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on: Nov 19, 2018
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tags: ..
language: hi

प्यार कभी इकतरफ़ा होता है; न होगा
दो रूहों के मिलन की जुड़वां पैदाईश है ये
प्यार अकेला नहीं जी सकता
जीता है तो दो लोगों में
मरता है तो दो मरते हैं

प्यार इक बहता दरिया है
झील नहीं कि जिसको किनारे बाँध के बैठे रहते हैं
सागर भी नहीं कि जिसका किनारा नहीं होता
बस दरिया है और बह जाता है.

दरिया जैसे चढ़ जाता है ढल जाता है
चढ़ना ढलना प्यार में वो सब होता है
पानी की आदत है उपर से नीचे की जानिब बहना
नीचे से फिर भाग के सूरत उपर उठना
बादल बन आकाश में बहना
कांपने लगता है जब तेज़ हवाएँ छेड़े
बूँद-बूँद बरस जाता है.

प्यार एक ज़िस्म के साज़ पर बजती गूँज नहीं है
न मन्दिर की आरती है न पूजा है
प्यार नफा है न लालच है
न कोई लाभ न हानि कोई
प्यार हेलान हैं न एहसान है.

न कोई जंग की जीत है ये
न ये हुनर है न ये इनाम है
न रिवाज कोई न रीत है ये
ये रहम नहीं ये दान नहीं
न बीज नहीं कोई जो बेच सकें.

खुशबू है मगर ये खुशबू की पहचान नहीं
दर्द, दिलासे, शक़, विश्वास, जुनूं,
और होशो हवास के इक अहसास के कोख से पैदा हुआ
इक रिश्ता है ये
यह सम्बन्ध है दुनियारों का,
दुरमाओं का, पहचानों का
पैदा होता है, बढ़ता है ये, बूढा होता नहीं
मिटटी में पले इक दर्द की ठंढी धूप तले
जड़ और तल की एक फसल
कटती है मगर ये फटती नहीं.

मट्टी और पानी और हवा कुछ रौशनी
और तारीकी को छोड़
जब बीज की आँख में झांकते हैं
तब पौधा गर्दन ऊँची करके
मुंह नाक नज़र दिखलाता है.

पौधे के पत्ते-पत्ते पर
कुछ प्रश्न भी है कुछ उत्तर भी
किस मिट्टी की कोख़ से हो तुम
किस मौसम ने पाला पोसा
औ' सूरज का छिड़काव किया.

किस सिम्त गयी साखें उसकी
कुछ पत्तों के चेहरे उपर हैं
आकाश के ज़ानिब तकते हैं
कुछ लटके हुए ग़मगीन मगर
शाखों के रगों से बहते हुए
पानी से जुड़े मट्टी के तले
एक बीज से आकर पूछते हैं.

हम तुम तो नहीं
पर पूछना है तुम हमसे हो या हम तुमसे
प्यार अगर वो बीज है तो
इक प्रश्न भी है इक उत्तर भी.
 
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on: Nov 18, 2018
ratings: 6

language: hi

कैसे कहूं कि दिल में तुम हो
कैसे कहूं हर पल में तुम हो
रोज रात को स्वप्न में तुम हो
कैसे कहूं हर रत्न में तुम हो
रात की जगमग थाल में तुम हो
सुर में तुम हो ताल में तुम हो
कैसे कहूं कि दिल में तुम हो..
 
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on: Nov 18, 2018
ratings: 3

language: hi

सोचती हूँ हम दोनों के बीच
जो था वो था भी कि नहीं ,
ये कैसा खालीपन है
इस पार से उस पार तक ,
सूखी पहाड़ी नदी पर पसरे रेत सा
सफ़ेद, सफ़ेद और सफ़ेद !!

यूँ तो खालीपन पहले भी था
पर कुछ चीज़ों से भरा-भरा ,
कुछ चुहल भरी बातें
कुछ मिस्री घुली यादें ,
उनींदी आँखों के कुछ रंग भरे सपने
दो दिलों में पलने वाले प्यार की खुराक ,

हम सोचते थे खालीपन ज़रूरी है प्यार के विस्तार के लिए
भर देंगे इस खालीपन कोलबालब अपने प्रेम से ,
और फिर दो किनारे मिल जायेंगे
इस पुल के सहारे-सहारे ,
पर सोचा हुआ होता है क्या कभी?
अब बस खालीपन है और कुछ भी नहीं
उस पार किसी के होने की आस तक नहीं !!

कभी लगता है सब भ्रम था
या कि एक रात का सुन्दर लंबा सपना ,
पर नहीं, भ्रम नहीं, था ये शाश्वत सत्य
एक किनारे वाली इस रेत की नदी में
डूब-डूब जाता है मन, ढूँढने को पुरानी बातें !!

