मै शायर हु मोहब्बत का

by: upendra Singh (on: Apr 28, 2019)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
ज़रा सी ज़िंदगी है, अरमान बहुत हैं;
हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं;
दिल के दर्द सुनाएं तो किसको;
जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत है |
बड़ी अजीब सी है शहरों की रौशनी,
उजालों के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल है।
हालात ही कुछ ऐसे है कि खामोश हूँ वरना..
दफन मेरे सीने में तुफान बहुत है..
मै शायर हु मोहब्बत का
इश्क से नज्‍म सजाता हूँ
कभी पढ़ता हूं मोहब्बत को
कभी मोहब्बत लिख जाता हूँ...
score: 9.48946
average: 10.0
Ratings: 5
 
« send to friends»
URL (link) to this writing. You can copy and paste this in your email to send to your contacts:
 
Not good
Ok
Excellent!
 
 
 

Comments

[View All Comments]
 
724 days ago
waaaaah
 
 
724 days ago
Rating: 10
 
 
738 days ago
Rating: 9
 
 
738 days ago
Rating: 10
 
 
744 days ago
Wah
 
 
744 days ago
Rating: 10
 
 
745 days ago
Thank you sharing, hope all well frd.have a nice Sunday.
 
 
745 days ago
Rating: 10
 
[View All Comments]