कुछ उलझे सवालो से डरता हे दिल......

by: upendra Singh (on: Nov 23, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
कुछ उलझे सवालो से डरता हे दिल,
जाने क्यों तन्हाई में बिखरता हे दिल,
किसी को पाने कि अब कोई चाहत न रही,
बस कुछ अपनों को खोने से डरता हे ये दिल।
वो दिल नहीं रहा वो तबीयत नहीं रही,
वो शब-ऐ-आरज़ू रोने की आदत नहीं रही,
महसूस कर रहा हूँ मैं जीने की तल्ख़ियाँ,
ऐ-चाँद मुझे तुझसे अब मोहब्बत नहीं रही...
सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो,
नजर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो,
हजारों फूल देखे हैं इस गुलशन में मगर,
खुशबू वहीं तक है जहाँ तक तुम हो.
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awesome
 
 
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Beautiful
 
 
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730 days ago
किसी को पाने कि अब कोई चाहत न रही,
बस कुछ अपनों को खोने से डरता हे ये दिल।
 
 
730 days ago
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731 days ago
excellent
 
 
731 days ago
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731 days ago
किसी को पाने कि अब कोई चाहत न रही,
बस कुछ अपनों को खोने से डरता हे ये दिल। .....right
 
 
731 days ago
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732 days ago
Thanks
 
 
732 days ago
awsm
 
 
732 days ago
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