पहलू से अंधेरे के, क्यूँ रातरानी महकी ???

by: upendra Singh (on: Jun 19, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
दिल की दहलीज़ पर ताला पड़ा रहता हैं
मुसलसल उदासी से, पाला पड़ा रहता हैं।
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इस क़दर फ़ाक़ा मिरी क़िस्मत में आया हैं
देर तलक हाथ में, निवाला पड़ा रहता हैं।
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पहलू से अंधेरे के, क्यूँ रातरानी महकी
सोच सोच के सवेरा काला पड़ा रहता हैं।
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लडखडा क्या गए ज़रा, नादानी में कदम
संग आते हर पैर में, छाला पड़ा रहता हैं।
score: 9.30162
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779 days ago
Nice
 
 
779 days ago
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779 days ago
निगाहें फकत हयात बस शून्य सी मौज ए दिल
तेरे सिवा ना कोई ,तु फैन ,बुलबुला आब दिल

हरतरफ होंशियारी नही, गुमसुदा तलाश तेरी ही
भीतर तरबतर सुकुन ,मस्त कैफियत भरा दिल्
 
 
780 days ago
लडखडा क्या गए ज़रा, नादानी में कदम
संग आते हर पैर में, छाला पड़ा रहता हैं।
 
 
780 days ago
Rating: 10
 
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