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on: Mar 4, 2020
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tags: friends
language: hi

मैं कहीं लापता हो गया हूँ
शायद आपका हो गया हूँ

खुद को नज़र आता नहीं
मैं कोई हादसा हो गया हूँ

पहुँचोगे कैसे मुझ तक
मैं खोया पता हो गया हूँ

तुझे पाकर तो लगता है
खुद से यूं जुदा हो गया हूँ

वफ़ा ढ़ोते ढ़ोते आखिर दम
शायद बेवफ़ा हो गया हूँ

दिलवर मुझे इतना बता दे
तेरा मैं क्या क्या हो गया हूँ
 
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on: Mar 4, 2020
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tags: friends
language: hi

कुछ लोग भी हमसे इस कदर खफ़ा हैं
या तो वो बेवफ़ा या हम बेवफ़ा हैं !!

नब्ज देख कर बता देता है वो हबीब
मेरी हर मर्ज़ की आप ही तो दवा हैं !!

वो कभी समझते नहीं मेरे जज्बात को
और हम भी आजकल उन्हीं पर फ़िदा हैं !!

कब से जारी है मुझको तलाश अपनी ही
आज तक न जाने हम कहाँ लापता हैं !!

अपने आपको छल रहे हैं लोग आजकल
न जाने अब कहाँ देखते आइना हैं !!
 
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on: Mar 3, 2020
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tags: My Diary✍
language: hi

ना खड़ा तू देख गलत को
अब तो तू बवाल कर

चुप क्यों है तू
ना तो अपनी आवाज दबा
अब तो तू सवाल कर

ना मिले जवाब
तो खुद जवाब तलाश कर

क्यों दफन है सीने में तेरे आग
आज आग को भी
तू जलाकर राख कर

कमियों को ना गिन तू
ना उसका तू मलाल कर

कुछ तो अच्छा ढूंढ ले
ना मन को तू उदास कर
जो भी पास है तेरे
तू उससे ही कमाल कर

तू उठ कुछ करके दिखा
ना खुद को तू बेकार कर

खुद मिसाल बनकर
जग में तू प्रकाश कर
सोचता है क्या तू
तू वक्त ना खराब कर

जिंदगी जो है तो
जी के उसका नाम कर
रास्ते जो ना मिले
तो खुद की राह निर्माण कर



काल के कपाल पर
करके तांडव तू दिखा
दरिया जो दिखे आग का
प्रचंड अग्नि बन कर
तू उसे भी पार कर
 
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on: Mar 1, 2020
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tags: My Diary✍
language: hi


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मैं ? मैं हूँ एक प्यारी सी धरती

कभी परिपूर्णता से तृप्त और कभी प्यासी आकाँक्षाओं में तपती.

और तुम? तुम हो एक अंतहीन आसमान
संभावनों से भरपूर और ऊंची तुम्हारी उड़ान
कभी बरसाते हो अंतहीन स्नेह और कभी.....
सिर्फ धूप......ना छांह और ना मेंह.

जब जब बरसता है मुझ पर
तुम्हारा प्रेम और तुम्हारी कामनाओं का मेंह
खिल उठता है मेरा मन और
अंकुरित होती है मेरी देह.

युगों युगों से मुझ पर हो छाए
मुझे अपने गर्वित अंकमें समाये
सदियों का अटूट हमारा नाता है ...लेकिन
फिर भी कभी सम्पूर्ण ना हो पाता है.

धरती और आसमान....मिलते हैं तो सिर्फ क्षितिज में
सदियों से यही होता आया है ...और होगा.
जितना करीब आऊं
तुम्हारा सुखद संपर्क उतना ही ओझल हो जाता है.

लेकिन इन सब से मुझे कैसा अनर्थ डर?
अंतहीन युगों के अन्तराल से परे ...जब चाहूँ...

सतरंगी इन्द्रधनुषी रंगों की सीढियां चढ़ती हूँ
रंगीले कोहरे में रोमांचक नृत्य करती हूँ
परमात्मा के रचित मंदिर में तुम पर अर्चित होती हूँ
तुम्हें छू कर, तुम्हें पा कर, तुम पर समर्पित हो कर
फिर खुद ही खुद तक लौट आती हूँ.

अब ना मिलने की ख़ुशी है और ना ही ना मिलने का गम
मैं अब ना मैं हूँ और ना तुम हो तुम.... हैं तो बस अब सिर्फ हैं हम.

सिर्फ कहने भर को हूँ तुमसे मैं दूर.....

