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on: Dec 25, 2019
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tags: My Diary...
language: hi

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..

हैं फ़ूल रोकते, काटें मुझे चलाते..
मरुस्थल, पहाड चलने की चाह बढाते..
सच कहता हूं जब मुश्किलें ना होती हैं..
मेरे पग तब चलने मे भी शर्माते..
मेरे संग चलने लगें हवायें जिससे..
तुम पथ के कण-कण को तूफ़ान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..

अंगार अधर पे धर मैं मुस्काया हूं..
मैं मर्घट से ज़िन्दगी बुला के लाया हूं..
हूं आंख-मिचौनी खेल चला किस्मत से..
सौ बार म्रत्यु के गले चूम आया हूं..
है नहीं स्वीकार दया अपनी भी..
तुम मत मुझपर कोई एह्सान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..

शर्म के जल से राह सदा सिंचती है..
गती की मशाल आंधी मैं ही हंसती है..
शोलो से ही श्रिंगार पथिक का होता है..
मंजिल की मांग लहू से ही सजती है..
पग में गती आती है, छाले छिलने से..
तुम पग-पग पर जलती चट्टान धरो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..

फूलों से जग आसान नहीं होता है..
रुकने से पग गतीवान नहीं होता है..
अवरोध नहीं तो संभव नहीं प्रगती भी..
है नाश जहां निर्मम वहीं होता है..
मैं बसा सुकून नव-स्वर्ग “धरा” पर जिससे..
तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..

मैं पन्थी तूफ़ानों मे राह बनाता..
मेरा दुनिया से केवल इतना नाता..
वेह मुझे रोकती है अवरोध बिछाकर..
मैं ठोकर उसे लगाकर बढ्ता जाता..
मैं ठुकरा सकूं तुम्हें भी हंसकर जिससे..
तुम मेरा मन-मानस पाशाण करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..
 
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by: Saloni
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on: Dec 25, 2019
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language: hi

काश तुम्हे पढ़ कर समझ सकती
तुम उस किताब की तरह हो
तुम से मिलकर सारा हिसाब ले सकती
मालूम तो चले तुम कौन सी हो हस्ती
फिर भी पूरी किताब बड़े शिद्दत से पढ़ती
और खो जाती
तुम्हारे हर अल्फ़ाज़ है गहरे
कौन से रहस्य से भरे
मेरे समझ से परे
 
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on: Dec 22, 2019
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tags: Sharuu
language: hi

·

..........हमारी घर ......
छोटा सा एक
घर होगा हमारी
नदी किनारे ...........
खेत से जब तुम
घर आवोगे
तब तक मै
बैठ के बाते करुँगी
मछलियों से ..............
और ठंडक पहुंचाती हुई
हवावों से ........
सुबह होते ही
तुम निकलोगे ,
काम करने ..
मै तो
लगजावूँगी सुबह की
नाश्ता करने .........
बच्चों को
स्कूल भी तो है भेजने ..............by शरू...
 
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on: Dec 21, 2019
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tags: Ro!
language: hi

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो
मुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो

वो फ़िराक़ हो या विसाल हो, तेरी याद महकेगी एक दिन
वो ग़ुलाब बन के खिलेगा क्या, जो चिराग़ बन के जला न हो

कभी धूप दे, कभी बदलियाँ, दिलो-जाँ से दोनों क़ुबूल हैं
मगर उस नगर में न क़ैद कर, जहाँ ज़िन्दगी का हवा न हो

वो हज़ारों बाग़ों का बाग़ हो, तेरी बरक़तों की बहार से
जहाँ कोई शाख़ हरी न हो, जहाँ कोई फूल खिला न हो

तेरे इख़्तियार में क्या नहीं, मुझे इस तरह से नवाज़ दे
यूँ दुआयें मेरी क़ुबूल हों, मेरे दिल में कोई दुआ न हो

कभी हम भी जिस के क़रीब थे, दिलो-जाँ से बढ़कर अज़ीज़ थे
मगर आज ऐसे मिला है वो, कभी पहले जैसे मिला न हो
 
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on: Dec 21, 2019
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language: hi

लिपटा लो बांहो में मुझे कुछ इस तरह कि,
अगर मौत आए तो मुसकुराहट को पता न चलें और
रुह को बाहों की कैद से निकलने का मन ना करे |
 
