इश्क की गहेराइयाँ

by: anand anand (on: May 26, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Poem



जहाँ ना मैं ,ना तुहो, बस एक अनंत आप हो
बच ना जाये हयाति , हंगामा इश्क आप हो

दुरस्त हो जाये राहे वफा ,सुकुन बस आप हो
मिले नूर ए नजर , फरिस्ता एक बस आप हो

टुटकर बीखर जाये ,दिवारे मिजाजए महोबत
हकीकत होनहार हकीकी, एक बस आप हो

दिल ए नूर दिखाए रास्ता मंजिल ए महोबत
आशियाँ ए दिलरुबाना, हरतरफ बस आप हो

दुइ का भंडा फुट जाये ,झीलमिल एक चाँद हो
मैं मै तुतु से परे रुहाना, रुहानियत बस आप हो

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800 days ago
Nice
 
 
800 days ago
Rating: 10
 
 
800 days ago
gd1
 
 
800 days ago
Rating: 10
 
 
803 days ago
आसमां मुझसे दोस्ती कर ले...
दर-ब-दर मैं भी, दर-ब-दर तू भी...
 
 
803 days ago
Rating: 10
 
 
803 days ago
खामोशी में डुब जाने की आदत है ,
यक़ीनन ,वो पल महेसूस करवाता है,

अपनी रुहानी हस्ती,युंही भुल जाते,
यादों की करवटे याद करवाता है

उफ नहीं कर सकते ,जमाने से हम,
रुहाना वोह तिलमिलाहट करवाता है

बेगुनाह हुं सबुत लाउ कहाँ से मैं,
भीतर यही गुनगुनाहट करवाता है
 
 
805 days ago
V good
 
 
805 days ago
Rating: 1
 
 
805 days ago
Thanks
 
 
805 days ago
Rating: 9
 
 
805 days ago
दुइ का भंडा फुट जाये ,झीलमिल एक चाँद हो
मैं मै तुतु से परे रुहाना, रुहानियत बस आप हो
 
 
805 days ago
Rating: 9
 
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