका गर्भपात
करवाना चाहते हैं
दुःखी होकर पत्नी अपने
पति से क्या कहती हैं :-

👧👧👧👧👧👧👧👧
🙏सुनो,
ना मारो इस नन्ही कलि को,
वो खूब सारा प्यार हम पर
लुटायेगी,
जितने भी टूटे हैं सपने,
फिर से वो सब सजाएगी..

👼👼👼👼👼👼👼
😒सुनो,
ना मारो इस नन्ही कलि को,
जब जब घर आओगे
तुम्हे खूब हंसाएगी,
तुम प्यार ना करना
बेशक उसको,
वो अपना प्यार लुटाएगी..

👸👸👸👸👸👸👸👸👸
😡सुनो
ना मारो इस नन्ही कलि को,
हर काम की चिंता
एक पल में भगाएगी,
किस्मत को दोष ना दो,
वो अपना घर
आंगन महकाएगी..

💇💇💇💇💇💇💇💇💇💇
😑ये सब सुन पति
अपनी पत्नी को कहता हैं :-

👧👧👧👧👧👧👧
👩सुनो
में भी नही चाहता मारना
इसनन्ही कलि को,
तुम क्या जानो,
प्यार नहीं हैं
क्या मुझको अपनी परी से,
पर डरता हूँ
समाज में हो रही रोज रोज
की दरिंदगी से..

👼👼👼👼👼👼👼😿
😳क्या फिर खुद वो इन सबसे अपनी लाज बचा पाएगी,
क्यूँ ना मारू में इस कलि को,
वो बहार नोची जाएगी..
में प्यार इसे खूब दूंगा,
पर बहार किस किस से
बचाऊंगा,
👸👸👸👸👸👸👸👸
😨जब उठेगी हर तरफ से
नजरें, तो रोक खुद को
ना पाउँगा..
क्या तू अपनी नन्ही परी को,
इस दौर में लाना चाहोगी,

👨👨👨👨👨👨👨👨👨👨
😞जब तड़फेगी वो नजरो के आगे, क्या वो सब सह पाओगी,
क्यों ना मारू में अपनी नन्ही परी को, क्या बीती होगी उनपे,
जिन्हें मिला हैं ऐसा नजराना,
क्या तू भी अपनी परी को
ऐसी मौत दिलाना चाहोगी..

🙅🙅🙅🙅🙅🙅🙅🙅🙅
👼ये सुनकर गर्भ से
आवाज आती है…..ं
सुनो माँ पापा-
मैं आपकी बेटी हूँ
मेरी भी सुनो :-

👧👧👧👧👧👧👧👧
🙆पापा सुनो ना,
साथ देना आप मेरा,
मजबूत बनाना मेरे हौसले को,
घर लक्ष्मी है आपकी बेटी,
वक्त पड़ने पर मैं काली भी बन जाऊँगी

👸👸👸👸👸👸👸👸
💁पापा सुनो,
ना मारो अपनी नन्ही कलि को, तुम उड़ान देना मेरे हर वजूद को,
में भी कल्पना चावला की तरह, ऊँची उड़ान भर जाऊँगी..

👧👧👧👧👧👧👧👧
🙅पापा सुनो,
ना मारो अपनी नन्ही कलि को, आप बन जाना मेरी छत्र छाया,
में झाँसी की रानी की तरह खुद की गैरो से लाज बचाऊँगी…

👼👼👼👼👼👼👼👼👼
😗पति (पिता) ये सुन कर
मौन हो गया और उसने अपने फैसले पर शर्मिंदगी महसूस
करने लगा और कहता हैं
अपनी बेटी से :-

👵👵👵👵👵👵👵👵👵👵
😞मैं अब कैसे तुझसे
नजरे मिलाऊंगा,
चल पड़ा था तेरा गला दबाने,
अब कैसे खुद को तेरेे सामने लाऊंगा,
मुझे माफ़ करना
ऐ मेरी बेटी, तुझे इस दुनियां में
सम्मान से लाऊंगा..

👧👧👧👧👧👧👧👧👧
😣वहशी हैं ये दुनिया
तो क्या हुआ, तुझे मैं दुनिया की सबसे बहादुर बिटिया
बनाऊंगा.

👶👶👶👶👶👶👶👶
👨मेरी इस गलती की
मुझे है शर्म,
घर घर जा के सबका
भ्रम मिटाऊंगा
बेटियां बोझ नहीं होती..
अब सारे समाज में
अलख जगाऊंगा!!!