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on: Dec 3, 2019
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language: hi

दिल को दिल से मिल जाने दें
दिल मे' दर्द न रह पायेगा,
प्यार-वफा जब साथ रहेंगे
जीवन सुखमय हो जायेगा।
 
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on: Dec 1, 2019
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language: hi

..................तस्वीर तुम्हारी .............
1
आँख के पानी को कही भर के रखना
मुश्किल के गड़ी में उसे वापरना
कौन जाने अब कब बारिश का आना
तुम याद करके मुझे कभी न रोना ... .....................BY शरू

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न जाने कैसे आँखे अपने आप भर आती है ,
बारिश हो न हो ये तो है हमारी तक़दीर ,
हर आंसू को रखेंगे बहुत संभल कर
कियुकी उसमे है तुम्हारी सुन्दर तस्वीर .......................By.राज

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2
मगर हम बदल भी तो नहीं सकते तक़दीर
भोगना तो है जो दिखते हैं हाथ के लकीर
आंसू के साथ आप का देखा करेंगे तस्वीर
क्या करे जो पागल मन को समझा सके आखिर ......?.....by.. शरू

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अक्सर तेरी यादो के झरोखे में मे झूल जाता हूँ ,
तेरी याद में मैं साडी दुनिया को भूल जाता हूँ ,
तेरी यादो में रोना मेरी taqdir है तो मुझे है मंजूर ,
यादो के साथ मेरे दिल में बसी हो चाहे मुझसे हो दूर . ......By..राज

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3
ताकत बना लो हमारी यादों को तुम
कमज़ोर बन के कभी आंसू न बहवो
मर्दों की भाति पीजावो आन्सुवों को .
आन्सुवों से बहुत धान्य पैदा करो ................................BY शरू

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तेरी यादें मेरी कमजोरी नहीं है यार ,
यह आंसू ही है मेरे असली हथियार ,
अस्त्र शास्त्र का भला मुझे क्या काम ,
हमने तो सीखा है करना सिर्फ प्यार . ...........................By, राज
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on: Nov 30, 2019
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language: hi

फासला उम्र का बड़ा है, दिल फिर भी जिद पे अड़ा है ....
सोच ले अब रहनुमा मेरे, तू किस मोड़ पे खड़ा है ....

मंजिलें शायद एक ही हों, पर रास्ते तो अलग-अलग हैं....
रौशनी की है जरूरत तुझे, इधर अमावस का चाँद पड़ा है....
 
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on: Nov 24, 2019
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language: hi

..........धन -दौलत भी ज़रूरी..............
1
पैदल चल पड़ा मैं तुझसे मिलने को .
होके दुनियादारी और अपनों से दूर .
एक तो मुम्बई है राजस्थान से बहुत दूर .
पर तुझसे मिलने को इस दिल किया मुझे मजबूर .......BY राज .7.45 PM

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इतना भी क्या था मज़बूरी यार ..?
राजस्थान की लडकियां होती हैं बहुत सुन्दर ,
इसके लिए मुंबई तक आने की क्या थी जरुरत ..?
मुंबई की मराठी लड़की होती है बहुत थीका .. ( like chilli )...by शरू 7.54 पं

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2.
न ही सुन्दर लड़की चाहिए न ही थीका की दरकार .
तुम्हारी सौंदर्य बसी है दिल में , हुआ है प्यार .
तपते रेगिस्तान से पैदल बिन हाथी और घोडा .
तेरे लिए मैं o जनम , चला आया भागा दौड़ा . ...By....राज ..8.16 PM

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मगर हमें तो घोड़े में बैठ कर ,
आनेवाले ले के हाथ में तलवार
राजकुँवर की बचपन से ,थी इंतज़ार ,
हम बिलकुल नहीं पैदल चलनेवाले ,
मंगावो ऊंट , हाथी और घोड़े ............. ...............by शरू 8. 26 PM

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3
दिल का राजा हूँ मैं , जहां करता हूँ मैं हुकूमत .
क्या तुम्हारे दिल में सच्चे प्यार की नहीं कोई कीमत ?.
कामिनी , हक़ीक़त तो यह है की दौलत से हूँ मैं गरीब .
दिल से करता हूँ प्यार और रहता हूँ दिल के क़रीब . By...... राज 8.38 PM

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अच्छा ,आप हो सिर्फ नाम के राजकुमार ,
और कुछ नहीं आप के पास , आप हो फ़क़ीर ,
क्या पेट भरेगा इज्जत से आप का यह नायाब प्यार ..?
धन -दौलत भी जीने के लिए होती है बहुत ज़रूरी ,.......BY शरू 8.45 pm
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on: Nov 22, 2019
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language: hi

इतना भी मत तड़पाओ किसी को, कि जान चली जाये....
प्यार हो गया खुदा से अगर, तो फिर किसे तड़पाओगे....

