आँखों से उठता सैलाब देखता हूँ......

by: upendra Singh (on: Apr 10, 2018)
Category: Other   Language: Hindi
tags: friends
जाने कैसे कैसे ख्वाब देखता हूँ,
जब भी तेरे चेहरे की किताब देखता हूँ.

तेरा हरेक हर्फ रौशन करता है मुझे,
मैं तुझे देखता हूँ के महताब देखता हूँ.

कुछ ऐसा नशा है तेरी निगाहों में,
लगता है जैसे मैं शराब देखता हूँ.

तू कहता है मुझसे इश्क नहीं करता,
पर मिलने को हमेशा बेताब देखता हूँ.

जब तन्हा होता हूँ सोचता हूँ तुझे,
फिर आँखों से उठता सैलाब देखता हूँ.
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957 days ago
Rishto k saare manzar chup chap dekhta hu
Haathon me sab k khanjar chup chap dekhta hu
 
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