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on: Apr 26, 2018
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tags: Poem
language: hi

तलब बेतलब से परे आशियाँना ,हकीकी
मिजाज़ ए महोबत , तुने जाँना कहाँ है??

बेमतलब तो उठता नही , कदम यहाँ याराना
उठ कर चल कर ,सरहद पार जाना कहाँ है?

उलफत की रंगीनीयों को कौन समज पाया
बेसमजी में यहाँ, समजगारी मे जाना कहा है?

राहे वफा चल दिये ,नेक कदम बढाते हुए तुम
वफा जफा से परे ,घौंसला मे जाना कहाँ है ?

दुर तक निगाहों मे परिन्दा ए महोबत , यकीनन
दिल ए नूर भीतर है ,बाहर फीर जीनाँ कहाँ है ?
 
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on: Apr 25, 2018
ratings: 7

tags: Channdni
language: hi

.
बरसात होगी अश्‍क की मेरे लि‍ए कभी।
रोया करेंगेआप भी मेरे लि‍ए कभी।

ढक जायेगी गुलों से मेरी क़ब्र देखना,
ऐसी बहार आएगी मेरे लि‍ए कभी।

ऐ ज़ख्‍़म दे के भूलने वाले ज़रा बता,
मरहम की तूने फ़ि‍क्र की मेरे लि‍ए कभी।

दोज़ख़ बनी है आज वो मेरे फ़ि‍राक़ में,
दुनि‍या जो एक स्‍वर्ग थी मेरे लि‍ए कभी।

'चाँदनी ' न था खयाल कि महँगी पड़ेगी यूँ,
इक बेवफ़ा की दोस्‍ती मेरे लि‍ए कभी। :) ♥ ❤️

......................................'चाँदनी '
 
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on: Apr 25, 2018
ratings: 4

tags: Channdni
language: hi

💞हाल दिल का, वो इशारों से बता देता है
जब भी मिलता है, बहारों से मिला देता है

किस नज़र देखता है, हाय देखने भर से
मेरी नज़रों को नजारों से मिला देता है

जब भी आगोश में लेता है तो दरिया बनकर
प्यास को, गंगा की धारों से मिला देता है

जब कभी मुझको वो पाता है जरा भी तनहा
अपनी यादों के, सहारों से मिला देता है

कितना भी तेज़ हो तूफान वो मांझी बनकर
मेरी कश्ती को, किनारों से मिला देता है

हाँ ये सच है की खुदा, खुद नहीं करता कुछ भी
बस वो 'चाँदनी ' 🔥 को यारों से मिला देता है
चाँदनी ' 🔥
 
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on: Apr 25, 2018
ratings: 4

language: hi

तलाश जिंदगी की थी दूर तक निकल पड़े !
जिंदगी मिली नही तज़ुर्बे बहुत मिले !!
किसी ने मुझसे कहा कि ,तुम इतना ख़ुश कैसे रह लेते हो ?
मैंने कहा कि मैंने जिंदगी की गाड़ी से…
वो साइड ग्लास ही हटा दिये…
जिसमेँ पीछे छूटते रास्ते और..
बुराई करते लोग नजर आते थे !!!!
😊😊
जिंदगी में हर दम हंसते रहो,
हंसना जिन्दगी की जरूरत है,
जिंदगी को इस अंदाज में जीओ
के आपको देखकर लोग कहें…
“वो देखो जिंदगी कितनी खूबसूरत है!”
 
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on: Apr 24, 2018
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language: hi