Save girls save world...
👪👪👪👪👪👪 👪👪
 
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on: Feb 10, 2018
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tags: friends
language: hi

माना की तुम जीते हो ज़माने के लिये,
एक बार जी के तो देखो हमारे लिये,
दिल की क्या औकात आपके सामने,
हम तो जान भी दे देंगे आपको पाने के लिये!
एक ग़ज़ल तेरे लिए ज़रूर लिखूंगा,
बे-हिसाब उस में तेरा कसूर लिखूंगा,
टूट गए बचपन के तेरे सारे खिलौने,
अब दिलों से खेलना तेरा दस्तूर लिखूंगा..
 
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on: Feb 3, 2018
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tags: Poem
language: hi

रंग ए नूर आशियाँन, दिल कहे तो क्या कहे
हुश्न हकीकी लाजवाब, दिल कहे तो क्या कहे
पैगाम ए महोबत ,सुकुन भरे दिल से दोस्ताना
मौन मे छुपा अहेसास ,दिल कहे तो क्या कहे
दुरस्त कर देती नज़र ,राहे वफा सुकुन भरकर
नजरों का छलकता जाम ,दिल कहे तो क्या कहे
बडा गज़ब का है दावेदार , फना की फितरत में
होनहार है दिल ,मालामाल दिल कहे तो क्या कहे
 
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on: Feb 1, 2018
ratings: 1

tags: Poem
language: hi

चैन ओ सुकुन नसीब हो जाये
बीरहाना बादल , छट जाये
बरखा हो आब ए हयात की
दिल का नूराना हाल हो जाये
नैनो में छुपी प्यास गज़ब की है
रेगीस्तानी लिबास में बिरहाना,
पलकें बिछाये इन्तजार ए अलम
दिदार ए यार, सुकुन से हो जाये
मैं तो मिला ही नही , ना बिछडा ,
रुखसत एसी , मनाही हो जाये,
हो गला सीकवा ,लाजीम है यारा
दिल्लगी भी थोडी थोडी की जाये
हुश्न ए आईना ,हाजरा हजूर है
भीतर नूराना, मालामाल हो जाये,
 
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on: Feb 1, 2018
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language: hi

.......आखिर कब तक ..?..............
.१.
यह क्या हो रहा है देश के अंदर
यह लोग है की खुदते बन्दर ..?
आपस में लड़ते रहेंगे आखिर कब तक
एक झंडा वंदन भी शांति से नहीं होता .............शरू ३.१५
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
आज देश की हालात पर खून के आँसू है रो रहा ।
देशभक्तो ने बलिदान देकर इस देश को था सवारा ॥
कभी आपसी सदभाव का मिसाल था ये देश हमारा ।
अब ख़त्म हो गया है आपस में ही लोगों में भाईचारा ॥
...............................................................राजेश ॥..३.२०
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
२.
यही मै पूछ रही हूँ अवाम से
यह जो हो रहा है, क्यों हो रहा है ..?
क्या लोग भूलगये अंग्रेजोंके अन्याय ..?
या भूलगये मुग़लों की क्रूर शासन ...?.............शरू ..३.२५
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
शायद भूल ही गयें हैं लोग उस वक्त की बरबादी ।
कद्र ही नहीं कर पाए हम जो बेशकीमती आजादी ॥
बन कर रहा गया है ये धरती इंसानियत का मकबरा ।
दरअसल में चंद लोगों का ही है ये सब किया धरा ॥
...............................................................राजेश ॥३.३३
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भारत माँ का बेटे है सब ,सब ने कहा
मिलके रहो तो सब के लिए अच्छा
नहीं तो फिर से बात जाएंगे टुकड़ों में
दर्द भरी गुलामी की ज़ंज़ीरे पहने पड़ेंगे .............शरू ..३.३९
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
कद्र करो हर धर्म का कहना है यही इस दीवाने का ।
देश बढ़ रहा है आगे स्वागत करो इस नए ज़माने का ॥
खतरा मंडरा रहा है देश का टुकडों में बँट जाने का
फ़िर शायद तुमको मौका भी न मिलेगा पछताने का ॥
.................................................................राजेश ॥ ३.४९
 
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on: Jan 31, 2018
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tags: 💐
language: hi

कौन समझाए उन्हें इतनी जलन ठीक नहीं,,
जो ये कहते हैं मेरा चाल-चलन ठीक नहीं..!!

