एक और रात बीत जायेगी,.......

by: upendra Singh (on: Jul 19, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends

यकीन मानो, मैं तुम्हारे उन कैदियों में से हूँ,

जो खुले दरवाजे देखकर भी फरार नहीं होते

*फ़लक तक साथ चलने की दुआ बाद में कीजिए,*

*ज़िन्दा हूं ज़मीं पे मैं, पहले यहां तो वफ़ा कीजिए...*

कहने को तो पूरी क़ायनात पड़ी है....

सिमटना मगर मैं ,तेरी ही बाहों में चाहता हूँ .

इँतजार करते करते एक और रात बीत जायेगी,

पता हैं तुम नहीं आओगे और ये तनहाई जीत जायेगी...

कहाँ‬ मिलता है कभी कोई समझने वाला,
‪जो‬ भी मिलता है बस समझा के चला जाता है !!
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858 days ago
Beautiful words
 
 
858 days ago
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859 days ago
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859 days ago
good1
 
 
859 days ago
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860 days ago
yes it is hurtful son
 
 
860 days ago
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861 days ago
kya baat hei......v nice upen
 
 
861 days ago
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861 days ago
कहाँ‬ मिलता है कभी कोई समझने वाला,
‪जो‬ भी मिलता है बस समझा के चला जाता है !
 
 
861 days ago
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861 days ago
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861 days ago
Very nice fundamental truth
 
 
861 days ago
कहाँ‬ मिलता है कभी कोई समझने वाला,
‪जो‬ भी मिलता है बस समझा के चला जाता है !!
Wah .....Deepa
 
 
861 days ago
Rating: 8
 
 
861 days ago
nice
 
 
861 days ago
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861 days ago
VERY NICE
 
 
861 days ago
Rating: 10
 
 
861 days ago
NYC
 
 
861 days ago
कहाँ‬ मिलता है कभी कोई समझने वाला,
‪जो‬ भी मिलता है बस समझा के चला जाता है !!😗😗😗😗
 
 
861 days ago
Rating: 10
 
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