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on: Jan 4, 2018
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language: hi

Na tujhe chod sakte hai, tere ho bhi nahi sakte,,
Ye kaysi bebasi hai, Aaj hum ro bhi nahi sakte,,
.....Ye kaysa dard hai pal-pal hume tadpaye rakhta hai,,
.....Tumhari yaad aati hai to fir so bhi nahi sakte,,
Chupa sakte hai aur Na dikha sakte hai logo ko,,
Kuch aysa dag hai Dil per jo hum dho bhi nahi sakte,,
.....Kaha to tha chod denge ya nagar fir ruk gaye lakin,,
.....Tumhe paa to nahi sakte magar kho bhi nahi sakte,,
Humara ek hona bhi nahi mumkin raha ab to,,
Jiye kayse ke tum se door rah bhi nahi sakte,,
 
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on: Jan 3, 2018
ratings: 11

tags: friends
language: hi

कुछ हाथ से उसके फिसल गया,
वो पलक झपक कर निकल गया,
फिर लाश बिछ गयी लाखो की,
सब पलक झपक कर बदल गया,
.
जब रिश्ते राख में बदल गए,
इंसानो का दिल दहल गया,
मैं पूछ-पूछ कर हार गया,
क्यों मेरा भारत बदल गया...
 
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on: Jan 3, 2018
ratings: 6

tags: friends
language: hi

मुद्दत के बाद देखा उसे तो बदली हुई थी वो,
ना जाने क्या हादसा हुआ, सहमी हुई थी वो,
मुझे देख कर उसने चेहरा तो छुपा लिया,
मगर आंखे बता रही थी कि रोयी हुई थी वो,
.
उसकी आंखो में देख कर महसूस हुआ मुझे,
मेरी तरह किसी सोच में डूबी हुई थी वो,
कुर्बान हो जाऊ उस शक्स कि किस्मत पे,
याद में जिसकी खोयी हुई थी वो...
 
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on: Jan 1, 2018
ratings: 3

tags: hindi poem
language: hi

Mere sanso ke kharidar ,mujh par ehsan kar de ,,
Apne Dil ki kuch jamen, mere naam kar de,,
*****Toot kar bikharna chahta hoon mai banho me teri,,
*****Apni chahat ke ghere mujhpe qurban kar de,,
Mere jahan me tu kuch is kadar havi huyi ke,,
Umra bhar ke liye tu mujhe apna gulam kar de,,
*****Qaid ho gaya hoon khud ki hi tanhaiyo me mai,,
*****Mujhe aazad kar de mera ye bhi kaam kar de,,
Mere sabhi khoabo ko haqikat se saja de tu,,
Mere naam pe apni zindagi tamam kar de,,
*****Mere dil ka her kona khali hai tere liye,,
*****Kahi bhi thahar ke roshan ye jnha kar de,,
 
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on: Dec 29, 2017
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tags: friends
language: hi

कैसी थी वो रात कुछ कह सकता नहीं मैं
चाहूँ कहना तो बयां कर सकता नहीं मैं ,

दुल्हन बन के मेरी जब वो मेरी बाँहों में आयी थी
सेज सजी थी फूलों की पर उस ने महकाई थी

घूँघट में इक चाँद था और सिर्फ तन्हाई थी
आवाज़ दिल के धड़कने की भी फिर ज़ोर से आयी थी

प्यार से जो मैंने घूँघट चाँद पर से हटाया था
प्यार का रंग भी उतरकर उसके चेहरे पर आया था

बाँहों में ले कर उसको फिर लबो की लाली चुराई थी
उस सर्द रात में साँसे भी शोला बन कर टकराई थी

टिका बिंदी , कंगना , पायल सब ने शोर मचाया था
जब उसके शोख बदन को मैंने हाथ लगाया था ,

डूब गए थे हम दोनों उस दहकती प्यार की आग में
तोड़ दिया था हम ने कलियों को उसके प्यार के बाग़ में

क्या बतलाये अब हम वह रात किस कदर निराली थी,
हमारे सुहाग की वो रात ,जो इतनी शोख मतवाली थी ।
 