सुकून है अब बस
किसी से मिलने की बेचैनी नहीं
बिछड़ने का डर भी नहीं
कभी-कभी किसी रिश्ते का टूटना
कितनी राहत दे जाता है
क्योंकि प्यार तब भी रहता है !

रिश्ते टूटते हैं
प्यार नहीं टूटा करता. !!

 
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on: Nov 17, 2018
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language: hi

मौसम ने करवट ली,
और तुम्हें मेरी बाहों में लाई,
आज तुम्हारी याद आई।
तुम्हारी गर्मी से मझको राहत की सांस आई,
मेरी जान में जान आई,
आज तुम्हारी याद आई।
तुम्ही मेरी सर्दी का सहारा बनकर मेरे सामने आई,
ओ मेरी *रजाई* आज तेरी याद आई।।
 
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on: Nov 13, 2018
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tags: ..
language: hi

किताबें झांकती हैं बंद अलमारी के शीशों से
बड़ी हसरत से तकती हैं
महीनों अब मुलाकातें नहीं होती
जो शामें इनकी सोहबतों में कटा करती थीं,
अब अक्सर
गुज़र जाती हैं 'कम्प्यूटर' के पर्दों पर
बड़ी बेचैन रहती हैं किताबें..
इन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई हैं,
बड़ी हसरत से तकती हैं,

जो क़दरें वो सुनाती थीं।
कि जिनके 'सैल'कभी मरते नहीं थे
वो क़दरें अब नज़र आती नहीं घर में
जो रिश्ते वो सुनती थीं
वह सारे उधरे-उधरे हैं
कोई सफ़्हा पलटता हूँ तो इक सिसकी निकलती है
कई लफ्ज़ों के माने गिर पड़ते हैं
बिना पत्तों के सूखे टुंडे लगते हैं वो सब अल्फाज़
जिन पर अब कोई माने नहीं उगते
बहुत सी इसतलाहें हैं
जो मिट्टी के सिकूरों की तरह बिखरी पड़ी हैं
गिलासों ने उन्हें मतरूक कर डाला

ज़ुबान पर ज़ायका आता था जो सफ़हे पलटने का
अब ऊँगली 'क्लिक'करने से अब
झपकी गुज़रती है
बहुत कुछ तह-ब-तह खुलता चला जाता है परदे पर
किताबों से जो ज़ाती राब्ता था,कट गया है
कभी सीने पे रख के लेट जाते थे
कभी गोदी में लेते थे,
कभी घुटनों को अपने रिहल की सुरत बना कर
नीम सज़दे में पढ़ा करते थे,छूते थे जबीं से
वो सारा इल्म तो मिलता रहेगा बाद में भी
मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल
और महके हुए रुक्के
किताबें मांगने,गिरने,उठाने के बहाने रिश्ते बनते थे
उनका क्या होगा?
वो शायद अब नहीं होंगे!
 
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on: Nov 9, 2018
ratings: 3

language: hi

एक 15 साल का लड़का अपने पिता के साथ ट्रेन में सफ़र कर रहा था. लड़का खिड़की के पास बैठा हुआ था और खिड़की के बाहर देखकर जोर-जोर से अपने पापा से कह रहा था की……“पापा, वो देखिये पेड़ तेज़ी से पीछे जा रहे है!”ये सुनकर उसके पिताजी मुस्कुराने लगे और पास में बैठा एक युगल (पति-पत्नी) उस 15 साल के लड़के द्वारा किये जा रहे बच्चे जैसे व्यवहार को गुस्से से देख ही रहे थे, की तभी अचानक वह लड़का फिर से चिल्लाया…

“पिताजी, देखिये बादल भी हमारे साथ ही जा रहे है!”

इस बार उस युगल से रहा नही गया उसने इसका विरोध करते हुए उस बुजुर्ग व्यक्ति (लड़के के पिता) से कहा की….

“तुम अपने बेटे को किसी अच्छे डॉक्टर को क्यू नहीं दिखाते?”

तभी वह बुरुर्ग व्यक्ति (लड़के का पिता) मुस्कुराया और उसने कहा की….

“मैंने ऐसा ही किया, बल्कि अभी हम अस्पताल से ही आ रहे है, मेरा बेटा बचपन से ही अँधा था, और उसे आज ही उसकी आखे मिली, आज पहली बार मेरा बेटा इस दुनिया को देख पा रहा है.”
 
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on: Nov 8, 2018
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tags: friends
language: hi

पर्व है पुरुषार्थ का,
दीप के दिव्यार्थ का,

देहरी पर दीप एक जलता रहे,
अंधकार से युद्ध यह चलता रहे,

हारेगी हर बार अंधियारे की घोर-कालिमा,
जीतेगी जगमग उजियारे की स्वर्ण-लालिमा,

दीप ही ज्योति का प्रथम तीर्थ है,
कायम रहे इसका अर्थ, वरना व्यर्थ है,

आशीषों की मधुर छांव इसे दे दीजिए,
प्रार्थना-शुभकामना हमारी ले लीजिए!!

