ख्वाहिशो ने ही भटकाये है,

by: upendra Singh (on: Apr 28, 2019)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
ख्वाहिशो ने ही भटकाये है,
जिंदगी के रास्ते...
वरना...
रूह तो उतरी थी ज़मीं पे,
मँजिल का पता लेकर...!!
वो चाँदनी का बदन खुशबुओं का साया है,
बहुत अजीज़ हमें है मगर पराया है,
उसे किसी की मोहब्बत का ऐतबार नहीं,
उसे ज़माने ने शायद बहुत सताया है।
दुआ मांगी थी आशियाने की,
चल पड़ी आंधियां ज़माने की,
मेरे गम को कोई समझ न पाया,
मुझे आदत थी मुस्कराने की॥
जब तक न लगे बेवफ़ाई की ठोकर दोस्त,
हर किसी को अपनी पसंद पर नाज़ होता है।
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