तुम्हारे आकर्षण की गुरुता में गुँथी
परस्पर आत्माओं के तृषित बंधन में बँधी
तुम्हारी किरणों के सिंधूरी रंगों से सजी
तुम्हारे मोहक संपर्क में मेरी नस नस रची.

मैं रहूँगी तुम्हारी प्रिया धरती
और रहोगे तुम मेरे प्रिय आसमान
मैं? मैं हूँ आसमान की धरती, और तुम?
तुम हो धरती के आसमान.
 
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on: Feb 20, 2020
ratings: 8

language: hi

वो दिन तो दिन थे यार, बचपन के दिन थे यार !!

माँ का आलिंगन, पापा की डाँट,
भाई बहन के साथ नटखट सा व्यव्हार,
वो दिन तो दिन थे यार........

बहानो से घर से निकल जाना,
दोस्तों के साथ खेलना और खाना,
वो दिन तो दिन थे यार........

बिना किस्से कहानी सुने नींद ना आना,
माँ की गोद में थक हार कर सो जाना,
वो दिन तो दिन थे यार........

छोटी छोटी बातो पर रूठ जाना,
पल में हँसना और सब भूल जाना,
वो दिन तो दिन थे यार........

अधूरा होमवर्क और स्कूल ना जाने का बहाना,
पापा का डांटना, और माँ का हमेशा बचाना,
वो दिन तो दिन थे यार........

मेहमानों के आने पर माँ के आँचल में छिप जाना,
धीरे से मुस्कुराना और नजरे चुराना,
वो दिन तो दिन थे यार........

सुबह का नाश्ता और खाना ना खाने का बहाना,
ना खाने की जिद से माँ को सताना,
वो दिन तो दिन थे यार......

पेपर की टेंशन और ट्यूशन का बहाना,
यारो दोस्तों के साथ गप्पे लड़ाना,
वो दिन तो दिन थे यार......

कागज की नाव और बारिश में नहाना,
गावं की गलियाँ और वो बेफिक्रा जमाना,
वो दिन तो दिन थे यार.......

बाग़ बग़िया और तितलियों का ठिकाना,
घड़े का पानी और पीपल के नीचे सुस्ताना,
वो दिन तो दिन थे यार......

चाँद चांदनी और परियो का फ़साना,
सुहाने सपने और नींद का टूट जाना,
वो दिन तो दिन थे यार......

पर ना जाने कहा चला गया वो जमाना,
बचपन ही है एक सफर सुहाना,
वो दिन तो दिन थे यार, बचपन के दिन थे यार !!
 
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on: Feb 15, 2020
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tags: My Diary...
language: hi

घर की जब याद आती है...
सच यार घर की जब याद आती है,
उस वक़्त आंखो से आँसू से रुक नहीं पाती है,
बहोत याद आते है!
वो घर,वो गलियां
वो दोस्त,वो नदानिया
न जाने कब और कहाँ,
छूट गई वो बचपन और वो शैतानिया,

सच यार घर की जब याद आती है,
माँ तू और तेरी कमी हमेशा रह जाती है,
काश,काश की लौट पाता उस बचपन में,
माँ तू फिर से मुझे सवारती,
और दुलारती उस पल में,
सच माँ तेरी कमी यहाँ
बहोत रहती है,
तेरे बिन पल-पल
बहोत मुश्किल से कटती है,
माँ कोई नहीं पूछने वाला
यहाँ तेरे लाल से,
की खाना खाया की नहीं,
भूख लगी है या नहीं,
सच माँ तेरे वो
जबरजस्ती खाना खिलाने
में भी बहोत प्यार नजर आता है,
माँ जैसा कोई नहीं
ये तुझसे दूर होने के बाद
आज महसूस हो पाया है,
सच माँ तेरी कमी यहाँ
बहोत रहती है,
तेरे बिन पल-पल
बहोत मुश्किल से कटती है,

सच यार घर की जब याद आती है,
घर से दूर रहना
क्या होता है,
उस वक़्त पता चल जाती है,
घर को अपने फैमली को
मिस करना उनसे पूछो
जो घर से दूर रहते है,
बिन माँ-बाप,बिन दोस्तों
के न जाने उनके पल
कैसे कटते है.....
 
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on: Feb 14, 2020
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language: hi

..................कायराना दुस्साहस !........................