झूठ को सच में बदलना भी हुनर है लेकिन,,
अपने ऐबों को छुपाने का ये फन ठीक नहीं..!!

उनकी नीयत में ख़लल है तो घर से ना निकलें,,
तेज़ बारिश में ये मिट्टी का बदन ठीक नहीं..!!

शौक़ से छोड़ के जाएँ ये चमन वो पंछी,,
जिनको लगता है ये अपना वतन ठीक नहीं..!!

हर गली चुप सी रहे, और रहें सन्नाटे,,
मेरे इस मुल्क में ऐसा भी अमन ठीक नहीं..!!

जो लिबासों को बदलने का शौक़ रखते थे,,
आखरी वक़्त ना कह पाए क़फ़न ठीक नहीं.
 
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on: Jan 31, 2018
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tags: Poem
language: hi

उसुल परस्त, बूतखाने की इस महेफिल में
बेउसुल अफसाने, सुनाने आया हुं जरुर मैं

मगर ,वोह जिस्मो जाँ से परे अहेसास कहाँ
मैं तो मुर्दे की बस्ती में ,जिंदा लाश जरुर मैं
 
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on: Jan 27, 2018
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tags: Poem
language: hi

मिलता है आसमान ओर धरती जहांं पर,
क्षितिज़ पर , लकीर बनकर खडा हुं मैं
फुल में खुश्बु बनकर, महकता अहेसास,
शबनमी भीगा, जजबात बनकर खडा हुं मैं
टुटकर बिखरता हुं , पत्ते की सरसराहट में
पतझड का अलम , बीरहाना अहेसास हुं मैं
रंज ओ अलम ,सीकवा सीकायत अपनो से,
दिल्लगी दोस्ताना दिल में ही , अहेसास हुं मैं
जिंदादिली है ,साँस की रफतार जिंदगी मेरी,
मौत महेबुबा मेरी साथ, वोह अहेसास हुं मैं



















 
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on: Jan 26, 2018
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tags: Poem
language: hi



हमने ना बनाइ है , रिस्तों की सरहदे जिंदगी में कभी
ओर गुजर गए बेनाम , महेफुस रहते अहेसास दिल मे,

क्युं टुटकर चाहा पतंगे ने , फितरत में अपनी कुरबानी
वोह जलते रहे ,जलाते रहे, शम्मा एदिल अहेसास दिल मे

बदसुरत है शायद अंदाज़ ए महोबत, फकत लफ्ज़ में ही
या हयाति ही नही ,जजबात उभरते हुए अहेसास दिल में

खैर ,अपनी ओकात नही, जीस्मी जहाँ की हकीकत मे,
हक़ से खेलती हकीकी में ,हर हाल वो अहेसास दिल में
 
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on: Jan 23, 2018
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tags: Poem
language: hi

महोबत करने की ,अद्ए बेमिशाल है
हुश्न हकीकी, तेरा होना बेमिशाल है

पाया भी क्या खोकर खुद को जिंदगी
खोया जो उनका , पाया बेमिशाल है

बहुत सब्र से ,काटी है बिरहाना जिंदगी
मौज़ ए मिलन मुस्कराहट बेमिशाल है

आदत है जीने की , जीस्म जाँ में दुनिया
रुहानियत मे रुह का होना बेमिशाल है

गज़ब है , सुकुन ओर शोहरत ए ईनाम
नाम तेरा , ईबादत ए हुश्न बेमिशाल है
 
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on: Jan 23, 2018
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tags: friends
language: hi

आँखों पर परदे पड़े हैं कुछ नज़र आता नहीं
है अभी भी बुतपरस्ती का असर,जाता नहीं

लोग चलते जा रहे हैं मंज़िलों की आस मैं
गाँव भी छूटा, मगर कोई शहर आता नहीं

हर गली चौराहों को करते रहे रोशन मगर
राह ये कैसी चुनी है अपना घर आता नहीं

ताज पाकर आसमां में रोज़ जो उड़ता रहा
एक दिन गिरना है तय ये कोई समझाता नहीं

कब तलक जीये हकीकत से कोई मुंह मोड़कर
हमको ग़म में मुस्कुराने का हुनर आता नहीं
 
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on: Jan 19, 2018
ratings: 11

tags: friends
language: hi

मेरी ज़िन्दगी को एक तमाशा बना दिया उसने,
भरी महफ़िल में तन्हा बैठा दिया उसने,
.
ऐसी क्या थी नफरत उसको इस मासूम दिल से,
खुशियां चुरा कर गम थमा दिया उसने,
.
बहुत नाज़ था उसकी वफ़ा पे कभी हमको,
मुझको ही मेरी नज़रों में गिरा दिया उसने,

खुद बेवफा थी मेरी वफ़ा की क्या कद्र करता,
अनमोल था मैं ख़ाक में मिला दिया उसने,
.
किसी को याद करना तो उसकी फितरत में शामिल नहीं,
हवा का झोंका समझ कर भुला दिया उसने...
 
