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by: Saloni
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on: Apr 25, 2019
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language: hi

इतने बुरे तो न थे हम,
यकीनन वो भी रोता होगा
सोचकर मुझको
जमाने से नजरें चुराकर!
 
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by: Saloni
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on: Apr 25, 2019
ratings: 1

language: hi

फुर्सत में करेंगे तुझसे
हिसाब ऐ ज़िन्दगी ,
कभी तो ख़ुद में सल्झाले है ,
ऐ ज़िन्दगी ,
कभी किसी का दिल रख़ा,
कभी उसका दिल रखा,
इस कशमकाश में भूल गए ,
मेरा दिल कहाँ रखा।
 
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by: Saloni
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on: Apr 24, 2019
ratings: 2

tags: हम
language: hi

हम वहाँ जाते है,
जहां दिल की कदर हो ,
तुम बैठे रहो,
अपने अदा लिए ,
बेहपनाह मोहब्बत लिये।
 
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on: Apr 22, 2019
ratings: 3

tags: friends
language: hi

दर्द कागज पर
मेरा बिकता रहा
में बेचैन था
रात भर लिखता रहा
बदले यहाँ लोगों ने
रंग अपने-अपने ढंग से
रंग मेरा भी निखरा पर
में मेहन्दी की तरह पिसता रहा
जिनको जल्दी थी
वो बढ़ चले मंजिल की ओर
में समंदर के राज
उसकी गहराई से सिखता
रहा
दर्द कागज पर.......
 
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by: Saloni
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on: Apr 19, 2019
ratings: 2

tags: तुम
language: hi

तुम से कभी प्यार करू ,
तुम से कभी लरू ,
तुम से कभी रुठ जाऊँ,
तुम से कभी दिल्लगी करू,
ऐसी नादानियां करने को जी चाहता है।
सलोंनी
 
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by: Saloni
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on: Apr 18, 2019
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language: hi

आंसू छुपाये थे मैंने
जुदाई मे तेरा ,
दिल तो खूब रोया था
बदनाम किया था मेरा।
सलोंनी
 
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on: Apr 14, 2019
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tags: Friends
language: hi

कपड़े" और "चेहरे",*
*अक्सर झूठ बोला करते हैं~*
*"इंसान" की असलियत तो,*
*"वक्त" बताता है..!!!* बिखरा ही
सही में तेरे शाख का ही
पत्ता हूँ...
न जाने कहाँ खोया हूँ
पर
तुझ में ही कहीं रहता हूँ.
 
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on: Apr 13, 2019
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language: hi







अम्मा, तुम हम सबको बहुत डाँटती थी -
“नल धीरे खोलो... पानी बदला लेता है!
अन्न नाली में न जाए, नाली का कीड़ा बनोगे!

सुबह-सुबह तुलसी पर जल चढाओ,
बरगद पूजो,
पीपल पूजो,
आँवला पूजो,

मुंडेर पर चिड़िया के लिए पानी रखा कि नहीं?

हरी सब्जी के छिलके गाय के लिए अलग बाल्टी में डालो।

अरे कांच टूट गया है। उसे अलग रखना। कूड़े की बाल्टी में न डालना, कोई जानवर मुँह न मार दे।

.. ये हरे छिलके कूड़े में किसने डाले, कही भी जगह नहीं मिलेगी........

माफ़ करना माँ, तुम और तुम्हारी पीढ़ी इतनी पढ़ी नहीं थी पर तुमने धरती को स्वर्ग बनाए रखा,
और हम चार किताबे पढ़ कर स्वर्ग-नरक की तुम्हारी कल्पना पर मुस्कुराते हुए धरती को नर्क बनाने में जुटे रहे।

प्यार और आभार

अम्मा, तुम हम सबको बहुत डाँटती थी -
“नल धीरे खोलो... पानी बदला लेता है!
अन्न नाली में न जाए, नाली का कीड़ा बनोगे!

सुबह-सुबह तुलसी पर जल चढाओ,
बरगद पूजो,
पीपल पूजो,
आँवला पूजो,

मुंडेर पर चिड़िया के लिए पानी रखा कि नहीं?

हरी सब्जी के छिलके गाय के लिए अलग बाल्टी में डालो।

अरे कांच टूट गया है। उसे अलग रखना। कूड़े की बाल्टी में न डालना, कोई जानवर मुँह न मार दे।

.. ये हरे छिलके कूड़े में किसने डाले, कही भी जगह नहीं मिलेगी........