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on: Dec 29, 2017
ratings: 3

tags: Poem
language: hi

कमजोर है दिल, कहीं खोकर रह गया वजुद,
वजह तो होगी, बस ढुंढ रहा है , सदियों से
बेनकाब है रिस्तेदारी ,छुपा अहेसास भीतर
रंग ए नूर महल बनाया , होगा कोइ तो वजूद
 
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on: Dec 29, 2017
ratings: 2

tags: friends
language: hi

दिल की बात छुपाना आता नही,
किसी का दिल दुखाना आता नही,
आप सोचते है हम भूल गए आपको,
पर कुछ अच्छे दोस्तो को भूलना हमको आता नही.
नज़रे करम मुझ पर इतना न कर..
कि तेरी मोहब्बत के लिए बागी हो जाऊं
मुझे इतना न पिला इश्क-ए-जाम की,
मैं इश्क़ के जहर का आदी हो जाऊं।
 
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on: Dec 28, 2017
ratings: 2

tags: friends
language: hi

अपनी आँखों में दरिया उमड़ते देखा,
जब कभी आँखों से अश्क उभरते देखा,
.
एक आँख के अश्क़ में था ग़म-ए-जुदाई,
दूजे में खुद को बिखरते देखा,
.
लरज़ती थी एक में मेरी अपनी तन्हाई
दूजे में अरमानो को सिमटते देखा,
.
वजूद ना उनका रहा, ना मेरा गुमान,
जब कभी मैंने दिल का आइना देखा,
.
मर भी जाता तो क्या ग़म था लेकिन,
ठहरे हुए वक़्त में खुद को क़ैद देखा...
 
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on: Dec 26, 2017
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tags: friends
language: hi

Meri Zindagi ko ek Tamasha bana diya usne,
Bhari Mehfil me Tanha baitha diya usne,
.
Aisi kya thi Nafrat usko is Masoom Dil se,
Khushiya chura kar Gum thama diya usne,
.
Bahut naaz tha uski wafa pe kabhi humko,
Mujhko hi meri Nazro me gira diya usne,
.
Khud bewafa thi meri wafa ki kya Qadr karti,
Anmol tha Main Khaak me Mila diya usne,
.
Kisi ko yaad karna to uski fitrat me shamil nahi,
Hawa ka jhonka samajh kar bhula diya usne...
 
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on: Dec 26, 2017
ratings: 5

tags: friends
language: hi

मेरी तकदीर से पूछ मेरी किस्मत का फैसला,
मेरी मुस्कराहट पे ना जा, मेरे दर्द को तलाश कर,
मेरी आँखों से पूछ मेरे इंतज़ार की इन्तहा,
मेरे इत्मिनान पे ना जा, मेरे सब्र को तलाश कर,
.
मेरे दोस्तों से पूछ मेरी दोस्ती का आलम,
मेरी सूरत पे न जा, मेरी सीरत को तलाश कर,
जो मिल जाएँ तुमको मेरी बातों के जवाब,
तो फिर तू ज़रा सा काम कर,
*मुझे आस-पास न देख, मुझे खुद में तलाश कर*...
 
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on: Dec 24, 2017
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tags: friends
language: hi

ख्वाइस तो यही है कि तेरे बाँहों में पनाह मिल जाये,
शमा खामोस हो जाये और शाम ढल जाये,
प्यार इतना करे कि इतिहास बन जाये,
और तुम्हारी बाँहों से हटने से पहले शाम हो जाये।
ना ख्वाहिश ए मंजिल , ना इश्क़ ए मिसाल है तू...!
मुझमें ही उलझा मेरा ही एक सवाल है तू....!!
ना राहत ए मर्ज , ना दर्द ए इलाज है तू...!
फिर क्यों मेरी जिंदगी की ,हर एक तलाश है तू.....!!
 