पुलवामा में देश के दुश्मनों ने दिया बर्बरता को अंजाम ।
चालीस सेनिकों का खून बहाकर किया नीचता भरा काम ॥

इनके सात पुश्तै याद करें ऐसी दो इन दहशतगर्दों को सजा ।
फिर कभी भारत की तरफ ना देखें चखा दो ऐसा मजा ॥

जो बहा है खून शहीदों का वो पवित्र खून जाने ना पाए जाया ।
जो पाल रहा है इन दहशतगर्दों को उस मुल्क का ही करदो सफाया॥

इस नामुराद ओछी हरकत से इस देश को डरा ना पाओगे ।
कट जाए जो देश की आन के लिए उस सर को झुका ना पाओगे

जिसने अपना बेटा, भाई, पति खोया है होगी नहीं उनकी भरपाई।
फिर भी देश की आन के लिए जान देने में पिछे नहीं हटेगा फौजी भाई ॥

पुलवामा में दहशतगर्दों ने की है जो नीच हरकत करते हैं उसकी निंदा ।
पर खाते हैं आज कसम उन गुनाहगारों में एक भी ना बच पाए जिंदा ॥

अमर शहीदों की कुर्बानी में जहाँ पूरे देश की आँखे हुई है नम ।
वहीं शहीदों के अपनों की छाती हुई चौड़ी, भले हो अपनों को खोने का गम ॥
............................................................................द्वारा............राजेश सिंह ॥

 
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on: Feb 10, 2020
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language: hi

----हारना मत तुम हिम्मत-------

छ:दिन तक सिने पर उठाया तुमने बफॆ का पहाड़।
धरती मां के लाल तुमने मौत को भी दिया पछाड़।
तुम्हारी सलामती की दूवा के लिए उठे हैं करोड़ो हाथ।
याहां तक आकर छोड़ना मत तुम हमलोगो का साथ।

कुदरत और विधाता को शायद यही मंजुर था होना।
नौ साथी खो चूके हम अब तुमको नही चाहते खोना।
किसी भी सुरत मे हमे निराश ना करना ओ हनुमन्ता।
तुम्हारे होश मे आने की राह देख रहे सभी और दो-दो माता।

अमी तो बाकी हे उतारना तुमको मां के दुध का कजॆ।
अभी तुमको और नीभाना हे धरती मां के रक्षा का फजॆ।
तुमको बचाकर रहेगें चाहे देश को चुकानी पड़े कोई भी किमत।
बस शतॆ यही हे कि किसी भी सुरत हारना मत तुम हिम्मत।

डाक्टरो की कोशिश और देशवासियो की दूवा लाए रगं।
प्रार्थना में जुड़े है हजारों हाथ जीत के आवो तुम जंग ।।।

...............................................................द्वारा- राजेश सिहं । ...old post

( VERY SORRY TO KNOW THAT LANCE NAIK HANUMANTAPPA IS NO MORE TO HEAR OUR PRAYER. MAY HIS SOUL REST IN PEACE )

 
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on: Feb 10, 2020
ratings: 8

language: hi

...........चेतन का स्वर्ग ......................
तेरी धरती से बढ़कर
स्वर्ग क्या होगा माँ..?
कल कल करती यह झरने
गाना गाते पंखी ,पेड़ पौधे .......
पहरा देती हिमालय ,
चरण धोती हुई सागर ,
और कहाँ होंगे माँ ...?
यहीं है मेरा स्वर्ग ....!
डराए ,धमकाए, मार गिराए ,
मगर रोक न पाए ' चेतन ' को ,
आप की सेवा पूरा कर दिए हम
आराम करने से पहले ..........!
स्वर्ग क्या करना आप के बिना ..?
लौट आये हैं ठुकराके हम ,
चालीस दिन की मेहमान नवाजी ,
उन की, हमें रास न आयी ..........
हम ने कहा ,जब हुआ ,
भगवान से सामना ,
' हमें यहां नहीं रहना ,
माँ की सेवा है करना....'........
माँ ,हमें कभी दूर न करना ,
अपनी आँचल की छाव से ,
मेरा स्वर्ग तो यहीं है ,
आप की चरणों तले .. ...........शरू ७.४.१७ ...५.२५ ऍम

CHETAN CHEETAH

CRPF Bravehearts Chetan Cheetah Awarded Kirti Chakra
Apart from them, 38 others security personnel were awarded gallantry medals for operations in Kashmir while 142 others received the award for anti-naxal operations.
Cheetah was wounded during a joint operation in the Hajin area of Bandipora district in North Kashmir on February 14 . 2017. He survived after nine bullet injuries and staying comatose for over a month.
HE JOINED HIS DUTY AFTER A YEAR..
 
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on: Feb 5, 2020
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language: hi

Ghayal Kar Ke Mujhe Usne Poochha !!
Karoge Kya Phir Mohabbat Mujhse !!!!

Lahoo-Lahoo Tha Dil Mera Magar !!
Honthon Ne Kaha Beintha-Beintha !!!!
 