गर्मियों की छुट्टियाँ
.
न जाने गर्मी का मौसम आने पर क्यों मन “nostalgic” सा होने लगता हे, अचानक ही कभी बचपन में बिताई गई गर्मियों की छुट्टियों की यादें स्मृति पटल पर उभरने लगती हे। हिंदी माध्यम के स्कूलों में फाइनल परीक्षा ख़तम होते ही छुट्टियाँ शुरू हो जाती थी, आज कल के जैसे फिर से नई क्लास/सेशन नहीं चालू होते थे। जिस दिन अंतिम पेपर रहता था उस दिन मन ख़ुशी के मारे प्रफुल्लित रहता था दोस्तों के साथ छुट्टियों के प्लान शेयर किया करते थे उस वक़्त होम वर्क भी नहीं दिया जाता था तथा घर वाले भी गर्मी की छुट्टियों में पढने की जिद नहीं करते थे।
अंतिम पेपर दे कर घर आते ही पुराने केरमबोर्ड को निकला जाता था तथा उसे धुप दिखाई जाती थी फिर बड़े जतन से सांप-सीढ़ी/ लूडो आदि खोजे जाते थे और भाई बह्नों और दोस्तों के साथ खेला करते थे। उन दिनों कजन शब्द का मतलब नहीं मालूम था ,चाचा, मामा बुआ के बच्चे भी भाई बहन होते थे।
पुराने ताश की गड्ढी भी निकल कर दहला पकड़, सत्ती लगवानी जोड़ी बनाओ जैसे खेल खेलते थे, बड़े लोग ताश में रमी खेलते थे जो हमें खेलना नहीं आता था। चाक से आँगन या कमरे मैं अष्टा-चंगे का बोर्ड बनाया जाता था, और इमली के बीजों को आधा तोड़ कर जिसे चिया कहा जाता था पासे बना कर ये गेम खेला जाता था।
पुरानी अखबार/ किताबों के ढेर से सुमन सौरभ, नंदन , चम्पक और अन्य किताबें और कॉमिक्स निकल कर पढ़ा करते थे, कई बार पढ़ कर के भी उन्हें फिर से पढने में बहुत मजा आता था।
डिग्री-सेंटीग्रेड जैसे शब्द का मतलब तो बड़े होने के बाद पता चला बचपन में तो भरी दुपहरी में घुमा करते थे। फिर वो आम के पेड़ से कच्ची केरी तोड़ कर खाना और वो भी नमक और मिर्ची के साथ आज भी याद कर मुह मैं पानी आ जाता हे, कुछ केरी घर में भी ले जाते थे और फिर मम्मी उस के साथ पुदीना, मिर्ची और गुड के साथ खट्टी मीठी चटनी बनाया करती थी। इसी मौसम में जंगल जलेबी भी खूब तोड़ के खाया करते थे।
दुपहर में जब मोहल्ले में आइसक्रीम वाले की लकड़ी के डंडे की एक विशेष प्रकार की आवाज आती तो मन खिल उठता था मम्मी से 25-25 पैसे लेके वो बर्फ वाली लाल, नारंगी आइसक्रीम खाने का मजा ही कुछ और था. कुल्फी का स्वाद भी लाजवाब था. बर्फ के गोला ले के अलग अलग प्रकार के शरबत डाल कर खाना बड़ा अच्छा लगता था । गन्ने का रस दो रुपये का एक गिलास आता था पर पैसे ज्यादा नहीं होते थे इसलिए एक रुपये का आधा गिलास रस ही पिया करते थे। कैम्पा कोला, थ्रिल, थम्स-अप जैसे कोल्ड ड्रिंक पीना बहुत बड़ी पार्टी माना जाता था।
गर्मियों की छुट्टियों का पुरे साल भर इंतज़ार रहता था तो उसका एक मुख्य कारण था कॉमिक्स। साल भर भर गुल्लक में पैसे इकट्ठे करते थे और इनसे लाइब्रेरी से कॉमिक्स ला के पढ़ा करते थे , वो चाचा चौधरी का कंप्यूटर से भी तेज़ दिमाग, वो साबू के गुस्से से जुपिटर पे ज्वालामुखी फट पड़ना, वो पिंकी और बिल्लू की शरारतें, नागराज के शारीर से निकलने वाले सांप, वो सुपर कमांडो ध्रुव की फाइटिंग , बांकेलाल और हवालदार बहादुर की हंसी से भरपूर हरकतें आज भी याद आती हे तो मन को गुदगुदा देती हे. मनोज कॉमिक्स की राजा रानी की कहानियां मन को बहुत लुभाती थी। बड़ी दीदी को नावेल पसंद था तो उनके लिए नावेल लाना पड़ता था. जब थोड़े से बड़े हुए तो बाल पॉकेट बुक्स पढने लगे, राजन-इकबाल के जासूसों कारनामें बड़े मजेदार होते थे।
आज कल लाइट का ना होना परेशानी का सबब होता हे पर बचपन में जब शाम और रात को अक्सर लाइट जाया करती थी जब पूरा मोहल्ला घर के बहार अपनी आँगन या छतों पर होता था , और शुरू होता था “ बैठे बैठे क्या करें करना हे कुछ काम शुरू करो अन्ताक्षरी ले के प्रभु का नाम.....” और जिसे गाना नहीं भी आता वो भी गाना गाता था।

