💞कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता💞.

by: Chandni ✨ॐ🙏' (on: May 10, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Chandnni

💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞
कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता
तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता

तर्क-ए-दुनिया का ये दावा है फ़ुज़ूल ऐ ज़ाहिद
बार-ए-हस्ती तो ज़रा सर से उतारा होता

वो अगर आ न सके मौत ही आई होती
हिज्र में कोई तो ग़म-ख़्वार हमारा होता

ज़िन्दगी कितनी मुसर्रत से गुज़रती या रब
ऐश खुशी की तरह अगर ग़म भी गवारा होता

अज़मत-ए-गिर्या को कोताह-नज़र क्या समझें
अश्क अगर अश्क न होता तो सितारा होता

लब-ए-ज़ाहिद पे है अफ़साना-ए-हूर-ए-जन्नत
काश इस वक़्त मेरा अंजुमन-आरा होता

ग़म-ए-उल्फ़त जो न मिलता ग़म-ए-हस्ती मिलता
किसी सूरत तो ज़माने में गुज़ारा होता

किस को फ़ुर्सत थी ज़माने के सितम सहने की
गर न उस शख़्स की आँखों का इशारा होता

कोई हम-दर्द ज़माने में न पाया
दिल को हसरत ही रही कोई हमारा होता.
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929 days ago
बहूत खुब
 
 
929 days ago
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930 days ago
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930 days ago
wow lajawab
 
 
930 days ago
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930 days ago
v nice
 
 
930 days ago
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930 days ago
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930 days ago
WAH BAHUT KHOOB ! ......KOI HAMDARD JAMANE MEIN NA PAYA, DIL KO HASHRAT HI RAHI...KAAASH ! KOI HAMARA HOTA.!!!
 
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