खुद को क़ैद देखा...

by: upendra Singh (on: Dec 28, 2017)
Category: Other   Language: Hindi
tags: friends
अपनी आँखों में दरिया उमड़ते देखा,
जब कभी आँखों से अश्क उभरते देखा,
.
एक आँख के अश्क़ में था ग़म-ए-जुदाई,
दूजे में खुद को बिखरते देखा,
.
लरज़ती थी एक में मेरी अपनी तन्हाई
दूजे में अरमानो को सिमटते देखा,
.
वजूद ना उनका रहा, ना मेरा गुमान,
जब कभी मैंने दिल का आइना देखा,
.
मर भी जाता तो क्या ग़म था लेकिन,
ठहरे हुए वक़्त में खुद को क़ैद देखा...
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950 days ago
superb
 
 
950 days ago
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954 days ago
लरज़ती थी एक में मेरी अपनी तन्हाई 
दूजे में अरमानो को सिमटते देखा, 
Bht Badhiya !!
 
 
954 days ago
Rating: 10
 
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