...आखिर कब तक ..?.......

by: sharu------ . (on: Feb 1, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: SHARU...शरू ,,,,,,,,,n .............Raj
.......आखिर कब तक ..?..............
.१.
यह क्या हो रहा है देश के अंदर
यह लोग है की खुदते बन्दर ..?
आपस में लड़ते रहेंगे आखिर कब तक
एक झंडा वंदन भी शांति से नहीं होता .............शरू ३.१५
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आज देश की हालात पर खून के आँसू है रो रहा ।
देशभक्तो ने बलिदान देकर इस देश को था सवारा ॥
कभी आपसी सदभाव का मिसाल था ये देश हमारा ।
अब ख़त्म हो गया है आपस में ही लोगों में भाईचारा ॥
...............................................................राजेश ॥..३.२०
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२.
यही मै पूछ रही हूँ अवाम से
यह जो हो रहा है, क्यों हो रहा है ..?
क्या लोग भूलगये अंग्रेजोंके अन्याय ..?
या भूलगये मुग़लों की क्रूर शासन ...?.............शरू ..३.२५
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शायद भूल ही गयें हैं लोग उस वक्त की बरबादी ।
कद्र ही नहीं कर पाए हम जो बेशकीमती आजादी ॥
बन कर रहा गया है ये धरती इंसानियत का मकबरा ।
दरअसल में चंद लोगों का ही है ये सब किया धरा ॥
...............................................................राजेश ॥३.३३
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भारत माँ का बेटे है सब ,सब ने कहा
मिलके रहो तो सब के लिए अच्छा
नहीं तो फिर से बात जाएंगे टुकड़ों में
दर्द भरी गुलामी की ज़ंज़ीरे पहने पड़ेंगे .............शरू ..३.३९
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कद्र करो हर धर्म का कहना है यही इस दीवाने का ।
देश बढ़ रहा है आगे स्वागत करो इस नए ज़माने का ॥
खतरा मंडरा रहा है देश का टुकडों में बँट जाने का
फ़िर शायद तुमको मौका भी न मिलेगा पछताने का ॥
.................................................................राजेश ॥ ३.४९
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Comments

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1026 days ago
Very nice lines
 
 
1026 days ago
Rating: 10
 
 
1027 days ago
आज देश की हालात पर खून के आँसू है रो रहा ।
देशभक्तो ने बलिदान देकर इस देश को था सवारा ॥
 
 
1027 days ago
Rating: 10
 
 
1029 days ago
बन कर रहा गया है ये धरती इंसानियत का मकबरा ।
दरअसल में चंद लोगों का ही है ये सब किया धरा ॥
 
 
1029 days ago
Rating: 10
 
 
1030 days ago
वाह वाह वाह शरू क्या कहने बहुत खूब बेहद उम्दा नायाब बेमिसाल व लाजवाब पेशकश । लगता है इतने दिन मुझसे मुँह फूलाकर खूब प्रेक्टिस किया है है लिखने का ।बहुत निखार आगया है कलम की धार भी पैनी हो गई है । बहुत खूबसूरत रचना है । धन्यवाद
 
 
1030 days ago
Rating: 10
 
 
1030 days ago
tnq sham
 
 
1030 days ago
Nice
 
 
1030 days ago
Rating: 10
 
 
1030 days ago
tnq simple for honouring........though u don't understand
 
 
1030 days ago
i enjoyed writing jugal bandi with u as ever.........tnq Raj ......u came running on my request.
 
 
1030 days ago
Rating: 10
 
 
1030 days ago
Rating: 10
 
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