शाम होते ही घर की छत को झाड पोंछ कर पानी से सींचा जाता था ताकि सारी गर्माहट निकल जाए, रात को खाना खाने के बाद छत पर लाइन से बिस्तर लागाये जाते थे, हलकी हलकी चलने वाली हवा बिस्तर पर लेट कर खुले आकाश को निहारना, और अपनी कल्पनाशीलता से आकाश में नई नई आकृतियाँ देखना, बड़े सुकून वाले पल थे वो। मम्मी पूछा करती थी आकाश में सप्तऋषि और ध्रुव तारा कहाँ हे...और हम आकाश में उन्हें खोजा करते थे। छत पे एक कोने में ठन्डे पानी से भरी सुराही और गिलास भी रखी जाती थी जिससे बार बार पानी निकल कर ठंडा पानी पीते थे...रात में मम्मी की कहानियां सुनते सुनते कब नींद आ जाती थी पता हा नहीं पड़ता था।

आज सारी सुख सुविधाओं के होने के बाद भी लाखों रुपये खर्च करके भी हम वो गर्मी की छुट्टियों का मज़ा और सुकून नहीं खरीद सकते.

AMIT
 
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on: Apr 24, 2018
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tags: Poem
language: hi

सुरत ए हाल मस्त मस्त दिल, जरा़ जरा़ रखीए
गुल सा हसीन आयना दिल, जरा़ जरा़ रखीए

पाना क्या है जिंदगी, मिटने की फितरत रखीए
रुह से रुहाना मेलमिलाप दिल, जरा़ जरा़ रखीए

हसरत है उड जाना, सातवें आसमान के पार ही
ख्वाईश रुहाना परिन्दा दिल, जरा़ जरा़ रखीए

बयाँन नही हो सकता, हाल ए दिल बिरहाना
भीगी पलकों में ईन्जाऱ दिल, जरा़ जरा़ रखीए

मैं मिट जाये,तु मिट जाये, दुई का भंडा फूट जाए
एक में मिलकर एकाकार दिल , जरा़ जरा़ रखीए
 
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on: Apr 24, 2018
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tags: Channdni
language: hi


खुद चले आओ या बुला भेजो।
रात अकेले बसर नहीं होती॥

हम ख़ुदाई में हो गए रुसवा।
मगर उनको ख़बर नहीं होती॥

किसी नादाँ से जो कहो जाये।
बात वह मुख़्तसर नहीं होती॥

जब से अश्कों ने राज़ खोल दिया।
चार अपनी नज़र नहीं होती॥

आग दिल में लगी न हो जब तक।
आँख अश्कों से तर नहीं होती॥ ❤️

................... ''चाँदनी ''💋
 
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on: Apr 22, 2018
ratings: 2

tags: Poem
language: hi

छलका कर जा़म ,नज़रों का साकी गज़ब किया
चुल्लुभर पी , नसनस में हुन्नर तेरा गज़ब किया

इतमिनान तुजे है, दिल दाग़दार तो नही होगा
बेताब दिल, महोबत में मालामाल गज़ब किया

सूरते-हाल क्युं पुछते हो , मरिज़ ए महोबत का
दुआ ओर दवा का असर , दिल पर गज़ब किया

आईना ए दिल साफ , आप नज़र में नूर भरते हो
रुहाना खेल खेल में , रुहानी नूर ने गज़ब किया

पता ना चला, बात ही बात में ,बात बढ गइ कैसै
अन्जा़मे ईश्क हकीकी ने, कमाल गज़ब किया
 
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on: Apr 22, 2018
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tags: Channdni
language: hi


