फिर आज उसने दुआओं में माँगा था मुझे फिर आज उसने बेईन्तहा चाहा था मुझे,

by: Sham .. (on: Dec 18, 2017)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: फिर आज उसने दुआओं में माँगा था मुझे फिर आज उसने बेईन्तहा चाहा था मुझे,
फिर आज उसने दुआओं में माँगा था मुझे
फिर आज उसने बेईन्तहा चाहा था मुझे,

फिर आज उसके ख्वाबों-ख्यालों में था, सिर्फ मैं
फिर आज उसे सबसे ज्यादा याद आया था मैं……………………..

पर उसकी बेबसी तो देखो, अब वो मुझसे दूर है
उसके ख्वाब शीशे की तरह, टूटकर चूर-चूर हैं

नींद भी नहीं आती है, उसे रातों में
मानो उम्र गुजर रही हो, किसी की यादों में……………………..

शायद ये फासला, अब कभी खत्म होगा हीं नहीं
क्योंकि किस्मत को हमारा मिलन मंजूर हीं नहीं

वो भी तन्हा रोती है, और इधर खुश मैं भी नहीं
शायद प्यार की मंजिल यहाँ भी नहीं, वहाँ भी नहीं……………………..
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953 days ago
very nice
 
 
953 days ago
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953 days ago
Nice sham ji
 
 
963 days ago
very tuchi
 
 
963 days ago
Rating: 10
 
 
963 days ago
v touchy...true feelings.
वो भी तन्हा रोती है, और इधर खुश मैं भी नहीं
शायद प्यार की मंजिल यहाँ भी नहीं, वहाँ भी नहीं

niceone
 
 
963 days ago
Rating: 10
 
 
963 days ago
Rating: 10
 
 
963 days ago
Nice
 
 
963 days ago
Beshaque... Aap ko hi chaha hai
 
 
963 days ago
Rating: 8
 
 
963 days ago
SUPERB
 
 
963 days ago
Rating: 10
 
 
963 days ago
Rating: 10
 
 
963 days ago
पर उसकी बेबसी तो देखो, अब वो मुझसे दूर है
उसके ख्वाब शीशे की तरह, टूटकर चूर-चूर हैं
 
 
963 days ago
Rating: 10
 
 
963 days ago
beautifully written
 
 
963 days ago
Rating: 10
 
 
964 days ago
Nice
 
 
964 days ago
Like
 
 
964 days ago
Rating: 10
 
 
964 days ago
पर उसकी बेबसी तो देखो, अब वो मुझसे दूर है
wh wh sham..great fr
 
 
964 days ago
वो भी तन्हा रोती है, और इधर खुश मैं भी नहीं
शायद प्यार की मंजिल यहाँ भी नहीं, वहाँ भी नहीं.....Bahut khub
 
 
964 days ago
Rating: 10
 
 
964 days ago
फिर आज उसने दुआओं में माँगा था मुझे
फिर आज उसने बेईन्तहा चाहा था मुझे
फिर आज उसके ख्वाबों-ख्यालों में था, सिर्फ मैं
फिर आज उसे सबसे ज्यादा याद आया था मैं……………………..
पर उसकी बेबसी तो देखो, अब वो मुझसे दूर है
उसके ख्वाब शीशे की तरह, टूटकर चूर-चूर हैं
नींद भी नहीं आती है, उसे रातों में
मानो उम्र गुजर रही हो, किसी की यादों में……………………..
शायद ये फासला, अब कभी खत्म होगा हीं नहीं
क्योंकि किस्मत को हमारा मिलन मंजूर हीं नहीं
वो भी तन्हा रोती है, और इधर खुश मैं भी नहीं
शायद प्यार की मंजिल यहाँ भी नहीं, वहाँ भी नहीं……………………..
पर उसने कहा है मुझसे…….
कि एक दिन हम दोनों एक हो जायेंगे
किस्मत ने जिन्हें जुदा किया है…….
वो प्रेमी कल फिर मिल जायेंगे…………………
 
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