मै शायर हु मोहब्बत का

by: upendra Singh (on: Apr 28, 2019)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
ज़रा सी ज़िंदगी है, अरमान बहुत हैं;
हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं;
दिल के दर्द सुनाएं तो किसको;
जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत है |
बड़ी अजीब सी है शहरों की रौशनी,
उजालों के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल है।
हालात ही कुछ ऐसे है कि खामोश हूँ वरना..
दफन मेरे सीने में तुफान बहुत है..
मै शायर हु मोहब्बत का
इश्क से नज्‍म सजाता हूँ
कभी पढ़ता हूं मोहब्बत को
कभी मोहब्बत लिख जाता हूँ...
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557 days ago
waaaaah
 
 
557 days ago
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571 days ago
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571 days ago
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577 days ago
Wah
 
 
577 days ago
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578 days ago
Thank you sharing, hope all well frd.have a nice Sunday.
 
 
578 days ago
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