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on: Dec 22, 2017
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tags: Poem
language: hi

बेशक , हुश्न का अंदाज गज़ब है तेरा,
फूलो ने महकता अंदाज, तुजसे लीया है,

तेरा होनापन मुज में गज़ब है यकीनन,
हरतरफ आईना ए दिल बस पा लीया है

बेहोश है नज़रे हाल ,दुनियादारी की समज,
होश मे , आशियाँना ए महोबत पा लीया है

गैर अंदाज नही , है हुश्न ओर ताज़ जिंदगी,
महोबत के उसुल को, बाखुबी पा लीया है
 
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on: Dec 21, 2017
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tags: all
language: hi

*वहशत-ए-ज़फ़ा से खौफ़ खाता हूँ वर्ना,*
*कोई शिकायत नहीं मुझे नाम-ए-मोहब्बत से *

*दिल तोड़ न दें कहीं दिल में रहने वाले, इसलिए,*
*देखता नहीं मैं उनको निगाह-ए-अक़ीदत से *

*मेरा इश्क़ सरेआम बदनाम न हो जाए कहीं,*
*हर घड़ी डरता हूँ मैं उस आलम-ए-अज़ीयत से .*
 
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on: Dec 21, 2017
ratings: 3

tags: friends
language: hi

मेरी मुट्ठी से ये बालू सरक जाने को कहती है
ये ज़िन्दगी भी अब मुझसे थक जाने को कहती है

मैं अपनी लडख़ड़ाहट से परेशान हूँ मगर पोती
मेरी ऊँगली पकड़ के दूर तक जाने को कहती है

जिसे हम ओढ़ के निकले थे आग़ाज़े जवानी में
वो चादर ज़िन्दगी की अब मसक जाने को कहती है

कहानी ज़िन्दगी की क्या सुनाये अहले महफ़िल को
शकर घुलती नहीं और खीर पक जाने को कहती है
 
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on: Dec 21, 2017
ratings: 2

tags: friends
language: hi

मेरी तन्हाईयों तुम ही लगा लो मुझको सीने से
कि मैं घबरा गया हूँ इस तरह रो रो के जीने से

ये आधी रात को फिर चूड़िया सी क्या खनकती है
कोई आता है या मेरी ही ज़न्जीरें छनकती हैं
ये बातें किस तरह पूछूँ मैं सावन के महीने से
कि मैं घबरा गया हूँ इस तरह रो रो के जीने से

पीने दो मुझे अपने ही लहू का जाम पीने दो
ना सीने दो किसी को भी मेरा दामन ना सीने दो
मेरी वहशत ना बढ जाये कहीं दामन के सीने से
 
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on: Dec 18, 2017
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language: hi

फिर आज उसने दुआओं में माँगा था मुझे
फिर आज उसने बेईन्तहा चाहा था मुझे,

फिर आज उसके ख्वाबों-ख्यालों में था, सिर्फ मैं
फिर आज उसे सबसे ज्यादा याद आया था मैं……………………..

पर उसकी बेबसी तो देखो, अब वो मुझसे दूर है
उसके ख्वाब शीशे की तरह, टूटकर चूर-चूर हैं

नींद भी नहीं आती है, उसे रातों में
मानो उम्र गुजर रही हो, किसी की यादों में……………………..

शायद ये फासला, अब कभी खत्म होगा हीं नहीं
क्योंकि किस्मत को हमारा मिलन मंजूर हीं नहीं

वो भी तन्हा रोती है, और इधर खुश मैं भी नहीं
शायद प्यार की मंजिल यहाँ भी नहीं, वहाँ भी नहीं……………………..
 
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on: Dec 17, 2017
ratings: 3

tags: Poem
language: hi

गुल ए मस्त हसीन , तेरा एक चहेरा
नूर से सजाया है, तुने बडा प्यार से
थोडी भीगी पलकों पर , भीगा भीगा
शबनमी अहेसास भी ,तुने सजाया है

नज़र बिछाकर , राहे वफा सुकुन से
इन्तजार के अलम में , बसाया है
टुटती साँसे, सब्र बेसब्र निगाहें अपनी,
चाहत की राहत में, दिल सजाया है,

हँसती खेलता , अटखेलीयाँ करती वो,
हिरनी की चाल, गजब तुने ढाया है,
दिल ए मस्त ,रहेनुमाई महोबत भरी
मस्तानी जिंदगी को,बखुबी सजाया है


 
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on: Dec 16, 2017
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tags: friends
language: hi