ऐसे मौसम भी गुज़ारे हम ने
सुबहें अपनी थीं शामें उस की

ध्यान में उस के ये आलम था कभी
आँख महताब की यादें उस की

फ़ैसला मौज-ए-हवा ने लिक्खा
आँधियाँ मेरी बहारें उस की

चेहरा मेरा था निगाहें उस की
ख़ामुशी में भी वो बातें उस की

मेरे चेहरे पे ग़ज़ल लिखता गया
शेर कहती हुई आँखें उस की

शोख़ लम्हों का पता देने लगीं
तेज़ होती हुई साँसें उस की

नीन्द इस सोच से टूटी अक्सर
किस तरह कटती हैं रातें उस की

दूर रह कर भी सदा रहती है
मुझ को थामे हुए बाहें उस की

...........................''चाँदनी ' 💞
 
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on: Apr 20, 2018
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tags: friends
language: hi

मेरे दूध का कर्ज़ मेरे ही खून से चुकाते हो
कुछ इस तरह तुम अपना पौरुष दिखाते हो
दूध पीकर मेरा तुम इस दूध को ही लजाते हो
वाह रे पौरुष तेरा तुम खुद को पुरुष कहाते हो
हर वक्त मेरे सीने पर नज़र तुम जमाते हो
इस सीने में छुपी ममता क्यों देख नहीं पाते हो
इक औरत ने जन्मा ,पाला -पोसा है तुम्हें
बड़े होकर ये बात क्यों भूल जाते हो
तेरे हर एक आँसू पर हज़ार खुशियाँ कुर्बान कर देती हूँ मैं
क्यों तुम मेरे हजार आँसू भी नहीं देख पाते हो
हवस की खातिर आदमी होकर क्यों नर पिशाच बन जाते हो
हमें मर्यादा सिखाने वालों तुम अपनी मर्यादा क्यों भूल जाते हो
हमें मर्यादा सिखाने वालों तुम अपनी मर्यादा क्यों भूल जाते हो
 
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on: Apr 19, 2018
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tags: s.s
language: hi

Papa ki pari hun mai mama ki gudiya rani..
Dadi ki ladli hun mai dada ji ki dulari👰

Udti phirti hun mai gaon k hariyalion Mai titli banker..
Sapna Dekhti hun chhand chune ki pankh apni phelakr💃

Pyar ki bhuki hun bs pyar hi chahti hun..
Ladki har ghar ki beti hei kayee bar suni hun👧

Mujhe na tha pata pyar ka ye alag alag roop..
Kisika pyar lage pyara kisika pyar nehi kabool💕

Log pyar k naam pe Karte hei chhal hmse..
Hawas apna mitane Karte hei mohra hame 💔

Kabhi teacher to kabhi padosi chhalte hei hame..
Kabhi ristedar to kabhi Dushman dikhate rang apne 😢

Noch noch kar hawas puri karte hai apna..
Phir gala ghot marte kabhi jala hi dalte🔥

Pari ki Chand ka sapna toot jati hei..
Mama ki gudiya Kahi kho jati Hai😢

Kabhi agar Zinda bach v gayee to zindegi kis kaam ki..
Tute sapnon ko samet Te ya papa k jhuka sar uchha karti🙍

Esi zindegi se mukti hi bs ek Rasta dikhta Hai hame..
Khud lelete hei yesi zindegi chaljate Sabko piche chodke 🎗

Duniya mai bs rehjati hai yaadein Hamari..
Kabhi Asifa kabhi nirbhaya Najane Kitne gumnam hei Hamari💐


****************************************************************************
Itnisi guzarish hei hume ..
Jo kisike Bhai papa ya dost bane..
Riste naam se nehi nivao agar DIL se..
Insaniyat kabhi nehi tilmilayega..
Dushron k behen beti ya doston ko dekhke.

