Missing those times

by: removed (on: Jan 8, 2018)
Category: Other   Language: Hindi
tags: Neel
बचपन की यादे !!!!
1990 का दूरदर्शन और हम -
1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर टीवी के सामने बैठ जाना
2."रंगोली"में शुरू में पुराने फिर नए गानों का इंतज़ार करना
3."जंगल-बुक"देखने के लिए जिन दोस्तों के पास टीवी नहीं था उनका घर पर आना
4."चंद्रकांता"की कास्टिंग से ले कर अंत तक देखना
5.हर बार सस्पेंस बना कर छोड़ना चंद्रकांता में और हमारा अगले हफ्ते तक सोचना
6.शनिवार और रविवार की शाम को फिल्मों का इंतजार करना
7.किसी नेता के मरने पर कोई सीरियल ना आए तो उस नेता को और गालियाँ देना
8.सचिन के आउट होते ही टीवी बंद कर के खुद बैट-बॉल ले कर खेलने निकल जाना
9."मूक-बधिर"समाचार में टीवी एंकर के इशारों की नक़ल करना
10.कभी हवा से ऐन्टेना घूम जाये तो छत पर जा कर ठीक करना
बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं आता,
दोस्त पर अब वो प्यार नहीं आता।
जब वो कहता था तो निकल पड़ते थे बिना घडी देखे,
अब घडी में वो समय वो वार नहीं आता।
बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं आता...।।।
वो साईकिल अब भी मुझे बहुत याद आती है, जिसपे मैं उसके पीछे बैठ कर खुश हो जाया करता था। अब कार में भी वो आराम नहीं आता...।।।
जीवन की राहों में कुछ ऐसी उलझी है गुथियाँ, उसके घर के सामने से गुजर कर भी मिलना नहीं हो पाता...।।।
वो 'मोगली' वो 'अंकल Scrooz', 'ये जो है जिंदगी' 'सुरभि' 'रंगोली' और 'चित्रहार' अब नहीं आता...।।।
रामायण, महाभारत, चाणक्य का वो चाव अब नहीं आता, बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं आता...।।।
वो एक रुपये किराए की साईकिल लेके,
दोस्तों के साथ गलियों में रेस लगाना!
अब हर वार 'सोमवार' है
काम, ऑफिस, बॉस, बीवी, बच्चे;
बस ये जिंदगी है। दोस्त से दिल की बात का इज़हार नहीं हो पाता।
बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं आता...।।
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Comments

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877 days ago
Realy bahut hi yadgar
 
 
877 days ago
ये बंबई का उस वक्त का आखो देखा हाल आपने उजागर कर दिया प्यारे नील ! बहुत खूब !! सराहनीय लेखन !!!
 
 
877 days ago
Rating: 9
 
 
877 days ago
It's the reality of life.. Present becomes past and in future we all become nostalgic.. Neel great flash-back and beautifully expressed Your boyhood time.
 
 
877 days ago
Rating: 10
 
 
877 days ago
We all have lost that time, Neelu 😥
 
 
877 days ago
Rating: 10
 
 
878 days ago
Rating: 10
 
 
878 days ago
Rating: 10
 
 
878 days ago
Wrd less bachpan ke wo din
 
 
878 days ago
Rating: 10
 
 
878 days ago
Thanks dear dost
 
 
878 days ago
Are muje to English nahi ati thi fir bhi english news dekhti rehti thi . Really wo Sunday bahot Yaad ata hai
 
 
878 days ago
Rating: 10
 
 
878 days ago
भूतकाळ याद आया
 
 
878 days ago
Rating: 7
 
 
879 days ago
really so nice post...
Doordarshan ke wo sab prog..jo hum sabi dekhte rahe hain
 
 
879 days ago
Rating: 10
 
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