माँ का संदेश ; और एक परिकल्पना ,

by: removed (on: Apr 13, 2019)
Category: Other   Language: Hindi
tags: सुजल






अम्मा, तुम हम सबको बहुत डाँटती थी -
“नल धीरे खोलो... पानी बदला लेता है!
अन्न नाली में न जाए, नाली का कीड़ा बनोगे!

सुबह-सुबह तुलसी पर जल चढाओ,
बरगद पूजो,
पीपल पूजो,
आँवला पूजो,

मुंडेर पर चिड़िया के लिए पानी रखा कि नहीं?

हरी सब्जी के छिलके गाय के लिए अलग बाल्टी में डालो।

अरे कांच टूट गया है। उसे अलग रखना। कूड़े की बाल्टी में न डालना, कोई जानवर मुँह न मार दे।

.. ये हरे छिलके कूड़े में किसने डाले, कही भी जगह नहीं मिलेगी........

माफ़ करना माँ, तुम और तुम्हारी पीढ़ी इतनी पढ़ी नहीं थी पर तुमने धरती को स्वर्ग बनाए रखा,
और हम चार किताबे पढ़ कर स्वर्ग-नरक की तुम्हारी कल्पना पर मुस्कुराते हुए धरती को नर्क बनाने में जुटे रहे।

प्यार और आभार

अम्मा, तुम हम सबको बहुत डाँटती थी -
“नल धीरे खोलो... पानी बदला लेता है!
अन्न नाली में न जाए, नाली का कीड़ा बनोगे!

सुबह-सुबह तुलसी पर जल चढाओ,
बरगद पूजो,
पीपल पूजो,
आँवला पूजो,

मुंडेर पर चिड़िया के लिए पानी रखा कि नहीं?

हरी सब्जी के छिलके गाय के लिए अलग बाल्टी में डालो।

अरे कांच टूट गया है। उसे अलग रखना। कूड़े की बाल्टी में न डालना, कोई जानवर मुँह न मार दे।

.. ये हरे छिलके कूड़े में किसने डाले, कही भी जगह नहीं मिलेगी........

माफ़ करना माँ, तुम और तुम्हारी पीढ़ी इतनी पढ़ी नहीं थी पर तुमने धरती को स्वर्ग बनाए रखा,
और हम चार किताबे पढ़ कर स्वर्ग-नरक की तुम्हारी कल्पना पर मुस्कुराते हुए धरती को नर्क बनाने में जुटे रहे।

प्यार और आभार

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650 days ago
Great massage...thanks
 
 
650 days ago
Rating: 10
 
 
650 days ago
Mom herself is a school.
 
 
650 days ago
Rating: 10
 
 
652 days ago
Very very nice, Sujal. It touched me.
 
 
652 days ago
Rating: 10
 
 
655 days ago
Maa to khud ek chalti phirti pathshala hai ,sujju.. Bahut hi khubsurat hai ye post. 👌
 
 
655 days ago
Rating: 10
 
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