*****************************************************************************
 
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on: Apr 19, 2018
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tags: Chandnni
language: hi



मैं सोचती रही रात भर, वो क्या सोचता होगा,
वो अपने दिल की धड़कनों में कहीं खो रहा होगा|

कभी बात करते-करते कोई लफ़्ज़ छिटका होगा,
होंठों पे आते-आते मेरा नाम लौटा होगा|

मुड़-मुड़ के आईने में देखा होगा बार-बार
मुग़ालतन मेरी सूरत खुद में देखता होगा|

क्यों लड़ता है वो मुझसे इतना बरस-बरस कर,
तन्हाईयों में उसका दिल पसीजा तो ज़रुर होगा।

मैं जानती हूँ तुम में, है जुनुन बे-शुमार
तेरी चमक के आगे वो ''चाँदनी'' बुझ गया होगा।
.
......................... ''चाँदनी'' 💞
 
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on: Apr 17, 2018
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tags: Neel
language: hi

Prince? ?????
पिताजी जोर से चिल्लाते हैं ।
प्रिंस दौड़कर आता है पूछता है...
क्या बात है पिताजी?
पिताजी- तूझे पता नहीं है आज तेरी बहन रश्मि आ रही है? वह इस बार हम सभी के साथ अपना जन्मदिन मनायेगी..अब जल्दी से जा और अपनी बहन को लेके आ, हाँ और सुन...तू अपनी नई गाड़ी लेके जा जो तूने कल खरीदी थी..उसे अच्छा लगेगा,
प्रिंस - लेकिन मेरी गाड़ी तो मेरा दोस्त ले गया है सुबह ही...और आपकी गाड़ी भी ड्राइवर ये कहके ले गया की गाड़ी की ब्रेक चेक करवानी है।
पिताजी - ठीक है तो तू स्टेशन तो जा कीसी की गाड़ी या किराया करके? उसे बहुत खुशी मिलेगी ।
प्रिंस - अरे वह बच्ची है क्या जो आ नहीं सकेगी? आ जायेगी आप चिंता क्यों करते हो कीसी टैक्सी या आटो लेकर,
पिताजी - तूझे शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुए? घर मे गाडि़यां होते हुए भी घर की बेटी कीसी टैक्सी या आटो से आयेगी?
प्रिंस - ठीक है आप जाओ मुझे बहुत काम है मैं जा नहीं सकता ।
पिताजी - तूझे अपनी बहन की थोड़ी भी फिकर नहीं? शादी हो गई तो क्या बहन परायी हो गई क्या उसे हम सबका प्यार पाने का हक नहीं? तेरा जितना अधिकार है इस घर में उतना ही तेरी बहन का भी है। कोई भी बेटी या बहन मायका छोड़ने के बाद वह परायी नहीं होती।
प्रिंस - मगर मेरे लिए वह परायी हो चुकी है और इस घर पे सिर्फ मेरा अधिकार है।
तडाक ...अचानक पिताजी का हाथ उठ जाता है प्रिंस पर और तभी माँ भी आ जाती है ।
मम्मी - आप कुछ शरम तो किजीऐ ऐसे जवान बेटे पर हाँथ बिलकुल नहीं उठाते।
पिताजी - तुमने सुना नहीं इसने क्या कहा, ?अपनी बहन को पराया कहता है ये वही बहन है जो इससे एक पल भी जुदा नहीं होती थी हर पल इसका ख्याल रखती थी। पाकेट मनी से भी बचाकर इसके लिए कुछ न कुछ खरीद देती थी। बिदाई के वक्त भी हमसे ज्यादा अपने भाई से गले लगकर रोई थी।
और ये आज उसी बहन को पराया कहता है।
प्रिंस -(मुस्कुराके) बुआ का भी तो आज ही जन्मदिन है पापा...वह कई बार इस घर मे आई है मगर हर बार आटो से आई है..आप कभी भी अपनी गाड़ी लेकर उन्हें लेने नहीं गये...माना वह आज तंगी मे है मगर कल वह भी बहुत अमीर थी । आपको मुझको इस घर को उन्होंने दिल खोलकर सहायता और सहयोग किया है। बुआ भी इसी घर से बिदा हुई थी फिर रश्मि दी और बुआ मे फर्क कैसा। रश्मि मेरी बहन है तो बुआ भी तो आपकी बहन है।
पापा... आप मेरे मार्गदर्शक हो आप मेरे हिरो हो मगर बस इसी बात से मैं हरपल अकेले में रोता हूँ। की तभी बाहर गाड़ी रूकने की आवाज आती है....तब तक पापा प्रिंस की बातों से पश्चात की आग मे जलकर रोने लगे और इधर प्रिंस भी... रश्मि दौड़कर आके पापा मम्मी से गले मिलती है..लेकिन उनकी हालत देखकर पूछती है की क्या हुआ पापा?
पापा - तेरा भाई आज मेरे भी पापा बन गये हैं ।
रश्मि - ए पागल...नई गाड़ी न? बहुत ही अच्छी है मैंने ड्राइवर को पिछे बिठाकर खुद चलाके आई हूँ और कलर भी मेरी पशंद का है।
प्रिंस - happy birthday to you दी...वह गाड़ी आपकी है और हमारे तरफ से आपको birthday gift..
बहन सुनते ही खुशी से उछल पड़ती है की तभी बुआ भी अंदर आती है ।
बुआ - क्या भैया आप भी न, ??? न फोन न कोई खबर अचानक भेज दी गाड़ी आपने, भागकर आई हूँ खुशी से। ऐसा लगा पापा आज भी जिंदा हैं ..
इधर पिताजी अपनी पलकों मे आंशू लिये प्रिंस की ओर देखते हैं और प्रिंस पापा को चुप रहने का इशारा करता है।
इधर बुआ कहती जाती है की मैं कितनी भाग्यशाली हूँ की मुझे बाप जैसा भैया मिला,
ईश्वर करे मुझे हर जन्म मे आप ही भैया मिले...पापा
मम्मी को पता चल गया था की...ये सब प्रिंस की करतूत है मगर आज फिर एक बार रिश्तों को मजबूती से जुड़ते देखकर वह अंदर से खुशी से टूटकर रोने लगे। उन्हें अब पूरा यकीन था की...मेरे जाने के बाद भी मेरा प्रिंस रिश्तों को सदा हिफाजत से रखेगा
बेटी और बहन एक दो बेहद अनमोल शब्द हैं
जिनकी उम्र बहुत कम होती है । क्योंकि शादी के बाद एक बेटी और बहन किसी की पत्नी तो किसी की भाभी और किसी की बहू बनकर रह जाती है।
शायद लड़कियाँ इसी लिए मायके आती होंगी की...
उन्हें फिर से बेटी और बहन शब्द सुनने को बहुत मन करता होगा
 
