अहेसास हुं मैं

by: anand anand (on: Jan 27, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Poem
मिलता है आसमान ओर धरती जहांं पर,
क्षितिज़ पर , लकीर बनकर खडा हुं मैं
फुल में खुश्बु बनकर, महकता अहेसास,
शबनमी भीगा, जजबात बनकर खडा हुं मैं
टुटकर बिखरता हुं , पत्ते की सरसराहट में
पतझड का अलम , बीरहाना अहेसास हुं मैं
रंज ओ अलम ,सीकवा सीकायत अपनो से,
दिल्लगी दोस्ताना दिल में ही , अहेसास हुं मैं
जिंदादिली है ,साँस की रफतार जिंदगी मेरी,
मौत महेबुबा मेरी साथ, वोह अहेसास हुं मैं



















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1033 days ago
lvly
 
 
1033 days ago
Rating: 10
 
 
1034 days ago
बेशक , याराना उलफत जिंदगी की,
मौत तो बस ,अलविदा ,मेरी कहानी
 
 
1034 days ago
Rating: 9
 
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