चाँद के आईने में उसका ही चेहरा देखना......

by: upendra Singh (on: Dec 1, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
तख़्त-ओ-ताज पर थे कभी
आज खाकसार हो गए
हमने उनपर खुद को खर्च किया इस तरह
हम खुदपर ही उधार हो गए

मोहब्बत की आज यूँ बेबसी देखी,
उसने तस्वीर तो जलाई मगर राख नहीं फेंकी।
हमारे लफ्जों को थोड़ा धयान से पढ़ा करो,
हम ने सच में अपनी ज़िन्दगी बरबाद की है।

रात भर इन बन्द आँखों से भी क्या क्या देखना,
देखना एक ख़्वाब और वह भी अधूरा देखना,
कुछ दिनों से एक अजब मामूल इन आँखों,
कुछ आये या न आये फिर भी रस्ता देखना।
ढूंढ़ना गुलशन के फूलों में उसी की शक्ल को,
चाँद के आईने में उसका ही चेहरा देखना,
score: 9.36026
average: 9.5
Ratings: 9
 
« send to friends»
URL (link) to this writing. You can copy and paste this in your email to send to your contacts:
 
Not good
Ok
Excellent!
 
 
 

Comments

[View All Comments]
 
410 days ago
Rating: 10
 
 
722 days ago
ne dmekmistediğini tam yansıtamıyor
 
 
722 days ago
Rating: 6
 
 
724 days ago
very nice
 
 
725 days ago
कोई आये या न आये फिर भी रस्ता देखना।
ढूंढ़ना गुलशन के फूलों में उसी की शक्ल को,
चाँद के आईने में उसका ही चेहरा देखना,
 
 
725 days ago
Rating: 10
 
 
725 days ago
Good
 
 
725 days ago
Rating: 10
 
 
725 days ago
nice
 
 
725 days ago
Rating: 10
 
 
725 days ago
Rating: 3
 
 
725 days ago
beautiful
 
 
725 days ago
Rating: 10
 
 
725 days ago
superb
 
 
725 days ago
Rating: 10
 
 
726 days ago
So beautiful words. What you say is this safari or.? Thank you sharing.
 
 
726 days ago
Rating: 10
 
[View All Comments]