वहशत-ए-ज़फ़ा से खौफ़ खाता हूँ वर्ना

by: Roopak kumar karn (on: Dec 21, 2017)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: all
*वहशत-ए-ज़फ़ा से खौफ़ खाता हूँ वर्ना,*
*कोई शिकायत नहीं मुझे नाम-ए-मोहब्बत से *

*दिल तोड़ न दें कहीं दिल में रहने वाले, इसलिए,*
*देखता नहीं मैं उनको निगाह-ए-अक़ीदत से *

*मेरा इश्क़ सरेआम बदनाम न हो जाए कहीं,*
*हर घड़ी डरता हूँ मैं उस आलम-ए-अज़ीयत से .*
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