सूख जायेगें आंसू ऑखों में, अपने सितम पे पछताओगे ....
तड़पाने की चाह है जिसको, उसी की चाह में तड़प जाओगे....
 
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on: Nov 20, 2019
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language: hi


तड़प के देखो किसी की चाहत में, !!
तो पता चले कि इंतजार क्या होता है,!!!!

यूं ही मिल जाए अगर कोई बिना तड़पे, !!
तो कैसे पता चले कि..प्यार क्या होता है,!!!!
 
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on: Nov 17, 2019
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tags: My Diary
language: hi

मेरी नज़रों ने वायदा किया है मेरी रूह से
कि सनम तेरे सिवा कुछ ना देखेंगी
तू ये जानता है ना कि मेरी रूह तू है?

मैं शायद खुदा की बनायी पहली और अकेली औरत हूँ
जो अपने जिस्म के टुकड़े से ज्यादा प्यार अपने आदमी से करती है
क्योंकि जिस्म के सब टुकड़े भी तो तूने दिए हैं
क्योंकि मेरी जिन्दगी की ये पवित्र खुशी भी तो तूने दी है
क्योंकि इस मन को बेइंतहा सहारा भी तो तूने दिया है
क्योंकि मुझ नाचीज़ को आसमान पर उड़ना भी तो तूने सिखाया है.

तू इतना जान ले हमदम की तेरे बिना मैं कुछ भी नहीं
कि मेरी ख़ुशी मेरी जिन्दगी तू है
कि तेरे बिना जिन्दगी जिन्दगी ही नहीं
मेरी रूह ने वादा किया है मेरे खुदा से कि सनम
अगर तुझसे हुई जुदा तो तड़प के मर जायेगी
रूहों का सफ़र कभी फनां नहीं होता, पर
मेरी रूह तेरे बिना ना जी पायेगी...

बहुत डरती हूँ की कभी इस हालत पर ना पहुंचूँ कि
तुझसे चाहूँ तो बात ना कर सकूँ.
चाहूँ तो तुझे देख ना सकूँ.
तेरी पुरसुकूँन आवाज का मीठा अमृत अपने दिलो दिमाग में
ना महसूस कर सकूँ.
ऐसा तो हो नहीं सकता, सिवाय तब की जब
तू मुझसे जुदा हो गया हो और मौत के अंधेरों में खो गया हो
क्योंकि ये तो हो नहीं सकता कि जीते जी तू मुझसे रूठ गया हो.

मेरे होते तू मर नहीं सकता
क्योंकि मेरी जिन्दगी तू है, गर मै हूँ जिन्दा
तो फिर तू भी यहीं कहीं है.

मेरी हंसी खुशी सब तू ही है
मेरी जान...मै जीना चाहती हूँ, हँसना चाहती हूँ
क्या मेरी खातिर रहेगा तू हमेशाँ जिन्दा?
क्या मेरी खातिर रहेगा तू हमेशाँ मेरा दिलबर?
क्या मेरी खातिर रहेगा यही तेरे ख्यालों का असर?

दिल चाहता है कि खुदा से और तुझसे एक वादा ले लूं..
कि देखेंगी मेरी आँखें तुझे ही
जब तक मेरी आँखों में देखने की हिम्मत है
कि सुनूँगी तेरी आवाज़ जब तक जिंदा हूँ
कि तेरी गैर मौजूदगी का एहसास ना हो
कि कभी मजबूर ना होऊँ तेरी दूरी से
कि सोऊँ जब चिरनिद्रा में तो
रूह में, आँखों में समा कर तुझे...
कि जाऊं मैं तुझे छोड़ कर, ना कि तू मुझे.
तुझसे जुदा मैं कभी हो नहीं सकती, बस
मेरी मौत है तेरी दूरी मेरे लिये..

