सिमट कर तेरी बांह में जरा सा खोना ही तो था...

by: upendra Singh (on: Jul 9, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
सिमट कर तेरी बांह में जरा सा खोना ही तो था
लगा लेती गले से मुझे जरा सा रोना ही तो था ।।

सो न पाया सारी रात जागता रहा अक्सर
घुमा देती सर पर हाथ रख कर जरा सा सोना ही तो था। ।।।

ख्वाबों की हसीन दुनिया में हम भी भ्रमण कर लेते!!
इक दूसरे में घुल कर अपना पराया जानना ही तो था ।।

नशीली आखें , बिखरे बाल ,स्वछन्द विचार हाँ यही था परिचय तुम्हारा!!
हमें बुनना प्यार का ताना -बाना ही तो था। ।

इक अजब सी कशिश है तुम्हारी रेशमी बालों में। ।
न चाहते हुए भी, मुझे उनमे रास्ता भूल जाना ही तो था। ।

देखना , चाहना , माँगना , रूठना,,या खो देना, हिस्सा है प्रेम का ।
लेकिन तुम्हे तो बस बेवफा कहलाना ही तो था। ।

इतना तनहा कर दिया , कि खुद से ही नफरत करने लगा हूँ मैं। ।
इक कदम मुझे, इक कदम तुम्हे बढ़ाना ही तो था। ।
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nyc
 
 
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nice
 
 
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wowww........how sad
 
 
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