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on: Apr 17, 2018
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tags: Chandnni
language: hi

.

आवारा हैं गलियों में मैं और मेरी तनहाई
जाएँ तो कहाँ जाएँ हर मोड़ पे रुसवाई

ये फूल से चहरे हैं हँसते हुए गुलदस्ते
कोई भी नहीं अपना बेगाने हैं सब रस्ते
राहें हैं तमाशाई राही भी तमाशाई

मैं और मेरी तन्हाई

अरमान सुलगते हैं सीने में चिता जैसे
कातिल नज़र आती है दुनिया की हवा जैसे
रोटी है मेरे दिल पर बजती हुई शहनाई

मैं और मेरी तन्हाई

आकाश के माथे पर तारों का चरागाँ है
पहलू में मगर मेरे जख्मों का गुलिस्तां
है आंखों से लहू टपका दामन में बहार आई

मैं और मेरी तन्हाई

हर रंग में ये दुनिया सौ रंग दिखाती है
रोकर कभी हंसती है हंस कर कभी गाती है
ये प्यार की बाहें हैं या मौत की अंगडाई

मैं और मेरी तन्हाई

.........................चाँदनी ' 🔥
 
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on: Apr 13, 2018
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tags: Poem
language: hi

इक टक ,पलकें ठहर सी गई
जहाँ आसमाँ धरती मिल गई

वोह अहेसास , सुकुन भर गई
मंजिल आप में ही मिल गई

रात का सन्नाटा,झिलमिल चाँद
टिमटिमाटी , रोशनी मिल गई

महकती हवाँए , चहकते परिन्दे
गुल ए दिल ,नजाकत मिल गई

बाहरी सतह पर मौज़ ए दरिया
गौहर दिल , रुुहानियत मिल गई

पाना क्या ,खोना क्या यहाँ पर
मंजिल ए हुश्न, हकीकी मिल गई
 
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on: Apr 10, 2018
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tags: friends
language: hi

जाने कैसे कैसे ख्वाब देखता हूँ,
जब भी तेरे चेहरे की किताब देखता हूँ.