तू ना होगा तो किस को इस पागलपन से चाहूंगी?
तू ना होगा तो किस से इस पागलपन से लडूंगी?
तू ना होगा तो किस से इस पागलपन से प्यार कर सकूंगी?
तू ना होगा तो कौन दिखायेगा मुझे इस धरती पर स्वर्ग?
तू ना हो तो कौन मुझे पलकों पर बिठाएगा?
तू ना होगा तो कौन मुझे जिन्दा रखेगा?

तू रह जिन्दा सनम ताकि मैं जी सकूँ
तू रह शादाब ताकि मैं हंस सकूँ
तू रह ताकि मेरी आस पास तेरे वजूद की खुशबू रहे
तू रह इस दुनिया में ताकि ये दुनिया रहने के काबिल रहे
तू चल ताकि तेरे साए की छावं में, मैं शांती से सफ़र कर सकूँ
तू रह आबाद ताकि मैं बस सकूँ
बस तू ही तू है, इस जिन्दगी में, रूह में, सफ़र में,
तू रह मेरी आस पास ताकि मैं हँसते हँसते मर सकूँ.

बहुत खुश हूँ मैं कि जिन्दगी ने मुझे अधूरा नहीं लौटाया
एहसान है तेरा की मुझे प्यार में जीना आया
कद्रदान हूँ तेरी कि अपनी कोख में तुझे समाया
शुक्रगुज़ार हूँ तेरी कि खुदा की जांनिब तुझे पाया
दौलतवार हूँ कि तेरी छाहँ का आशियाँ पाया.

मेरे प्यारे, परम पिता के बनाये आदमी, तू इतना प्यारा क्यों है?
तू इतना दिल को समझने वाला हमसाया क्यों है?
तेरे जनमदाता में जरूर कुछ होगा कि तू एक चीज़ है
कभी सोचती हूँ... उस वृक्ष को भी चाहती हूँ मैं जिसका तू बीज है.

 
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on: Nov 17, 2019
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tags: My Diary
language: hi

प्यार किसी को करना लेकिन
कह कर उसे बताना क्या
अपने को अर्पण करना पर
और को अपनाना क्या

गुण का ग्राहक बनना लेकिन
गा कर उसे सुनाना क्या
मन के कल्पित भावों से
औरों को भ्रम में लाना क्या

ले लेना सुगंध सुमनों की
तोड उन्हे मुरझाना क्या
प्रेम हार पहनाना लेकिन
प्रेम पाश फैलाना क्या

त्याग अंक में पले प्रेम शिशु
उनमें स्वार्थ बताना क्या
दे कर हृदय हृदय पाने की
आशा व्यर्थ लगाना क्या
 
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on: Nov 14, 2019
ratings: 2

language: hi

Ek bachpan ka zamana tha,
jisme khushiyon ka kakhazana tha!!

Chahat chand ko paane ki thi,
par dil titli ka deewana tha!!

Khabar na thi kuch subah ki,
na shaam ka thikana tha!!

Thak haarke aana school se,
par khelne bhi jaana tha!!

Maa ki kahani thi, pariyon ka fasana tha;
barish mein kagaz ki naav thi!!

Har mausam suhana tha.
Har khel mein saathi the,
Har rishta nibhana tha!!

Gum ki zuban na hoti thi,
Na zakhmon ka paimana tha.

Rone ki wajah na thi,
Na hansne ka bahana tha;
kyon ho gaye hum itne bade,
isse achha to woh bachpan ka zamana tha !!!!
 
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on: Nov 13, 2019
ratings: 4

tags: My Diary
language: hi


है एक दोस्त जो रखता है ख़बर मेरी…..

ख़ामोश पढ़ता है वो हाल मेरा

दबे पाँव आता है फिर लौट जाता है

न अश्क़ों को मेरे देता है अब वो काँधा

न लबों पे मेरी मुसकान बुलाता है

मेरे नाम को आवाज़ नहीं देता है वो

न अब मरहम मेरे ज़ख़्मों पे लगाता है

है शायद बहुत नाराज़ वो मुझसे

रूठ गयें हैं लफ़्ज़ भी जो मनाते उसे

खामोश लिखती हूँ मैं हाल अपना

है एक दोस्त जो रखता है अब भी ख़बर मेरी……..
 
