मुझे अपनी मुहब्बत के फसाने याद आते हैं।

by: upendra Singh (on: Jul 3, 2019)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: friends
मुझे अपनी मुहब्बत के फसाने याद आते हैं।
लबों पर गुनगुनाते थे तराने याद आते। हैं ।

किनारे बैठकर तालाब के जब खाब देखे थे ,
हुई बरसात के मौसम सुहाने याद आते हैं।

कभी तन्हाई में बैठा अकेला सोचता हूँ मैं ,
किये अब तक इकटठे जो खजाने याद आते हैं।

हटा पाया नहीं जिनको कभी अपने ख्यालों से ,
मुझे गुजरे हुए मंजर पुराने याद आते हैं।

बहाकर ले गए आंसू पले थे खाब आँखों में ,
बचीं वीरानियाँ केवल निशाने याद आते हैं।

न जाने किस तरह की थी इबादत उन दिनों मेरी ,
किये सजदे जहां मैंने ठिकाने याद आते हैं।

कभी मंदिर कभी अपनी सहेली के बहाने से ,
हुईं कितनी मुलाकातें बहाने याद आते हैं।

पता ही ना चला मुझको हुआ है इश्क भी उनको ,
मिले इस बात पर कितने उल्हाने याद आते हैं।
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