माफ़ करना माँ, तुम और तुम्हारी पीढ़ी इतनी पढ़ी नहीं थी पर तुमने धरती को स्वर्ग बनाए रखा,
और हम चार किताबे पढ़ कर स्वर्ग-नरक की तुम्हारी कल्पना पर मुस्कुराते हुए धरती को नर्क बनाने में जुटे रहे।

प्यार और आभार

 
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by: Saloni
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on: Apr 12, 2019
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language: hi

जो हुआ काश ऐसा न होता ,

दिल का दर्द बयान नही होता ,

वो नही सी ,

और कोई दर्द होता ,

और दिल रोता ,

कोमल सा दिल ,

चकनाचूर नही होता ,

मोतियों जैसे आँसू ,

यूँ नही टपकते ,

जो हुआ सो हुआ ,

न पूँछ क्या हुआ ,

यूँ तो होना था ,

जो हुआ अच्छा हुआ ,

न कोई गम ,

न कोई शिकवा ,

अब न कोई दर्द ,

अब सब सही हुआ।

सलोनी
💐💐💐
🌼🌼🌼
🌸🌸🌸
 
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on: Apr 10, 2019
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language: hi

एक जोहरी की कहानी जिसने एक बच्चे को तरास कर एक हीरा बनाया।
नारायण दास के पिता एक नामी जोहरी थे। पुरा परिवार खुब अच्छे से अपना जीवन यापन कर रहा था। एक दिन नारायण के पिता का निधन हो गया।
नारायण बहुत छोटा था और अपने पिता का काम नहीं संभाल सकता था। पिता के जाने के बाद परिवार एक दम टूट गया। धीरे धीरे परिवर पर कर्ज का बोझ बढ़ने लगा। कुछ ही दिनों में ये हो चला कि परिवार के पास खाने को कुछ ना रहा। उनको दूसरों की मदद का मोहताज होना पड़ा।
एक दिन माँ नीलम का हार देकर बोली की "बेटा इस हार को अपने चाचाजी के पास ले जाओ। इसको बेच कर जो पैसे मिलेंगे उससे घर का खर्चा चल जायेगा। नारायण ने माँ की बात मान कर ऐसा ही किया। नारायण दुकान पर जाकर बोला कि चाचाजी मां ने यह हार दिया है। इसको बेचना है। चाचाजी ने हार को अच्छी तरह से देखा परखा और कहा कि बेटा अभी बाज़ार बहुत मंदा है, अभी इसके उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। मां को बोलना कि कुछ दिन रुक जाए, जब बाज़ार सही होगा तब बेच देना। इसके बाद उन्होंने कुछ रुपये नारायण को दिए और बोले कि कुछ दिन इनसे काम चला लो। इसके बाद चाचाजी ने बोला कि बेटा तुम कुछ समय के लिए दुकान पर आ जाया करो, यहां काम कर लो। तुम्हें भी पैसों कि जरूरत है और मझे भी सहारा मिल जाएगा। नारायण ने ये बात मां को बताई और उनकी आज्ञा पाकर अगले दिन से दुकान पर जाने लगा।
दुकाँन पर नारायण ने खूब मन से काम सीखा और बराबर काम करते करते उसको हीरों की अच्छी परख हो गई। ऐसे ही समय बीत गया और अब नारायण 20 साल का हो गया था। लोग दूर दूर से अपने हीरों की जांच करवाने के लिए नारायण दास के पास आते। अब उसका कर्ज भी समाप्त हो गया था। और परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी हो गई थी।
एक दिन नारायण के चाचाजी ने बोला कि नारायण अब बाजार में भाव अच्छा है, अपनी मां से वो हार ले आओ जिसको तुम पहले दिन लाए थे। नारायण को याद आ गया कि चाचाजी किस हार की बात कर रहे हैं। नारायण अपनी मां के पास गया और उनसे वो हार मांगा। माँ न हार नारायण को दे दीया। हार को लेकर नारायण के मन में सबसे पहले ख्याल आया कि क्यूं ना इस हार को जांच लिया जाए। उसने हार को जांचा तो पाया कि हार तो नकली है। इसके बाद नारायण ने हार वहीं रख दिया और वापस दुकान कि तरफ चल पड़ा। दुकाँन पर पहुंचने पर चाचाजी ने नारायण से हार मांगा। इस पर नारायण ने सारी घटना बता दी और बताया की वह हार नकली है। इस पर चाचाजी बोले कि बेटा जब तुम पहले दिन हार लाए थे मझे तभी पता चल गया था कि हार नकली है, लेकिन उस समय अगर मैं तुमको बता देता तो तुम सोचते कि बुरा वक़्त आया है तो चाचाजी हमारे हार को भी नकली बताने लगे। इसलिए मैंने तुमसे बज़ार का भाव कम है बोलकर मना कर दिया था। लेकिन मैं यह भी जानता था कि तुम्हें पैसों की कितनी जरूरत थी। और इसीलिए मैंने उस हार को ना लेकर, इस हीरे को यानी तुमको तराशना उचित समझा। और देखो आज मेरा हीरा उस हार से कहीं ज्यादा कीमती निकला।
 
