रिहाई तेरी काली झुल्फों से ..............

by: Rajesh singh (on: Jan 19, 2019)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: RAJ......N.....SHARU
................रिहाई तेरी काली झुल्फों से ..............

1.
कल भी था ,आज भी है तेरा इन्तेजार ,
कैसे कहू की मुझे तुमसे है प्यार .
दफ़नाने नहीं तुमको मनाने आया हूँ .
साथ में दिल मेरा दिल का तोहफा लाया हूँ ........... .by राज

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चलो हठो वह कमज़ोर दिल का क्या करना ?...
बहुत देखि है यह तेरा रोज़ का बहाना ..
इतना आसान भी नहीं इस बार हमें मनाना ...
हम जानते है तुम्हे इंतज़ार है अब रिहाई का ............. by .. शरू

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2.
माना की आसान नहीं तुम्हे मनाना आज .
पर ये नामुमकिन भी तो नहीं हरगिज .
रिहा हो जॉन कभी तेरी काली झुल्फों से .
यह तो कभी मुमकिन नहीं इस जीवन में ............ .......by.. ..राज

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आइना में दिखती ऐश्वर्य कभी आती नहीं हाथ ,
रेगिस्थान में नज़र आती पानी , मिलती नहीं
आँख मिचोली खेलते सितारे हाथ नहीं लगते ,.
कभी कभी हाथ का निवाला मुह तक नहीं आते ............by शरू .

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734 days ago
tnq.........AKSHAY........N....Mr. Desai
 
 
735 days ago
lajawab
 
 
735 days ago
Rating: 10
 
 
738 days ago
बहोत अच्छा लीखा हे
 
 
738 days ago
Rating: 5
 
 
738 days ago
बहोत अच्छा लीखा हे
 
 
738 days ago
tnq YOSO JI...........ok we will keep posting .
 
 
738 days ago
Lovely one Sharu, Reading this type of Jugalbandi after a long time> Please continue.
 
 
738 days ago
Lovely one Sharu, Reading this type of Jugalbandi after a long time> Please continue.
 
 
738 days ago
Rating: 10
 
 
738 days ago
Rating: 10
 
 
738 days ago
Its very beautiful jugal bandi RAJ
 
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