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on: Jan 18, 2018
ratings: 4

tags: Poem
language: hi

युंही गैर बनकर, तेरा रुखसत होना
मुनासीब तो नही, महोबत मे यारा

टुटकर गीरा हुं जमींन पर , ओ चाँद,
तेरी चाँदनी से दुर हुं , महोबत में यारा

बडे खोखले है रिस्ते , कच्चे धागों के,
जजबात मे डुबा हुं ,,महोबत मे यारा

सितमगर तो नही, मेरा करम नेक सदा
चाहत की रंगींनीयों में, महोबत मे यारा

दुरस्त कर राहे वफा ,मंजिल तक मेरी
सीसकियाँ लेती रुह मेरी महोबत मे यारा
 
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on: Jan 15, 2018
ratings: 19

language: hi

तुझे जैसे चलना है वैसे चल जिंदगी..
मैने तो तुझसे सब उम्मीदें छोड दी...

यूँ तो कोई शिकायत नहीं मुझे मेरे आज से,
मगर कभी-कभी बीता हुआ कल बहुत याद हैं । ।

भले ही कितने भी तुमसे नाराज रहे
पर तुमसे दुर होने का खयाल आज भी नहीं आता.
 
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on: Jan 8, 2018
ratings: 9

tags: Neel
language: hi

बचपन की यादे !!!!
1990 का दूरदर्शन और हम -
1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर टीवी के सामने बैठ जाना
2."रंगोली"में शुरू में पुराने फिर नए गानों का इंतज़ार करना
3."जंगल-बुक"देखने के लिए जिन दोस्तों के पास टीवी नहीं था उनका घर पर आना
4."चंद्रकांता"की कास्टिंग से ले कर अंत तक देखना
5.हर बार सस्पेंस बना कर छोड़ना चंद्रकांता में और हमारा अगले हफ्ते तक सोचना
6.शनिवार और रविवार की शाम को फिल्मों का इंतजार करना
7.किसी नेता के मरने पर कोई सीरियल ना आए तो उस नेता को और गालियाँ देना
8.सचिन के आउट होते ही टीवी बंद कर के खुद बैट-बॉल ले कर खेलने निकल जाना
9."मूक-बधिर"समाचार में टीवी एंकर के इशारों की नक़ल करना
10.कभी हवा से ऐन्टेना घूम जाये तो छत पर जा कर ठीक करना
बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं आता,
दोस्त पर अब वो प्यार नहीं आता।
जब वो कहता था तो निकल पड़ते थे बिना घडी देखे,
अब घडी में वो समय वो वार नहीं आता।
बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं आता...।।।
वो साईकिल अब भी मुझे बहुत याद आती है, जिसपे मैं उसके पीछे बैठ कर खुश हो जाया करता था। अब कार में भी वो आराम नहीं आता...।।।
जीवन की राहों में कुछ ऐसी उलझी है गुथियाँ, उसके घर के सामने से गुजर कर भी मिलना नहीं हो पाता...।।।
वो 'मोगली' वो 'अंकल Scrooz', 'ये जो है जिंदगी' 'सुरभि' 'रंगोली' और 'चित्रहार' अब नहीं आता...।।।
रामायण, महाभारत, चाणक्य का वो चाव अब नहीं आता, बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं आता...।।।
वो एक रुपये किराए की साईकिल लेके,
दोस्तों के साथ गलियों में रेस लगाना!
अब हर वार 'सोमवार' है
काम, ऑफिस, बॉस, बीवी, बच्चे;
बस ये जिंदगी है। दोस्त से दिल की बात का इज़हार नहीं हो पाता।
बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं आता...।।
 
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on: Jan 7, 2018
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language: hi

Very beautifully written by Gulzar, the man who dedicates his book to
'Rakhi-the longest short story of my life' with grace