तेरा हरेक हर्फ रौशन करता है मुझे,
मैं तुझे देखता हूँ के महताब देखता हूँ.

कुछ ऐसा नशा है तेरी निगाहों में,
लगता है जैसे मैं शराब देखता हूँ.

तू कहता है मुझसे इश्क नहीं करता,
पर मिलने को हमेशा बेताब देखता हूँ.

जब तन्हा होता हूँ सोचता हूँ तुझे,
फिर आँखों से उठता सैलाब देखता हूँ.
 
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on: Apr 9, 2018
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tags: Poem
language: hi

बेदाग है दिल , नजरों की पहेचान चाहिए
हसीन हुश्न है, फूलों की नजाकत चाहिए

मिले हर सुबह , सुनहरी किरणें खुरशीद भी
मिटने की फितरत , वाली शबनमी चाहिए

गुंजते हैं भँवर, खुशमिजाज़ फूलों,पर सदा
मौसम ए ईश्क, फीर बसंत बहार ही चाहिए

है ईबादत का जुनून , तस्बीह में नाम ए वफा
हक़ से पाना हकीकी, दिल में,महोबत चाहिए


 
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on: Apr 8, 2018
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tags: Chandnni
language: hi

बरसात होगी अश्‍क की मेरे लि‍ए कभी।
रोया करेंगेआप भी मेरे लि‍ए कभी।

ढक जायेगी गुलों से मेरी क़ब्र देखना,
ऐसी बहार आएगी मेरे लि‍ए कभी।

ऐ ज़ख्‍़म दे के भूलने वाले ज़रा बता,
मरहम की तूने फ़ि‍क्र की मेरे लि‍ए कभी।

दोज़ख़ बनी है आज वो मेरे फ़ि‍राक़ में,
दुनि‍या जो एक स्‍वर्ग थी मेरे लि‍ए कभी।

'चाँदनी ' न था खयाल कि महँगी पड़ेगी यूँ,
इक बेवफ़ा की दोस्‍ती मेरे लि‍ए कभी।
......................................
'चाँदनी '
 
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on: Apr 6, 2018
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tags: friends
language: hi

इतना आसां नहीं होता "अलविदा" कहना,
उसे ज़रूर मुश्किलों से याराना रहा होगा.

बेहद करीब आकर मुझे तन्हा कर गया वो,
यकीनन वो दुश्मन कोई पुराना रहा होगा.

ये आँखें जो अब तुम्हें बेज़ार नज़र आती हैं,
इनमें कभी किसी का ठिकाना रहा होगा.

सांस थमने के बाद भी अश्क रुकते ही नहीं,
ये भी कोई बदकिस्मत दीवाना रहा होगा.
 
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on: Mar 30, 2018
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tags: friends
language: hi

खोई-खोई अँखियों में सपने सजाएंगे हम
मुझे याद आने वाले,तुम्हें याद आएंगे हम

काटे न कटेंगी ये रातें हमारे बिन
जागा करोगे तुम तारों को गिन-गिन
दिल में समाने वाले,तुम्हें न भुलाएंगे हम
मुझे याद आने वाले,तुम्हें याद आएंगे हम

बातें हज़ारों हैं जो तुमको सुनानी हैं
यादें हज़ारों हैं जो तुमको बतानी हैं
नग़में सुहाने सारे,तुमको सुनाएंगे हम
मुझे याद आने वाले, तुम्हें याद आएंगे हम

बहकी हवाएं होंगी महकी फ़ज़ाओं में
आना ही होगा तुम्हें मेरी इन बाँहों में
हमको रिझाने वाले तुमको लुभाएंगे हम
मुझे याद आने वाले, तुम्हें याद आएंगे हम

खोई-खोई अँखियों में सपने सजाएंगे हम
मुझे याद आने वाले, तुम्हें याद आएंगे हम
 
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