सच लिखुँ तो अपने रुठ जाते है....

by: upendra Singh (on: Dec 4, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
मन की लिखुँ तो शब्द रुठ जाते है......
और सच लिखुँ तो अपने रुठ जाते है.....
दो शब्द तेरे होंठों से.. दो तेरी निग़ाहों से...*
और इतने में ही लिख दी किताब ऐ इश्क.....!!
रग-रग में इस तरह से समा कर चले गये,
जैसे मुझ ही को मुझसे चुराकर चले गये,
आये थे मेरे दिल की प्यास बुझाने के वास्ते,
इक आग सी वो और लगा कर चले गये..
नजरों को तेरे प्यार से इंकार नहीं है,
अब मुझे किसी और का इंतज़ार नहीं है,
खामोश अगर हूँ मैं तो ये वजूद है मेरा,
तुम ये न समझना कि तुमसे प्यार नहीं है..
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723 days ago
Beautiful words
 
 
723 days ago
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