दुनियादारी....

by: 📒My Diary✍❤My Life✍ ✍.. (on: Sep 25, 2018)
Category: Other   Language: Hindi
tags: ..
पराग... दुनियादारी के बारे में कुछ नहीं
जानता था। एक दिन बस में वह अपनी जेब
से फोन निकाल रहा था कि पास खड़े एक
व्यक्ति को लगा कि वह उसकी जेब से
बटुआ निकाल रहा है। उसने पराग को
फटकारा और गालियां भी दीं। पराग ने
सफाई दी कि वह तो अपनी जेब से मोबाइल
निकाल रहा था, लेकिन गलती से उसका
हाथ सामने खड़े व्यक्ति के बटुए को छ
गया। अगले स्टॉप पर बस से उतरने के बाद
पराग को ऐसा लग रहा था, जैसे कि वह
एक चोर हो और चोरी करते पकड़ा गया
हो। चूंकि वह उसके ऑफिस का पहला
दिन था, इसलिए किसी भी कीमत पर उसे
समय पर ऑफिस पहुंचना तो था ही। पीछे
से एक और बस आ रही थी। उसने अपने
मन को समझाया और उस बस में चढ़ गया।
बस में उसके आगे एक और लड़का था, जो
कुछ-कुछ उसी की तरह दिखता था।
इत्तफाक से इस बार उस लड़के का हाथ
उसके आगे वाले व्यक्ति की जेब पर पड़
गया। ठीक जैसा पराग के साथ हुआ था,
वैसे ही आगे वाले व्यक्ति ने पलट कर उस
लड़के को दो-तीन गालियां सुनाई और
सबके सामने फटकार लगा दी। बस में
मौजूद सारे लोग उस लड़के को घूरने लगे।
हालांकि पराग पहले से बेहतर महसूस
कर रहा था। लेकिन उसे उस लड़के के
लिए बुरा लग रहा था। लेकिन पराग ने
देखा कि उस लड़के के चेहरे पर एक
शिकन तक नहीं थी, बल्कि वह तो मुस्कुरा
रहा था। पराग ने उसके कंधे पर हाथ
रखा और कहा, कोई बात नहीं भाई। मैं भी
अभी इसी परिस्थिति से गुजर कर आ रहा
हैं। इस पर वह लड़का हंसते हुए कहते।
लगा, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। ये लोग तो
मुझे पिछले बस स्टॉप से जानते हैं। जबकि
मैं खुद को पिछले बीस साल से जानता हूं।
यह सुनकर पराग स्तब्ध रह गया। उसे
उसकी जिंदगी का पहला सबक मिल गया।

हम खुद को किस नजर से देखते
हैं, यही मांयने रखता है।
score: 9.37792
average: 10.0
Ratings: 3
 
« send to friends»
URL (link) to this writing. You can copy and paste this in your email to send to your contacts:
 
Not good
Ok
Excellent!
 
 
 

Comments

[View All Comments]
 
789 days ago
nice story... readable...ये लोग तो
मुझे पिछले बस स्टॉप से जानते हैं। जबकि
मैं खुद को पिछले बीस साल से जानता हूं।
 
 
789 days ago
Rating: 8
 
 
792 days ago
Rating: 10
 
 
792 days ago
nice
 
 
792 days ago
Rating: 10
 
[View All Comments]