झिलमिल रोशनी में निवेदित अविरल शुभकामना..

आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावना!!!

दीपावली की अनन्त बधाइयाँ ..
 
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on: Nov 7, 2018
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tags: friends
language: hi

साँसो का कब तक एतबार करे
पास आओ तो हम कुछ बात करे ,
.................साँसो कब तक तक,

कभी जुल्फो मे कभी बाँहो मे
हम तुम को यू ही गिरफ्तार करे

आज यादो मे मेरे तुम आओ तो
मेरी तंहाई भी कुछ करामात करे,
.................साँसो का कब तक,

तुम्हें देखे तुम्हें सोचें
कब तक खोयाबो का एतबार करे,,

आज मिलना है ना मिलकर मुझे
तकदीर से कहो कुछ चमत्कार करे
..................साँसो का कब तक,

पास आओ तो हम कुछ बात करे
साँसो का कब तक एतबार करे
 
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on: Nov 2, 2018
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tags: Poem
language: hi

आग को भी जलाती ,यह दिलरुबा फितरत मेरी
रेगीस्तानी लिबास में , बीरहाना फितरत मेरी

अश्कों को पी कर ,लाजवाब बहेती खून घाराएँ
बुलबुला उबलती लावा ,बीररहाना फितरत मेरी

तुटकर गीर पडेगा आसमान ,या बीजलीयाँ भी
रुहानियत खाक बनाती ,बीरहाना फितरत मेरी

झेलने की हद से परे ,बेहद में बेनकाब खुशनसीबी
सरेआम लूट लेती तपीश , बीरहाना फितरत मेरी

ओ रुसवाई आजा ,हुनर ए इश्क बनकर मनाही
दिल ए नूर तडपती रुह, बीरहाना फितरत मेरी
 
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on: Nov 2, 2018
ratings: 1

tags: Poem
language: hi

फकत सुकुन से कुछ लफ्ज गुजरे इत्मिनान
कुछ जजबात अपनापन, तेरे मेरे दरमियाँ

ना लेना ना देना , फकत मौज ए मिलन ही
बुलबुले का अहेसास फकत तेरे मेरे दरमियाँ

ना रुसवाई कभी ना मौज ए मिलन अपना
सपना रंगीन लफ्ज बुनना, तेरे मेरे दरमियाँ

गुजरे हाल मस्त ,फूलों की महक, नजाकत
शबनमी भीगा अहेसास , तेरे मेरे दरमियाँ

घौंसला है तिनका तिनका जजबात का यह
तितर बीतर ना हो जाय , तेरे मेरे दरमियाँ
 
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on: Oct 31, 2018
ratings: 7

tags: Poem
language: hi

घौंसला ए दिल, सुमसाम लगता है , जिंदगी
यह तिनका तिनका सफर, बीखर ना जाए !!

जज़्बात की बात है, उलझन बन गई जिंदगी
अपनापन पराया होकर सफर,बीखर ना जाए !!

ना राज़ है तिलस्मी कोई, फकत है दिलरुबाना
मिटाने की फितरत का सफर, बीखर ना जाए !!

मौज ए मस्त दरियादिली का हुश्न है जिंदगीका
साहिल तरफ आती यह सफर,बीखर ना जाए !!

मैं मिला ही नहीं , फीर बीछडने का ग़म क्यु हैं?
मुसाफिर हुं , रुहानी यह सफर, बीखर ना जाए !!

 
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on: Oct 27, 2018
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tags: Friends
language: hi

मै क्या करता करीब जाकर,
जो दूर रहा नजदीक आकर.

आखरी तक वो पत्थर रहा,
मैं लौट गया सर झुका कर.

किस्मत के खेल भी निराले हैं,
सिखता ही नहीं है चोट खाकर.

अपनी मोहब्बत मांग रहे हैं वो,
जख्म करता भी क्या दिखा कर.

ये कब कहा कि मैं दूर हूं तुमसे,
पर देखना हैं अब तुम्हें भुला कर
 
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by: Saloni
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on: Oct 26, 2018
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tags: याद
language: hi

जब भी तुम्हें मेरी याद आये,
मुस्कुराहता हुआ मेरा चेहरा नज़र आये,
तुम पुकारो,
हम चले आये।

