ग़ज़ल

by: upendra Singh (on: Oct 12, 2018)
Category: Other   Language: Hindi
tags: friends
#______ग़ज़ल
माहौल कितना गुलज़ार है
फ़िर भी दिलों में गुबार है !!

दो वक्त की रोटी के लिए
आदमी होता गुनेहगार है !!

है नियत में खोट उसकी
इन्सानियत शरमसार है !!

ये रिस्ते केवल नाम के हैं
भाई भाई में यूं दिवार है !!

जब से देखा है उसको मेरा
रहा दिल पे' न इख्तियार है !!

हमको मिलता है बेखुदी में
कि बेकरारी में भी करार है !!

उसके बगैर एक पल भी
यूं मेरा तो जीना दुश्वार है !!
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