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on: Nov 12, 2019
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tags: My Diary
language: hi

कहां आंसुओं की ये सौग़ात होगी
नए लोग होंगे नई बात होगी

मैं हर हाल में मुस्कुराता रहूंगा
तुम्हारी मोहब्बत अगर साथ होगी

चराग़ों को आंखों में महफ़ूज़ रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी

परेशां हो तुम भी परेशां हूं मैं भी
चलो मय-कदे में वहीं बात होगी

चराग़ों की लौ से सितारों की ज़ौ तक
तुम्हें मैं मिलूंगा जहां रात होगी

जहां वादियों में नए फूल आए
हमारी तुम्हारी मुलाक़ात होगी

सदाओं को अल्फ़ाज़ मिलने न पाएं
न बादल घिरेंगे न बरसात होगी

मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी
किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
 
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by: Saloni
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on: Nov 11, 2019
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language: hi

ज्ञान के सागर हो तुम
सब के पालन हार हो तुम
कुछ नहीं तुम्हारे बिना
लेते है तुम्हारा नाम प्रतिदिन
ज्ञान के आधार हो तुम
हो तुम मेरे कर्ताधार
कर देते हो सबका सुधार
हाथ जोड़े खड़े है तुम्हारे
सब कुछ हो तुम हमारे
सबको गुरुपर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
सलोनी
 
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by: Saloni
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on: Nov 11, 2019
ratings: 1

language: hi

हाँ एक पल आया ,
मायूसी सी भरी हुई थी मेरी ज़िन्दगी।

न जीने की इच्छा दिल में,
न कुछ करने की ख्वाइश ।

न अपनों का साथ ,
न कोई पहचान।

हाँ एक पल आया ,
आज ज़िन्दगी खूबसूरत लगने लगी,

दिल में तमन्ना जग गयी,

कुछ अछा करने की इच्छा जग गयी,

कुछ अच्छा लिखने की आग ,
दिल में जग गयी।

अब अपनों का साथ ,

और ,

मेरी पहचान।

सलोनी
🌼🌼🌼
🌸🌸🌸
🌷🌷🌷
 
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on: Nov 11, 2019
ratings: 2

language: hi

*हो सके तो मुस्कुराहट बांटिये*
*रिश्तों में कुछ सरसराहट बांटिये।*

*नीरस सी हो चली है ज़िन्दगी बहुत,*
*थोड़ी सी इसमें शरारत बांटिये।*

*सब यूँ ही भाग रहे हैं दौलत के पीछे,*
*अब सुकून की कोई इबादत बांटिये।*

*ज़िन्दगी यूँ ही न बीत जाये परेशानियों में,*
*गीले शिकवों को कुछ तो राहत बांटिये!*
 
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on: Nov 7, 2019
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tags: My Diary
language: hi

कोई सब कहे, कोई चुप रहे,
तो कोई छाँव, कोई धूप सहे,
कोई रहे न रहे,
क्या फर्क पड़ता है?

कोई खुद रोए, फिर भी हँसाए,
कोई हँसते-हँसते रो जाए,
चाहे वो रहे या खो जाए,
क्या फर्क पड़ता है?

कोई ख्वाब दिखाए, कोई लोरी गाए,
तो कोई गहरी नींद से जगाए,
कोई पास बुलाए, दूर भगाए,
क्या फर्क पड़ता है?

कोई प्यारा अपना बन जाए,
तो कोई हकीकत बस सपना बन जाए,
कोई कितना भी अपनापन दिखाए,
क्या फर्क पड़ता है?

कोई चाहे कितना भी अलग हो,
कोई समझ ही न पाए,
अगर आंटे के साथ घुन भी पीस जाए,
क्या फर्क पड़ता है?

दिए बुझ रहे हों हर पल के साथ,
बीत रहा हो आज, और कोई जिए कल के साथ,
फिर वो कल बीता हुआ हो, या आने वाला,
क्या फर्क पड़ता है?

मैं खुद ही ये न समझूँ,
बस यूँ ही कहता रहूँ,
कि, “क्या फर्क पड़ता है,
तो क्या फर्क पड़ता है?-
 
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