लोग सच कहते हैं -
औरतें बेहद अजीब होतीं है

रात भर पूरा सोती नहीं
थोड़ा थोड़ा जागती रहतीं है
नींद की स्याही में
उंगलियां डुबो कर
दिन की बही लिखतीं
टटोलती रहतीं है
दरवाजों की कुंडियाॅ
बच्चों की चादर
पति का मन..
और जब जागती हैं सुबह
तो पूरा नहीं जागती
नींद में ही भागतीं है

सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं

हवा की तरह घूमतीं, कभी घर में, कभी बाहर...
टिफिन में रोज़ नयी रखतीं कविताएँ
गमलों में रोज बो देती आशाऐं

पुराने अजीब से गाने गुनगुनातीं
और चल देतीं फिर
एक नये दिन के मुकाबिल
पहन कर फिर वही सीमायें
खुद से दूर हो कर भी
सब के करीब होतीं हैं

औरतें सच में, बेहद अजीब होतीं हैं

कभी कोई ख्वाब पूरा नहीं देखतीं
बीच में ही छोड़ कर देखने लगतीं हैं
चुल्हे पे चढ़ा दूध...

कभी कोई काम पूरा नहीं करतीं
बीच में ही छोड़ कर ढूँढने लगतीं हैं
बच्चों के मोजे, पेन्सिल, किताब
बचपन में खोई गुडिया,
जवानी में खोए पलाश,

मायके में छूट गयी स्टापू की गोटी,
छिपन-छिपाई के ठिकाने
वो छोटी बहन छिप के कहीं रोती...

सहेलियों से लिए-दिये..
या चुकाए गए हिसाब
बच्चों के मोजे, पेन्सिल किताब

खोलती बंद करती खिड़कियाँ
क्या कर रही हो?
सो गयी क्या ?
खाती रहती झिङकियाँ

न शौक से जीती है ,
न ठीक से मरती है
कोई काम ढ़ंग से नहीं करती है

सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।

कितनी बार देखी है...
मेकअप लगाये,
चेहरे के नील छिपाए
वो कांस्टेबल लडकी,
वो ब्यूटीशियन,
वो भाभी, वो दीदी...

चप्पल के टूटे स्ट्रैप को
साड़ी के फाल से छिपाती
वो अनुशासन प्रिय टीचर
और कभी दिख ही जाती है
कॉरीडोर में, जल्दी जल्दी चलती,
नाखूनों से सूखा आटा झाडते,

सुबह जल्दी में नहाई
अस्पताल मे आई वो लेडी डॉक्टर
दिन अक्सर गुजरता है शहादत में
रात फिर से सलीब होती है...

सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं

सूखे मौसम में बारिशों को
याद कर के रोतीं हैं
उम्र भर हथेलियों में
तितलियां संजोतीं हैं

और जब एक दिन
बूंदें सचमुच बरस जातीं हैं
हवाएँ सचमुच गुनगुनाती हैं
फिजाएं सचमुच खिलखिलातीं हैं

तो ये सूखे कपड़ों, अचार, पापड़
बच्चों और सारी दुनिया को
भीगने से बचाने को दौड़ जातीं हैं...

सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।

खुशी के एक आश्वासन पर
पूरा पूरा जीवन काट देतीं है
अनगिनत खाईयों को
अनगिनत पुलो से पाट देतीं है.

सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।

ऐसा कोई करता है क्या?
रस्मों के पहाड़ों, जंगलों में
नदी की तरह बहती...
कोंपल की तरह फूटती...

जिन्दगी की आँख से
दिन रात इस तरह
और कोई झरता है क्या?
ऐसा कोई करता है क्या?

सच मे, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं..

(हर महिला को सादर समर्पित)
🌺🌺🌺🌺🌺🌺

Beautifully written by Gulzar...!!
 
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on: Jan 7, 2018
ratings: 2

tags: friends
language: hi

होठों से लगाकर पीना, बात कुछ पुरानी हो गई
आँखों से पिला कर देख, आज रुत मस्तानी हो गई...

वो पीते है शराब महफिल-ऐ-यार जमा कर
हमने चोरी से पिया एक जाम तो बेइमानी हो गई...

युं तो करते हैं वो हरदम कुछ नई शरारत
हम जो एक बार उनसे रूठे तो नादानी हो गई...

वो करते है इज़हार-ए-प्यार इस कदर जहाँ में
हमे पता भी न चला और एक कहानी हो गई...

उन के खयालो से महकता है हर-रोज़ यह समां,
पास आने से आज उनके “ग़ज़ल” रूमानी हो गई...
 
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