यारा

by: anand anand (on: Jan 18, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Poem
युंही गैर बनकर, तेरा रुखसत होना
मुनासीब तो नही, महोबत मे यारा

टुटकर गीरा हुं जमींन पर , ओ चाँद,
तेरी चाँदनी से दुर हुं , महोबत में यारा

बडे खोखले है रिस्ते , कच्चे धागों के,
जजबात मे डुबा हुं ,,महोबत मे यारा

सितमगर तो नही, मेरा करम नेक सदा
चाहत की रंगींनीयों में, महोबत मे यारा

दुरस्त कर राहे वफा ,मंजिल तक मेरी
सीसकियाँ लेती रुह मेरी महोबत मे यारा
score: 9.43918
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866 days ago
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866 days ago
बडे खोखले है रिस्ते , कच्चे धागों के,
जजबात मे डुबा हुं ,,महोबत मे यारा
truth
 
 
866 days ago
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869 days ago
Thank you,
 
 
869 days ago
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869 days ago
superb
 
 
869 days ago
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