🔥मैं और मेरी तन्हाई🔥

by: Chandni ✨ॐ🙏' (on: Apr 17, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Chandnni
.

आवारा हैं गलियों में मैं और मेरी तनहाई
जाएँ तो कहाँ जाएँ हर मोड़ पे रुसवाई

ये फूल से चहरे हैं हँसते हुए गुलदस्ते
कोई भी नहीं अपना बेगाने हैं सब रस्ते
राहें हैं तमाशाई राही भी तमाशाई

मैं और मेरी तन्हाई

अरमान सुलगते हैं सीने में चिता जैसे
कातिल नज़र आती है दुनिया की हवा जैसे
रोटी है मेरे दिल पर बजती हुई शहनाई

मैं और मेरी तन्हाई

आकाश के माथे पर तारों का चरागाँ है
पहलू में मगर मेरे जख्मों का गुलिस्तां
है आंखों से लहू टपका दामन में बहार आई

मैं और मेरी तन्हाई

हर रंग में ये दुनिया सौ रंग दिखाती है
रोकर कभी हंसती है हंस कर कभी गाती है
ये प्यार की बाहें हैं या मौत की अंगडाई

मैं और मेरी तन्हाई

.........................चाँदनी ' 🔥
score: 9.36026
average: 9.5
Ratings: 9
 
« send to friends»
URL (link) to this writing. You can copy and paste this in your email to send to your contacts:
 
Not good
Ok
Excellent!
 
 
 

Comments

[View All Comments]
 
899 days ago
FLOOD!
 
 
952 days ago
v nice
 
 
952 days ago
Rating: 10
 
 
952 days ago
very true dear
 
 
952 days ago
Rating: 9
 
 
952 days ago
Rating: 7
 
 
952 days ago
Rating: 10
 
 
952 days ago
Rating: 10
 
 
952 days ago
Good lines.
 
 
952 days ago
Rating: 10
 
 
952 days ago
अच्छा
 
 
952 days ago
अच्छा
 
 
952 days ago
Rating: 6
 
 
952 days ago
10
 
 
952 days ago
Rating: 10
 
 
952 days ago
Waaahhhh...Waaahhhh...Chandni tu to bahut achi shayari karti hai. ...
 
 
953 days ago
Nice piece of a Ghazal...nicely rendered by Jagjit Singhji.... Thanks for sharing the poem.
 
 
953 days ago
Rating: 10
 
 
953 days ago
💔 काश! वो भी आकर हमसे
कह दें, मैं भी तन्हा हूँ....
तेरे बिन, तेरी तरह,
तेरी कसम, तेरे लिए.
 
[View All Comments]