.💞 आज का इंसा .💞

by: Chandni ✨ॐ🙏' (on: May 7, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Chandnni

.💞 💞

ये इंसा है केवल चमन देखता है,
सरेराह बेपर्दा तन देखता है।

हवस का पुजारी हुआ जा रहा है,
कली में भी कमसिन बदन देखता है।

जलालत की हद से गिरा इतना नीचे,
कि मय्यत पे बेहतर कफन देखता है।

भरी है दिमागों में क्या गंदगी सी,
ना माँ-बाप,भाई-बहन देखता है।

बुलंदी की ख्वाहिश में रिश्ते भुलाकर,
मुकद्दर का अपने वजन देखता है।

ख़ुदी में हुआ चूर इतना,कहें क्या,
पड़ोसी के घर को 'रहन' देखता है।

नहीं "तेज" तूफानों का खौफ़ रखता,
नहीं वक्त की ये चुभन देखता है।

हर इक शख्स इसको लगे दुश्मनों-सा,
फ़िजाओं में भी ये जलन देखता है।

हवस की हनक का हुनर इसमें उम्दा,
जमाने को खुद-सा नगन देखता है।

............................... ''चाँदनी'' 🔥
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934 days ago
Beautiful description of nature of human
 
 
934 days ago
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934 days ago
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934 days ago
The great description of the HUMAN LUST in the form of poem SALUTE !
 
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