महफ़िल तुम्हारे लिये ही सजा रखीं है

by: upendra Singh (on: Jun 6, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
बहुत उम्मीद तुमसे लगा रखीं है।
महफ़िल तुम्हारे लिये ही सजा रखीं है।

शम्मा की है इश्क़ के नाम से रोशन।
शर्त हवाओं से हमने लगा रखीं है।

मेरी साँसों पर हुकूमत हुई जबसे तुम्हारी।
मेरी धड़कनों ने भी तुमसे ही वफ़ा रखीं है।

मुझे भूलने का जो तुम दावा करते हो।
मेरी यादें दिल में अब भी सजा रखीं है।

महफ़िल तुम्हारे लिये ही सजा रखीं है।
बहुत उम्मीद तुमसे लगा रखीं है............
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817 days ago
बहुत खूब।
 
 
817 days ago
बहुत खूब।
 
 
817 days ago
बहुत खूब।
 
 
817 days ago
बहुत खूब।
 
 
930 days ago
डुपेरब
 
 
930 days ago
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963 days ago
Thanks
 
 
963 days ago
awsm
 
 
963 days ago
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