इन्तजाऱ ए अलम

by: anand anand (on: Feb 1, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Poem
चैन ओ सुकुन नसीब हो जाये
बीरहाना बादल , छट जाये
बरखा हो आब ए हयात की
दिल का नूराना हाल हो जाये
नैनो में छुपी प्यास गज़ब की है
रेगीस्तानी लिबास में बिरहाना,
पलकें बिछाये इन्तजार ए अलम
दिदार ए यार, सुकुन से हो जाये
मैं तो मिला ही नही , ना बिछडा ,
रुखसत एसी , मनाही हो जाये,
हो गला सीकवा ,लाजीम है यारा
दिल्लगी भी थोडी थोडी की जाये
हुश्न ए आईना ,हाजरा हजूर है
भीतर नूराना, मालामाल हो जाये,
score: 9.30162
average: 10.0
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1029 days ago
wonderful write up sir
 
 
1029 days ago
Rating: 10
 
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