लौट गया सर झुका कर.

by: upendra Singh (on: Oct 27, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: Friends
मै क्या करता करीब जाकर,
जो दूर रहा नजदीक आकर.

आखरी तक वो पत्थर रहा,
मैं लौट गया सर झुका कर.

किस्मत के खेल भी निराले हैं,
सिखता ही नहीं है चोट खाकर.

अपनी मोहब्बत मांग रहे हैं वो,
जख्म करता भी क्या दिखा कर.

ये कब कहा कि मैं दूर हूं तुमसे,
पर देखना हैं अब तुम्हें भुला कर
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761 days ago

किस्मत के खेल भी निराले हैं,
सिखता ही नहीं है चोट खाकर.

अपनी मोहब्बत मांग रहे हैं वो,
जख्म करता भी क्या दिखा कर.

ये कब कहा कि मैं दूर हूं तुमसे,
पर देखना हैं अब तुम्हें भुला कर
Wonderful, Thank you so much...
 
 
761 days ago
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761 days ago
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