हम तो बस निभाने को प्यार कहते हैँ...

by: upendra Singh (on: Dec 4, 2018)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
ऐ जिंदगी मुझे मेरी हैसियत का पता है.
तु बेवजह मुझे सताया न कर.
में भी इँसान हु पत्थर नही..
हर बार मुझे रुलाया न कर.
जान माँग ले बस एक बार वो भी दे देगे..
लेकिन बार-बार मुझे तु आजमाया न कर.
दो हिस्सो में बंट गये मेरे तमाम अरमान..
कुछ तुझे पाने निकले, कुछ मुझे समझाने निकले।
जिनके दिल अच्छे होते है...
उनकी किस्मत खराब होती है.
कुछ लोग खोने को प्यार कहते हैं,
तो कुछ पाने को प्यार कहते हैं,
पर हकीक़त तो ये है,
हम तो बस निभाने को प्यार कहते हैँ.
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485 days ago
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723 days ago
Wonderful
 
 
723 days ago
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724 days ago
Thanks friends
 
 
724 days ago
nice
 
 
724 days ago
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724 days ago
Nice
 
 
724 days ago
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724 days ago
Wah kya baat hei.. Full poem just superb 👌
सभल के रहना उन इन्सान से
जिसके दिल में भी दिमाग होते है
 
 
724 days ago
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724 days ago
nice
 
 
724 days ago
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724 days ago
very nice
 
 
724 days ago
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724 days ago
bahut sunder
 
 
724 days ago
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