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on: Jan 27, 2020
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language: hi

पलकों पर होंगी बूंदें,पर मंद-मंद मुस्काओगे।।

वो भी क्या दिन थे जब,संदेशों में बातें होती थीं।
हम दोनों थे खोये रहते,दुनियाँ की रातें होती थीं।।

उन बीती घड़ियों में जब कदम कदम मैं साथ चलूंगी।
फिर अपनी जिद पर शायद,मन ही मन पछताओगे।।

मैं कैसे कैसे मन में स्वप्न सजाया करती थी।
तेरी मोहक बातों में मैं खो जाया करती थी।।

अस्तित्व मिटाया मैंने,तेरा रूप सजाने को।
अब बोलो आईना कैसे,जान मेरी झुठलाओगे।।

क्यों मेरा था दामन छोड़ा,बस इतना समझाकर जाते।
मैंने था यह जीवन सौंपा,इसको आग लगाकर जाते।।

तुम खुश हो यह सोच सोच,मैनें खुद को बहलाया है।
तुम बतलाओ कैसे,अपने मन को समझाओगे।।

कल जब जीवन के पन्नों पर,तुम पीछे को जाओगे। ‌‌‌
 
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on: Jan 22, 2020
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language: hi

बाळासाहेब ठाकरे ......बेताज़ बादशाह ( born..२३.१.१९२६.. died-१७.११.२०१२)

............" बेताज़ बादशाह..''........

कोई कहे
" शिव सेना प्रमुख नहीं रहे "
कोई कहे
"हिन्दू ह्रदय सम्राट नहीं रहे "
सब कहते हैं
" एक मराठी मनुष्य न रहा "
हमें तो लगता है
" एक रिश्तेदार चला गया "
एक बेमिसाल ,
निडर ,
" महा नायक चला गया "
महाराष्ट्र का एक
" बेताज़ बादशाह चला गया "
,...................................................BY शरू ...........

आज इनका जन्मदिन का बधाई हो
 
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by: Saloni
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on: Jan 14, 2020
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language: hi

उमंग की पतंग उड़ाते
बच्चों को बहुत लुभाते
हमे बचपन के दिन याद आते
खेलते दोस्तो के संग
उड़ाते रंग बिरंगे पतंग
चलो फिर से बच्चे बन जाए
आओ मिलकर उड़ाते पतंग
अपनो के संग
खुशियां मनाते
काश पतंग के डोर पकड़ कर आसमान में उड़ जाते
दिल की उमंग है पतंग
बिन प्रेम बेजान है पतंग
दिल में उमंग है
जीत जाएंगे एक दिन हम
ये जीवन की जंग
गर बढ़ाते जाएं ऐसे कदम
हमारा हौसला है हरदम बुलंद
मीठे गुड में मिल जाए तिल
पतंग उड़ी खिल जाए दिल
आप सब को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं
 
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on: Dec 31, 2019
ratings: 7

tags: sharuu
language: hi

,,,,,,आखिर क्यों ,,?

आँखों से आंख मिले
क्यों मिले ,,?
सांसों से सांस मिले
क्यों मिले,,?
विचार से विचार टकराये
तो क्यों टकराये ,,?,,,,,,,,,,,.........शरू

XXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXX

रोज़ मरनेवालों को
रोये कौन ,,,,,?
एक व्यक्ति की
नहीं रहने से
कुछ न बदलती है
सूरज भी उगेगा
और चाँद भी ,,,,,,,,,,..................शरू

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

जुकना सीखो
अच्छी भी नहीं
इतना गुरुर ,,,,
आम भरी पेड़ जुकता है
जमींन की तरफ
जुकना सीखो ,,,,,........................,शरू

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
आया है तो
जाना भी है
राजा महाराजा
राम कृष्णा साधु संत
कोई भी नहीं रुक पाए ,,,,,,,,,............शरू

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

फूलों से फूलों को
उड़ना ही काम है भ्रमर का
एक का मकरंद हुआ ख़तम
तो दूसरा फूल को ढूंढ़ता है
बस इक परवाना ही तो है
शमा केलिए जान भी देता है ,,,,,,,,,.....शरू

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

है छह बज ते ही सूर्य अस्त होता है
सागर के आगोश में चले जाता है
दिन भर का थकानवह मिटाता है
कहता है दिन भर वह बिजी रहता है
उसकी किरणे पहुंचा नहीं हमतक
इसमें उसकी क्या खता है ,,,,?,,,,,,,,,,,शरू
XXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXX
 
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on: Dec 25, 2019
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tags: My Diary...
language: hi

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..

