Gajab kiya

by: anand anand (on: Apr 22, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Poem
छलका कर जा़म ,नज़रों का साकी गज़ब किया
चुल्लुभर पी , नसनस में हुन्नर तेरा गज़ब किया

इतमिनान तुजे है, दिल दाग़दार तो नही होगा
बेताब दिल, महोबत में मालामाल गज़ब किया

सूरते-हाल क्युं पुछते हो , मरिज़ ए महोबत का
दुआ ओर दवा का असर , दिल पर गज़ब किया

आईना ए दिल साफ , आप नज़र में नूर भरते हो
रुहाना खेल खेल में , रुहानी नूर ने गज़ब किया

पता ना चला, बात ही बात में ,बात बढ गइ कैसै
अन्जा़मे ईश्क हकीकी ने, कमाल गज़ब किया
score: 9.30162
average: 10.0
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Comments

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948 days ago
awsm
 
 
948 days ago
Rating: 10
 
 
948 days ago
बेशक ! बाँध कर कफन नीकले है,
वोह जीने मरने वाले ,से परे रहते है

जीस्म जाँ ,इक मौका फकत यहाँ
अंजाम ए महोबत हकीकी मे रहेते है
 
 
948 days ago
Rating: 9
 
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