My words

by: anand anand (on: Mar 28, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Poem
चलो सफर ए जिंदगी , लफ्ज से परे
आशियाँ ए नूर, लहद अंजाम से परे

जख्म का कहर, ओर दर्द भी है
दुआ बेहिसाब मरहमी अंदाज भी है

हमदर्द का सिलसिला , दर्द से है
मैं बेदर्द बेजख्म भी, कहरा क्यु रहा

उलजने अब सुलजने लगी है क्या करु?
यह ईल्म कैसा, मेरी हयाति !,,क्या करुं ?

वजह ओर वजूद ,दोनो मीट ही गए
बेहयात हुं ,बेमिसाल जिंदगी यहा

टुटकर बीखरना ,खास जानता हु मैं ,सितारा
ओ, चाँद रहेमत के कुछ पल, मुस्कराने दे मुजे
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969 days ago
Anjam see pare ...muskurane de mujhe
 
 
969 days ago
Rating: 8
 
 
969 days ago
Rating: 10
 
 
971 days ago
SUPERB
 
 
971 days ago
Rating: 10
 
 
973 days ago
Rating: 10
 
 
973 days ago
मैं बेदर्द बेजख्म भी, कहरा क्यु रहा
 
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