जब भी मेरी याद आये,
वो सुनहरा पल याद आये,
ख़ुशी के पल लौट आये।
सलोंनी
 
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on: Oct 22, 2018
ratings: 7

tags: Friends
language: hi

चोटों पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया,
पत्थर को बूत की शक्ल में लाने का शुक्रिया/_
जागा रहा तो मेने नए काम कर लिए,
ऐ नींद आज तेरे न आने का शुक्रिया/_
सूखा पुराना जख्म नए को जगह मिली,
स्वागत नए और पुराने का शुक्रिया/_
आती न तुम तो क्यों बनाता ये सीढियाँ,
दीवारों मेरी राह में आने का शुक्रिया/_
अब यह हुआ कि दुनियां ही लगती है मुझको घर,
यूँ मेरे घर में आग लगाने का शुक्रिया/_
गम मिलते हैं तो और निखरती है शायरी,
यह बात है तो सारे जमाने का शुक्रिया/_
अब मुझको आ गया है मनाने का हुनर,
यूँ मुझसे रूठ जाने का शुक्रिया///_
 
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on: Oct 21, 2018
ratings: 3

tags: ..
language: hi


उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता,
हजारों जुगनुओं से भी अँधेरा कम नहीं होता।

बिछड़ते वक़्त कोई बदगुमानी दिल में आ जाती,
उसे भी ग़म नहीं होता मुझे भी ग़म नहीं होता।

ये आँसू हैं इन्हें फूलों में शबनम की तरह रखना,
ग़ज़ल एहसास है एहसास का मातम नहीं होता।

बहुत से लोग दिल को इस तरह महफूज़ रखते हैं,
कोई बारिश हो ये कागज़ जरा भी नम नहीं होता।

कभी बरसात में शादाब बेलें सूख जाती है,
हरे पेड़ों के गिरने का कोई मौसम नहीं होता।
 
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on: Oct 16, 2018
ratings: 2

tags: friends
language: hi

मन की थकान जो उतार दे
वो अवकाश चाहिए..
इस भागती सी जिंदगी में
फुरसत की सांस चाहिए ।

चेहरों को नहीं दिल को भी
पढने का वक्त हो ….
मुखौटों से कुछ पल का
संन्यास चाहिए ।

अब बहुत मन भर गया
बड़प्पन और मान से,
है बहुत तृप्त हम
झूठी आन बान शान से..
इसको भी कुछ दिन का
उपवास चाहिए।

बन जाऊं तितली या परिंदा कोई
वो आभास चाहिए..
मन की थकान जो उतार दे
वो अवकाश चाहिए ।।
 
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on: Oct 13, 2018
ratings: 5

tags: friends
language: hi

भर लिए जो आँखों में वो महज़ ख़्वाब निकले
टूट कर जो चुभ गये वो ज़ख़्म ला इलाज़ निकले l
तुम्हारी याद के साए मेरे दिल के अँधेरे में,
बहुत तकलीफ देते हैं मुझे जीने नहीं देते,
अकेली राह में हमराह कोई मिल तो जाता है,
मगर कुछ दर्द हैं जो दिल बहलने नहीं देते।
आज हम उनको बेवफा बताकर आए है!
उनके खतो को पानी में बहाकर आए है .
कोई निकाल न ले उन्हें पानी से…
इस लिए पानी में भी आग लगा कर आए है !
 
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on: Oct 13, 2018
ratings: 1

tags: friends
language: hi

ज़िंदगी तेरे बिना अब कटती नहीं है, तेरी याद मेरे दिल से मिटती नही,
तुम बसे हो मेरी निगाहो में, आँखो से तेरी सूरत हटती नही!
चाँद से अपना प्रेम लिखूँ या निंदिया से अपना बैर लिखूँ,
तुम तो इस दिल के धड़कन हो फिर तुमको कैसे गैर लिखूँ.
सोचूँ तो सिमट जाऊँ, देखूँ तो बिखर जाऊँ,
हर लम्हा तेरी चाहत है, जाऊँ तो किधर जाऊँ
 
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on: Oct 13, 2018
ratings: 7

tags: friends
language: hi

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है
ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है

वो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को
वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है

रूह को शाद करे, दिल को जो पुरनूर करे
हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है

ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोकें
दिल में जो बात हो आँखों से अयाँ होती है

ज़िन्दग़ी एक सुलगती-सी चिता है 'साहिर'
शोला बनती है न ये बुझ के धुआँ होती है
 
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on: Oct 12, 2018
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language: hi

#______ग़ज़ल
माहौल कितना गुलज़ार है
फ़िर भी दिलों में गुबार है !!

दो वक्त की रोटी के लिए
आदमी होता गुनेहगार है !!

है नियत में खोट उसकी
इन्सानियत शरमसार है !!

ये रिस्ते केवल नाम के हैं
भाई भाई में यूं दिवार है !!

जब से देखा है उसको मेरा
रहा दिल पे' न इख्तियार है !!

हमको मिलता है बेखुदी में
कि बेकरारी में भी करार है !!

उसके बगैर एक पल भी
यूं मेरा तो जीना दुश्वार है !!
 
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