कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है......

by: upendra Singh (on: Oct 13, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है
ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है

वो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को
वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है

रूह को शाद करे, दिल को जो पुरनूर करे
हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है

ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोकें
दिल में जो बात हो आँखों से अयाँ होती है

ज़िन्दग़ी एक सुलगती-सी चिता है 'साहिर'
शोला बनती है न ये बुझ के धुआँ होती है
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772 days ago
wow
 
 
772 days ago
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775 days ago
bin bole bolthi hi
 
 
775 days ago
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775 days ago
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775 days ago
तुम बिछडे हमे अहसास दिलाने को और कँही ऐसा न हो जाए,
तुझे याद करते करते हम तेरे बगैर जीना ही न सीख जाए..!!
 
 
775 days ago
हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी
क्यूँ तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी
 
 
775 days ago
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775 days ago
Nice
 
 
775 days ago
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775 days ago
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775 days ago
ज़िन्दग़ी एक सुलगती-सी चिता है 'साहिर'
शोला बनती है न ये बुझ के धुआँ होती है
 
 
775 days ago
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