बहुत सुंदर कविता है 💖 से पढ़ना तो मन को छू जायेगी
और मन से पढ़ना तो ❤को छू जायेगी ....
✍...*एक कवि* नदी के किनारे खड़ा था !
तभी वहाँ से *एक लड़की* का *शव*
नदी में तैरता हुआ जा रहा था।
तो तभी *कवि ने उस शव* से पूछा ----

कौन हो तुम ओ सुकुमारी,
*बह रही नदियां के जल में ?*

कोई तो होगा तेरा अपना,
*मानव निर्मित इस भू-तल में !*

किस घर की तुम बेटी हो,
*किस क्यारी की कली हो तुम ?*

किसने तुमको छला है बोलो,
*क्यों दुनिया छोड़ चली हो तुम ?*

किसके नाम की मेंहदी बोलो,
*हांथों पर रची है तेरे ?*

बोलो किसके नाम की बिंदिया,
*मांथे पर लगी है तेरे ?*

लगती हो तुम राजकुमारी,
*या देव लोक से आई हो ?*

उपमा रहित ये रूप तुम्हारा,
*ये रूप कहाँ से लायी हो?*
..........

*दूसरा दृश्य----*

*कवि* की बातें सुनकर
*लड़की की आत्मा* बोलती है...

कविराज मुझ को क्षमा करो,
*गरीब पिता की बेटी हूं !*

इसलिये मृत मीन की भांती,
*जल धारा पर लेटी हुँ !*

रूप रंग और सुन्दरता ही,
*मेरी पहचान बताते है !*

कंगन, चूड़ी, बिंदी, मेंहदी,
*सुहागन मुझे बनाते है !*

पिता के सुख को सुख समझा,
*पिता के दुख में दुखी थी मैं !*

जीवन के इस तन्हा पथ पर,
*पति के संग चली थी मैं !*

पति को मेने दीपक समझा,
*उसकी लौ में जली थी मैं !*

माता-पिता का साथ छोड़
*उसके रंग में ढली थी मैं !*

पर वो निकला सौदागर,
*लगा दिया मेरा भी मोल !*

दौलत और दहेज़ की खातिर
*पिला दिया जल में विष घोल !*

दुनिया रुपी इस उपवन में,
*छोटी सी एक कली थी मैं !*

जिस को माली समझा,
*उसी के द्वारा छली थी मैं !*

इश्वर से अब न्याय मांगने,
*शव शैय्या पर पड़ी हूँ मैं !*

दहेज़ की लोभी इस संसार मैं,
*दहेज़ की भेंट चढ़ी हूँ में !*

*दहेज़ की भेंट चढ़ी हूँ मैं !!*
 
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on: Dec 16, 2017
ratings: 4

tags: friends
language: hi

*लोग जल जाते हैं मेरी मुस्कान पर क्योंकि*
*मैंने कभी दर्द की नुमाइश नहीं की*
*जिंदगी से जो मिला कबूल किया*
*किसी चीज की फरमाइश नहीं की*
*मुश्किल है समझ पाना मुझे क्योंकि*
*जीने के अलग है अंदाज मेरे*
*जब जहां जो मिला अपना लिया*
*ना मिला उसकी ख्वाहिश नहीं की।*
*माना कि औरों के मुकाबले कुछ ज्यादा पाया नहीं मैंने,*
*पर खुश हूं कि खुद को गिरा कर कुछ उठाया नही
 
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on: Dec 14, 2017
ratings: 2

tags: Poem
language: hi

खुबसुरत आईना ए दिल , आप हो
नजारा क्या है, हकीकत बस आप हो

छुकर फूलों ने हमशे कहाँ , जरा जरा
पाया उसे , किस्मत वाले बस आप हो

महोबत भी क्या , लब ए बयान चाहती ?
मौन में छुपा वो,अहेसाल बस आप हो

तुटकर बिखरना फीर सँवरना जिंदगी ,
पतज़ड गई, बसंत बहार बस आप हो

क्या मिलना ,र्या बिछडना रोजरोज,
दिल ही आशियानाँ तुम, आप ही हो
 
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