फिर भी वे बदनाम है फूलों की परवाह में।"

by: upendra Singh (on: Jul 9, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Friends
दिल लहूलुहान हुआ इश्क़ की चाह में,
फूल और काँटे हैं जिंदगी की राह में।

अज़ीब उलझन है जिंदगी के सफ़र में,
ग़ुलाब यहाँ खिलते हैं काँटों की पनाह में।

इतना ज़ुल्म न कर ओ चाँद आसमाँ पर,
फूल को काँटे कह बैठें इंतजारी की डाह में।

सागर क्या चीज है गहराई मेरे दिल की देख,
वह सरमा के पानी हुए डूबकर अथाह में।

काँटों को फूलों से मिलने की इजाज़त नहीं,
फिर भी वे बदनाम है फूलों की परवाह में।"
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Comments

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1033 days ago
Thanks friends
 
 
1035 days ago
ये मोहब्बत का बंधन भी कितना अजीब होता है
मिल जाये तो बातें लम्बी, और बिछड़ जाये तो यादें लम्बी….!!
 
 
1035 days ago
nice
 
 
1035 days ago
Rating: 10
 
 
1035 days ago
सुंदर
 
 
1035 days ago
Rating: 8
 
 
1035 days ago
nyc
 
 
1035 days ago
Rating: 9
 
 
1035 days ago
Rating: 8
 
 
1035 days ago
gd1
 
 
1035 days ago
Rating: 10
 
 
1038 days ago
मंझिल तक पहुंचना है
तो कभी राह के काँटो से मत घबराना
क्योकि
कांटे ही तो बढ़ाते है रफ्तार हमारे कदमो की
 
 
1038 days ago
Rating: 10
 
 
1038 days ago
khoob ji
 
 
1038 days ago
Rating: 10
 
 
1038 days ago
Beautiful
 
 
1038 days ago
Rating: 9
 
 
1038 days ago
wonderful lines..
 
 
1038 days ago
Rating: 10
 
 
1038 days ago
nice.......
काँटों को फूलों से मिलने की इजाज़त नहीं,
फिर भी वे बदनाम है फूलों की परवाह में।"
 
 
1038 days ago
Rating: 10
 
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