कोई पराया नहीं ।

by: upendra Singh (on: Jun 15, 2019)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends

कहने को सभी अपने
कोई पराया नहीं,
गिरे जब जमीन पे तो
किसी ने उठाया नहीं ।

लुटाई जब दौलत हमने
कोई शरमाया नहीं,
लुट गए हम जब खुद तो
कोई पास आया नहीं ।

जिन्हे चाहा बेपनाह
वो चुरा गए मेरी चाह,
भटकते रह गए हम
वो पा गए नहीं राह ।

कहानी जिंदगानी की
सुना रहे हैं हम,
नगमें रोज नए-नए
गुनगुना रहे हैं हम।

दर्द-ए-दिल की दास्तान
बता रहे हैं हम,
लुट लो तुम जी भर के
लुट जाने का नहीं हमे गम ।
score: 9.37792
average: 10.0
Ratings: 3
 
« send to friends»
URL (link) to this writing. You can copy and paste this in your email to send to your contacts:
 
Not good
Ok
Excellent!
 
 
 

Comments

[View All Comments]
 
528 days ago
sanatsal değeri orta
 
 
528 days ago
Rating: 8
 
 
529 days ago
Super
 
 
529 days ago
Rating: 10
 
 
529 days ago
thanks
 
 
530 days ago
superb
 
 
530 days ago
Rating: 10
 
[View All Comments]