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by: Saloni
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on: Apr 10, 2019
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language: hi

छोटी सी ज़िन्दगी है,

खाली हाथ आये थे ,

ख़ाली हाथ चले जाएंगे ,

क्या खोया ,

क्या पाया ,

न कोई गम,

न कोई ख़ुशी,

यह ज़िन्दगी की रीत है ।

सलोंनी

🌹🌹🌹
🌻🌻🌻
 
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by: Saloni
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on: Apr 4, 2019
ratings: 2

tags: मैं
language: hi

मै जैसी हूँ ,
तुम से अलग हूँ,
न कोई छल कपट है ,
न दुसरो से जलती हूँ,
अब मैं ऐसी हूँ।

मै जैसी हूँ,
अपने मे खुश हूँ,
अपनों के साथ ,
खुली हवा मे जीती हूँ,
दुसरो के ख़ुशी मे खुश होती हूँ,
अब मैं ऐसी हूँ ,
जैसी भी हूँ,
सब को प्यार और सम्मान करती हूँ ।

सलोंनी
💮💮💮
🌼🌼🌼
🌸🌸🌸
 
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on: Apr 1, 2019
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language: hi

आँखों में नींद हो,

चेहरा हसींन हो ,

होटो पर लाली हो,

मुस्कुराहता हुआ चेहरा ,

लोगो को घायल कर देता है,

कुछ खास लोग ,

इस मुस्कराहट के दीवाने है,

दिल ऐ नादान है,

इस में सलोंनी के ,

दिल का क्या कसूर।

सलोनी

🌸🌸🌸
🌼🌼🌼
🏵️🏵️🏵️
🌹🌹🌹
 
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on: Apr 1, 2019
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language: hi

आँखों में नींद हो,

चेहरा हसींन हो ,

होटो पर लाली हो,

मुस्कुराहता हुआ चेहरा ,

लोगो को घायल कर देता है,

कुछ खास लोग ,

इस मुस्कराहट के दीवाने है,

दिल ऐ नादान है,

इस में सलोंनी के ,

दिल का क्या कसूर।

सलोनी

🌸🌸🌸
🌼🌼🌼
🏵️🏵️🏵️
🌹🌹🌹
 
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by: Saloni
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on: Apr 1, 2019
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language: hi

आँखों में नींद हो,

चेहरा हसींन हो ,

होटो पर लाली हो,

मुस्कुराहता हुआ चेहरा ,

लोगो को घायल कर देता है,

कुछ खास लोग ,

इस मुस्कराहट के दीवाने है,

दिल ऐ नादान है,

इस में सलोंनी के ,

दिल का क्या कसूर।

सलोनी

🌸🌸🌸
🌼🌼🌼
🏵️🏵️🏵️
🌹🌹🌹
 
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by: Saloni
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on: Mar 26, 2019
ratings: 5

language: hi

गुज़रा हुआ कल फिर लौट के न आएगा,
सुनेहरा पल फिर नही आयेगा ,
चंद लम्हे ख़ुशी के आये थे ,
समभाल के रखना ,
आकेलेपन में आपका साथ निभाएगा।
सालोनी
 
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on: Mar 23, 2019
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tags: INSAAN...
language: hi

Arz hai ...

INSAAN khud ki nazzar mein hi sahi hona chahiye ...

Duniya tho bhagwan se BHI dukhi hai ....

