यारा

by: anand anand (on: Jan 18, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Poem
युंही गैर बनकर, तेरा रुखसत होना
मुनासीब तो नही, महोबत मे यारा

टुटकर गीरा हुं जमींन पर , ओ चाँद,
तेरी चाँदनी से दुर हुं , महोबत में यारा

बडे खोखले है रिस्ते , कच्चे धागों के,
जजबात मे डुबा हुं ,,महोबत मे यारा

सितमगर तो नही, मेरा करम नेक सदा
चाहत की रंगींनीयों में, महोबत मे यारा

दुरस्त कर राहे वफा ,मंजिल तक मेरी
सीसकियाँ लेती रुह मेरी महोबत मे यारा
score: 9.43918
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1101 days ago
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1101 days ago
बडे खोखले है रिस्ते , कच्चे धागों के,
जजबात मे डुबा हुं ,,महोबत मे यारा
truth
 
 
1101 days ago
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1104 days ago
Thank you,
 
 
1104 days ago
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1104 days ago
superb
 
 
1104 days ago
Rating: 10
 
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