हैं फ़ूल रोकते, काटें मुझे चलाते..
मरुस्थल, पहाड चलने की चाह बढाते..
सच कहता हूं जब मुश्किलें ना होती हैं..
मेरे पग तब चलने मे भी शर्माते..
मेरे संग चलने लगें हवायें जिससे..
तुम पथ के कण-कण को तूफ़ान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..

अंगार अधर पे धर मैं मुस्काया हूं..
मैं मर्घट से ज़िन्दगी बुला के लाया हूं..
हूं आंख-मिचौनी खेल चला किस्मत से..
सौ बार म्रत्यु के गले चूम आया हूं..
है नहीं स्वीकार दया अपनी भी..
तुम मत मुझपर कोई एह्सान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..

शर्म के जल से राह सदा सिंचती है..
गती की मशाल आंधी मैं ही हंसती है..
शोलो से ही श्रिंगार पथिक का होता है..
मंजिल की मांग लहू से ही सजती है..
पग में गती आती है, छाले छिलने से..
तुम पग-पग पर जलती चट्टान धरो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..

फूलों से जग आसान नहीं होता है..
रुकने से पग गतीवान नहीं होता है..
अवरोध नहीं तो संभव नहीं प्रगती भी..
है नाश जहां निर्मम वहीं होता है..
मैं बसा सुकून नव-स्वर्ग “धरा” पर जिससे..
तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..

मैं पन्थी तूफ़ानों मे राह बनाता..
मेरा दुनिया से केवल इतना नाता..
वेह मुझे रोकती है अवरोध बिछाकर..
मैं ठोकर उसे लगाकर बढ्ता जाता..
मैं ठुकरा सकूं तुम्हें भी हंसकर जिससे..
तुम मेरा मन-मानस पाशाण करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंज़िल आसान करो..
 
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by: Saloni
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on: Dec 25, 2019
ratings: 0

language: hi

काश तुम्हे पढ़ कर समझ सकती
तुम उस किताब की तरह हो
तुम से मिलकर सारा हिसाब ले सकती
मालूम तो चले तुम कौन सी हो हस्ती
फिर भी पूरी किताब बड़े शिद्दत से पढ़ती
और खो जाती
तुम्हारे हर अल्फ़ाज़ है गहरे
कौन से रहस्य से भरे
मेरे समझ से परे
 
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on: Dec 22, 2019
ratings: 6

tags: Sharuu
language: hi

·

..........हमारी घर ......
छोटा सा एक
घर होगा हमारी
नदी किनारे ...........
खेत से जब तुम
घर आवोगे
तब तक मै
बैठ के बाते करुँगी
मछलियों से ..............
और ठंडक पहुंचाती हुई
हवावों से ........
सुबह होते ही
तुम निकलोगे ,
काम करने ..
मै तो
लगजावूँगी सुबह की
नाश्ता करने .........
बच्चों को
स्कूल भी तो है भेजने ..............by शरू...
 
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on: Dec 21, 2019
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tags: Ro!
language: hi

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो
मुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो

वो फ़िराक़ हो या विसाल हो, तेरी याद महकेगी एक दिन
वो ग़ुलाब बन के खिलेगा क्या, जो चिराग़ बन के जला न हो

कभी धूप दे, कभी बदलियाँ, दिलो-जाँ से दोनों क़ुबूल हैं
मगर उस नगर में न क़ैद कर, जहाँ ज़िन्दगी का हवा न हो

वो हज़ारों बाग़ों का बाग़ हो, तेरी बरक़तों की बहार से
जहाँ कोई शाख़ हरी न हो, जहाँ कोई फूल खिला न हो

तेरे इख़्तियार में क्या नहीं, मुझे इस तरह से नवाज़ दे
यूँ दुआयें मेरी क़ुबूल हों, मेरे दिल में कोई दुआ न हो

कभी हम भी जिस के क़रीब थे, दिलो-जाँ से बढ़कर अज़ीज़ थे
मगर आज ऐसे मिला है वो, कभी पहले जैसे मिला न हो
 
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on: Dec 21, 2019
ratings: 5

language: hi

लिपटा लो बांहो में मुझे कुछ इस तरह कि,
अगर मौत आए तो मुसकुराहट को पता न चलें और
रुह को बाहों की कैद से निकलने का मन ना करे |
 
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on: Dec 3, 2019
ratings: 1

language: hi

दिल को दिल से मिल जाने दें
दिल मे' दर्द न रह पायेगा,
प्यार-वफा जब साथ रहेंगे
जीवन सुखमय हो जायेगा।
 
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