मेरी मुट्ठी से............

by: upendra Singh (on: Dec 21, 2017)
Category: Other   Language: Hindi
tags: friends
मेरी मुट्ठी से ये बालू सरक जाने को कहती है
ये ज़िन्दगी भी अब मुझसे थक जाने को कहती है

मैं अपनी लडख़ड़ाहट से परेशान हूँ मगर पोती
मेरी ऊँगली पकड़ के दूर तक जाने को कहती है

जिसे हम ओढ़ के निकले थे आग़ाज़े जवानी में
वो चादर ज़िन्दगी की अब मसक जाने को कहती है

कहानी ज़िन्दगी की क्या सुनाये अहले महफ़िल को
शकर घुलती नहीं और खीर पक जाने को कहती है
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