Be happy and keep smiling 😍😍😍😍😍
 
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on: Mar 17, 2019
ratings: 5

tags: TKB
language: hi

इक नदी किनारे बैठा
रेत के पन्नों पर,
कुछ याद तूझे कर लेता हूं,
कुछ सपने,
कुछ पल, कुछ उमंग,
सोच सोच कर लिख देता हूं,
तुम उस नदी की
इक कमसीन लहर
समान हो जैसे,
चुपके से अाती हो,
छू मुझे वापस,
घाट से चली जाती हो,
बार बार क्यों,
ऐसे सताती हो,
मेरी रेतिले पन्नों,
को तुम एक छण
रौंद जाती हो...
क्यों बार बार
सताती हो...
ले लो मुझे
अपनी अागोश में,
या मुझमें
समा जाअो तुम,
बार बार मेरे सपनों को
न इस तरह मिटाअो तुम,
न इस तरह मिटाअो तुम... (बीगदोस्त)
इक नदी किनारे बैठा
रेत के पन्नों पर,
कुछ याद तूझे कर लेता हूं,
कुछ सपने,
कुछ पल, कुछ उमंग,
सोच सोच कर लिख देता हूं,
तुम उस नदी की
इक कमसीन लहर
समान हो जैसे,
चुपके से अाती हो,
छू मुझे वापस,
घाट से चली जाती हो,
बार बार क्यों,
ऐसे सताती हो,
मेरी रेतिले पन्नों,
को तुम एक छण
रौंद जाती हो...
क्यों बार बार
सताती हो...
ले लो मुझे
अपनी अागोश में,
या मुझमें
समा जाअो तुम,
बार बार मेरे सपनों को
न इस तरह मिटाअो तुम,
न इस तरह मिटाअो तुम... (बीगदोस्त)
https://farm5.staticflickr.com/4336/37070227570_897550a24a_b.jpg
 
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on: Mar 16, 2019
ratings: 1

tags: .....
language: hi

हर किसी को नहीं आते
बेजान बारूद के कणों में
सोई आग के सपने नहीं आते
बदी के लिए उठी हुई
हथेली को पसीने नहीं आते
शेल्फ़ों में पड़े
इतिहास के ग्रंथो को सपने नहीं आते
सपनों के लिए लाज़मी है
झेलनेवाले दिलों का होना
नींद की नज़र होनी लाज़मी है
सपने इसलिए हर किसी को नहीं आते
 
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on: Mar 15, 2019
ratings: 7

language: hi

........ज़िन्दगी और कुछ नहीं ....jugal bandi
1
तुम हो मेरे दिल के पास
फिर क्यों है दिल तेरा उदास ?
हो तुम तो बहुत ही जहीन
फिर जाना क्यों हो तुम ग़मगीन ?
........................................................................राज...३.०० p m

दिन बदल जाता है अँधेरी रात में ,
ऋतू एक के बाद एक बदलते रहते है ,
इंसान के अंदर भी होता है उतार चढाव ,
अब एक भाव है तो दूसरा ही फल दूसरा भाव ..............शरू ३.३५pm

2
दिन की तरह तुम कहीँ डूब न जाना ,
मौसम की तरह कहीँ तुम बदल न जाना ,
लाख आए उतार चढाव ज़िंदगी में ,
मौकों की तरह कहीँ तुम फिसल न जाना ॥
.........................................................................राज..३.४० pm

कोशिश तो यही रहेगी हमेशा मेरी
मुसाफिर के तरह आगे निकल न जावू
रुख जावू डेरा डाल के एक जगह
फिर भी इंसान होता है विधि के मोहताज .!.................शरू..३.४४pm

3
हमारे प्यार मे विधि का न कोई दखल हो ,
कसम है विधि के नियम को बदल दो ।
खुदा से माँगलूँ तुम्हे तुम पर हक़ है मेरा ,
सदा के लिए डालदो तुम मेरे दिल पर डेरा ॥
.........................................................................राज...३.50pm

मान लिया आप को,आज भी है वही तेवर ,
जो देखी थी बरसों पहले यहां पर यार ,
विधि की नियम को बदल डालने की हिम्मत ,
और खुद को देवदास पारो बनाने की ताकत .............शरू..३.५६pm

4
चाहे जैसे हो हालात ज़िंदगी की रफ्तार कभी न हे थम ,
प्यार मे तेवर बदल जाए तो यारा प्यार हो जाता है कम ।
कसकर रखता हूँ ज़िंदगी को, कभी न देता ढील ,
दुनियाँवालों से देखना एक दिन तुमको लूँगा मैं छीन ॥
..........................................................................राज..४.०३pm

वाह !....क्या ज़िन्दगी है एक घोडा गाडी ?
जो तुम कसके पकड़के रखोगे ..?
ज़िन्दगी कब, कैसे फिसल जाए कोई न जाने ,
रेत् की तरह उंगुलियों के बीच में से अपनी................शरू ४.०७ pm
 
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