पर्व है पुरुषार्थ का........

by: upendra Singh (on: Nov 8, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
पर्व है पुरुषार्थ का,
दीप के दिव्यार्थ का,

देहरी पर दीप एक जलता रहे,
अंधकार से युद्ध यह चलता रहे,

हारेगी हर बार अंधियारे की घोर-कालिमा,
जीतेगी जगमग उजियारे की स्वर्ण-लालिमा,

दीप ही ज्योति का प्रथम तीर्थ है,
कायम रहे इसका अर्थ, वरना व्यर्थ है,

आशीषों की मधुर छांव इसे दे दीजिए,
प्रार्थना-शुभकामना हमारी ले लीजिए!!

झिलमिल रोशनी में निवेदित अविरल शुभकामना..

आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावना!!!

दीपावली की अनन्त बधाइयाँ ..
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749 days ago
Very nice writng sir
 
 
749 days ago
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749 days ago
Ati sunder
 
 
749 days ago
Rating: 9
 
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