क्यूँ देखें ज़िन्दगी को,........

by: upendra Singh (on: May 10, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
क्यूँ देखें ज़िन्दगी को, क्यूँ दें हम मुँह दिखाई
इस दौर-ए-ज़िन्दगी में ,हमने तो मुँह की खाई है

अनचाहे लोग हैं और अनचाही सी है दुनिया
बेगानी सी लगती है,बेमानी सी ये दुनिया
क्यूँ टोकें ज़िन्दगी को, क्यूँ लांघें लम्बी खाई
इस दौर-ए- ज़िन्दगी में हमने तो मुँह की खाई

काँटों में था ये दामन,फूलों की चाह भी थी
अपनी हर ख़ुशी में इक सुलगती सी आग भी थी
क्यूँ न की ज़िन्दगी ने ,इस दिल की सुनवाई
इस दौर-ए -ज़िन्दगी में, हमने तो मुँह की खाई

बेहतर से और बेहतर ना हो सकी ये ज़िन्दगी
हिस्सों में हम बाँट बैठे अदनी सी ये ज़िन्दगी
क्यूँ होती है ज़िन्दगी में,ग़ैरों की ही आवाजाही
इस दौर-ए ज़िन्दगी में हमने तो मुँह की खाई

क्यों देखें ज़िन्दगी को,क्यूँ दें हम मुँह दिखाई
इस दौर-ए-ज़िन्दगी में,हमने तो मुँह की खाई
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778 days ago
Mast
 
 
778 days ago
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778 days ago
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778 days ago
lovely
 
 
778 days ago
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930 days ago
दर्द को ये एहसास दिलाना था , दर्द कैसे होता हैं....

सो मैंने आँखों से आँसुओ को मिटा दिया....!!!!
 
 
930 days ago
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931 days ago
nice
 
 
931 days ago
Nice
 
 
931 days ago
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931 days ago
nice
 
 
931 days ago
nice
 
 
931 days ago
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931 days ago
Nicely written but too negative
 
 
931 days ago
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931 days ago
SUPERB
 
 
931 days ago
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931 days ago
awesome
 
 
931 days ago
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931 days ago
Nyc written :
 
 
931 days ago
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