चाहिए

by: anand anand (on: Apr 9, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Poem
बेदाग है दिल , नजरों की पहेचान चाहिए
हसीन हुश्न है, फूलों की नजाकत चाहिए

मिले हर सुबह , सुनहरी किरणें खुरशीद भी
मिटने की फितरत , वाली शबनमी चाहिए

गुंजते हैं भँवर, खुशमिजाज़ फूलों,पर सदा
मौसम ए ईश्क, फीर बसंत बहार ही चाहिए

है ईबादत का जुनून , तस्बीह में नाम ए वफा
हक़ से पाना हकीकी, दिल में,महोबत चाहिए


score: 9.49107
average: 9.83333
Ratings: 7
 
« send to friends»
URL (link) to this writing. You can copy and paste this in your email to send to your contacts:
 
Not good
Ok
Excellent!
 
 
 

Comments

[View All Comments]
 
959 days ago
nice
 
 
959 days ago
Rating: 9
 
 
959 days ago
nice
 
 
959 days ago
Rating: 10
 
 
959 days ago
Thank you all
 
 
960 days ago
sach me shandaar
 
 
960 days ago
Rating: 10
 
 
960 days ago
superb
 
 
960 days ago
Rating: 10
 
 
960 days ago
nice
 
 
960 days ago
Rating: 9
 
 
960 days ago
जख्म की रंगीनीयो में ,
दर्द ए गम एहसास छुपा है

कुछ कतरा , बहता हुआ
लफ्ज छुपा लाजवाब है
 
 
960 days ago
Thank you
 
 
961 days ago
very nice friend,,,,
 
 
961 days ago
Rating: 10
 
 
961 days ago
nice
 
 
961 days ago
Rating: 10
 
 
961 days ago
Thank you
 
 
961 days ago
Thank you
 
 
961 days ago
Rating: 9
 
 
961 days ago
खुद पुकारेगी मंज़िल तो ठहर जाऊँगा…

वरना मुसाफिर खुद्दार हूँ, यूँ ही गुज़र जाऊँगा…!!
 
 
961 days ago
Rating: 10
 
 
962 days ago
निगाहें करम ,बस झुक जाना
फितरत ए फन, फना हो जाना

आती जाती ,लहरें समंदर दिल में
साहिल से आकर ,टकरा ही जाना
 
 
962 days ago
निगाहें करम ,बस झुक जाना
फितरत ए फन, फना हो जाना

आती जाती ,लहरें समंदर दिल में
साहिल से आकर ,टकरा ही जाना
 
 
962 days ago
nice
 
[View All Comments]